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नौकरी के लिए छोटे भाई ने बड़े भाई को मुर्दा घोषित कर दिया था

  • भाई मरने की सूचना पर पूरन महतो को सीसीएल में नौकरी

  • रामदेव महतो बनकर सीसीएल में करता था नौकरी

  • रामदेव महतो ने कहा मैं जिंदा हूं, हमें न्याय चाहिए

बेरमो कार्यालय

जरीडीह बाजारः नौकरी के लिए लोग तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं। इसी कड़ी में

जरीडीह पश्चिमी पंचायत निवासी रामदेव महतो को भी कागजी तौर पर मृत घोषित कर

दिया गया था। अब हकीकत सामने आयी है। सच्चाई यही है कि वह जिंदा हैं। उसका छोटा

भाई पूरन महतो ही रामदेव महतो बनकर लोगों व अधिकारियों को बरगला रहे हैं। रामदेव

महतो यह सिद्ध करने में लगा हुआ है कि वह जीवित है। क्योंकि उसका मृत्यू प्रमाण पत्र

बेरमो प्रखंड से बनवा लिया गया है। उक्त मृत्यू प्रमाण पत्र के आधार पर उसके मृतक भाई

पुरण महतो (जो रामदेव महतो का नौकरी सीसीएल बीएंडके एरिया के फेज टू में रामदेव

महतो बनकर नौकरी करता था) का पुत्र सीसीएल में नौकरी लेने के प्रयास में लगा हुआ है।

इससे पूर्व पुरण महतो के पुत्रों ने सीसीएल से मिलने वाला 13 लाख रुपए भी ले लिया है।

रामदेव महतो ने तेनुघाट कोर्ट में कम्पलेन केस 10-2019 के अंतर्गत शिकायत

वाद भी दर्ज कराया है। जिसमें लिखा है कि स्व पुरण महतो के पुत्र अशोक महतो, दशरथ

महतो, स्व पुरण महतो की पत्नी बुंदिया देवी सहित गामा सिंह ने फर्जी मृत्यू प्रमाण पत्र

के आधार पर सीसीएल से 13 लाख रुपए ले लिया है। जिसमें जाली नाम के साथ ही गलत

आधार, गलत राशन कार्ड व गलत मतदाता पहचान सहित गलत मृत्यू प्रमाण पत्र का

सहारा लिया गया है। उसमें यह भी लिखा है कि इसका विरोध करने पर उक्त लोग जान

मारने की धमकी देते रहते हैं।

नौकरी के लिए गड़बड़ी का खुलासा सूचना के अधिकार से

रामदेव महतो द्वारा बेरमो अंचल-प्रखंड से सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए

दस्तावेज के आधार पर यह खुलासा हुआ है कि जरीडीह पश्चिमी पंचायत के पंजीकरण

संख्या 11-2013, दिनांक 23 जुलाई 2103 को रामदेव महतो का मृत्यू प्रमाण पत्र निर्गत

किया गया है। तत्कालीन पंचायत सचिव रमेश ठाकुर ने सूचना अधिकार में जवाब देते

हुए लिखा है कि यह पंचायत के कार्यालय पंजी में अंकित है। इससे प्रतित होता है कि इसी

पंचायत से यह निर्गत किया गया है।

क्या कहते हैं बेरमो बीडीओ

इस मामले में बेरमो बीडीओ प्रवीण चौधरी यह काफी पुराना मामला है, लगता है आपसी

पारिवारिक विवाद में इस मामले को तुल दिया जा रहा है। वैसे डीपीआरओ साहब जांच कर

चुके हैं।अब सवाल उठता है कि मामला अगर पुराना हो तो जिवित व्यक्ति को मृत ही मान

लिया जाये। वह रे प्रशासन एक व्यक्ति को खुद को जिवित साबित करने के लिए दर दर

भटकना पड़े सवाल खड़ा होना लाजमी है।


 

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