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जिन्दगी प्यार का गीत है इसे हर दिल को गाना पड़ेगा. .. …

जिन्दगी प्यार का गीत है। यह फिल्मी गीत चर्चित है लेकिन इंडियन

पॉलिटिक्स में एक बार फिर से यह सही साबित हुआ है। अरे भइया

दिल्ली के चुनाव की बात कर रहा हूं। शाहीन बाग, हिंदू मुसलमान,

कश्मीर, हिंदुस्तान-पाकिस्तान, अयोध्या का राम मंदिर, रोहिंग्या

शरणार्थी, बांग्लादेशी घुसपैठिये और पता नहीं क्या क्या बारूद फटा।

लेकिन यह जो इंडियन पब्लिक है वह भी भारत महासागर से कोई कम

नहीं है। कोई बड़ा धमाका होता है तो थोड़ी बहुत हलचल होती है लेकिन

फिर से सबको अपने अंदर दबाकर बैठ जाती है। इतना कुछ होने के

बाद भी अगर दिल्ली की पब्लिक फिर से केजरीवाल को ही चुनती है तो

या तो वह लोभी है या फिर सिद्धांतवादी। लेकिन दो पुरानी कहावत है।

नई कहावत है कि दिल्ली दिलवालों की नगरी है और पुरानी कहावत है

कि दिल्ली ठगों की नगरी है। अब इन दोनों कहावतों में से कौन सा

अभी सही बैठ रहा है, यह अपनी अपनी समझ की बात है।

दिल्ली के बाद अब बंगाल का दंगल होने वाला है

अब दिल्ली निपट गया तो आने वाले दिनों में बंगाल और बिहार की

चिंता सर पर मंडराने लगी है। बंगाल में ममता दीदी इतनी आसानी से

मैदान नहीं छोड़ेंगी, यह सभी जानते हैं। लेकिन असली बात तो यह है

कि वहां भी लोकसभा में जिन मुद्दों पर कामयाबी मिली थी, उन मुद्दों

का असर विधानसभा चुनाव में नहीं हुआ तो क्या होगा। ऊपर से

कांग्रेस अपने कट्टर विरोधी रहे वाम मोर्चा के साथ हाथ मिलाकर वहां

मैदान में उतर चुके हैं। वैसे पता नहीं दोनों की यह जुगलबंदी चुनाव

तक कायम रहेगी भी या नहीं। लेकिन यह भी समझने वाली बात है कि

जब संकट आता है तो बाघ और बकरी दोनों एक ही घाट पर पानी पीते

हैं। या फिर बाढ़ में सांप और मेंढ़क भी एक ही लकड़ी पर सवार होकर

बहते हैं। यह टैम टैम की बात है भाई कभी गाड़ी पर नाव तो कभी नाव

पर गाड़ी।

वर्ष 1983 में फिल्म बनी थी सौतन। इस फिल्म के लिए इस गीत को

लिखा था सावन कुमार ने और उसे संगीत में ढाला था उषा खन्ना ने।

गीत को स्वर दिया था लता मंगेशकर ने। गीत के बोल इस तरह हैं।

जिन्दगी प्यार का गीत है

इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी प्यार का गीत है
इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी ग़म का सागर भी है
हस के उस पार जाना पड़ेगा
जिंदगी एक अहसास है
टूटे दिल की कोई आस है
जिंदगी एक अहसास है
टूटे दिल की कोई आस है
जिंदगी एक बनवास है
काट कर सबको जाना पड़ेगा
जिंदगी प्यार का गीत है
इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी बेवफ़ा है तो क्या
अपने रूठे हैं हम से तो क्या
जिंदगी बेवफ़ा है तो क्या
अपने रूठे हैं हम से तो क्या
हाथ में हाथ ना हो तो क्या
साथ फिर भी निभाना पड़ेगा
जिंदगी प्यार का गीत है
इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिंदगी एक मुस्कान है
दर्द की कोई पहचान है
जिंदगी एक मुस्कान है
दर्द की कोई पहचान है
जिंदगी एक मेहमान है
छोड़ संसार जाना पड़ेगा

जिन्दगी प्यार का गीत है
इसे हर दिल को गाना पड़ेगा
जिन्दगी ग़म का सागर भी है
हस के उस पार जाना पड़ेगा

घर वापसी हो रही है अपने बाबूलाल जी की

अब झारखंड लौट आते हैं। अपने बाबूलाल जी फिर से भाजपा के हो

गये। इसे उन्होंने घर वापसी बताया है। अरे भइया घर लौटने में इतना

दिन क्यों लगा दिये। पिछले अनेक वर्षों से हर चुनाव के वक्त इसका

ऑफर तो आपको मिलता था। पहले इन ऑफरों को आप अफवाह

बताया करते थे। इस बार क्या हुआ। जब छह विधायक छोड़कर भाग

गये तो आपको तकलीफ नहीं हुई। इस बार दो विधायक ही कुल जमा

आपके पास थे। इन दोनों से इतना क्या नाराजगी हुई। लेकिन आपके

आने के बाद कमल फुल कितना खिलेगा और कमल फुल के सहारे तैर

रहे कितने लोग मुरझा जाएंगे, यह भी देखने वाली बात होगी। दूसरी

तरफ बाबूलाल जी से नाराज अपने बंधु और प्रदीप भइया क्या गुल

खिलाते हैं, यह देखने लायक बात होगी। संथाल परगना के भाजपा

सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि वह खुद कांग्रेस के दस विधायकों

को संपर्क में हैं और सरकार गिरा देंगे। अंत में झारखंड के मंत्रिमंडल

वाली सुपर डीलक्स बस में एक ही सीट खाली है। अब इस सीट पर

ईसाई कोटा से स्टीफन मरांडी सवार होते हैं या फिर बंधु भइया को

मौका मिलता है, यह देखने लायक बात होगी क्योंकि इस पर बहुत

कुछ निर्भर है। दुमका सीट पर उपचुनाव भी होना है। अब देखना है कि

हेमंत भइया दिल्ली से क्या कुछ नया तरकीब लेकर वापस लौट रहे हैं।

लेकिन इतना तो है कि उन्होंने बेइमान अफसरों को डराने का काम तो

शुरु कर दिया है। आने वाले दिनों में देखिये और कितनों का विकेट

गिरता है।

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