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अपने आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने पूर्वोत्तर तक पहुंचे पंजाब के किसान

  • स्थानीय किसानों को जागरुक कर आंदोलन से जोड़ेगे

  • आंदोलनकारी तो मई 2024 तक के लिए लड़ने को तैयार

  • अन्य राज्यों के किसानों को जागरूक करना भी जरूरी है

  • कृषि कानूनों का असली खतरा यहां के किसानो को बतायेंगे

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: अपने आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने पंजाब के कई युवा किसान स्थानीय

किसानों से मिलने और उन्हें नए कृषि कानूनों के बारे में जागरूक करने के लिए पूर्वोत्तर

राज्य पहुंच गए हैं । उन्होंने कहा कि वे 26 नवंबर से दिल्ली में चल रहे किसानों के विरोध

के बारे में स्थानीय किसानों को सूचित करने के लिए आज यहां पहुंचे, जहां पंजाब,

हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान भाग ले रहे हैं और जिन्होंने घोषणा की है कि जब

तक केंद्र सरकार कृषि कानूनों को निरस्त नहीं करती तब तक उनका विरोध जारी रहेगा ।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए पंजाब के किसानों ने कहा कि वे कृषि कानूनों और न्यूनतम

समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बारे में जागरूकता पैदा करना चाहते हैं, क्योंकि देश के कई

किसानों को इसकी जानकारी नहीं थी। पंजाब से आए मनजिंदर सिंह रंधावा ने बताया कि

जब वे दूसरे राज्यों के किसानों से मिले तो उन्हें पता चला कि उन्हें एमएसपी के बारे में

कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने आगे कहा, अपने आंदोलन के साथ लोगों को जोड़ने के

अलावा हम कृषि कानूनों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए यात्रा कर रहे हैं।

तीनों ने जोर देकर कहा कि वे समिति से सहमत नहीं होंगे क्योंकि कृषि कानूनों को

निरस्त करने की उनकी मांग केंद्र के पास है । चूंकि केंद्र ने कृषि कानून बनाए थे, इसलिए

उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई केंद्र सरकार के साथ है । पंजाब के युवा किसानों ने भारत में

राज्यों के किसानों को कृषि उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर जागरूक करने के लिए

एक मिशन की स्थापना की है और बता रहे हैं कि क्यों केंद्र के नए कृषि कानून उनके हित

के लिए हानिकारक हैं।

अपने आंदोलन के समर्थन में 6 जनवरी को पंजाब से निकले हैं

इस बीच पटियाला से मंजिंद्र सिंह रंधावा (31) और फिरोजपुर के सुखजिंदर सिंह गिल ने 6

जनवरी को चंडीगढ़ से अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी से यात्रा कर बिहार, पश्चिम बंगाल होते हुए

असम के दीमापुर पहुंचे और कुछ किसानों के साथ बातचीत की है। उन्होंने वाहन के अंदर

सोने के प्रावधान किए हैं और उन लोगों के लिए स्लीपिंग बैग रखे हैं, जो दौरे के दौरान

अपने मिशन से जुड़े होने के इच्छुक हैं। यात्रा के दौरान रास्ते में खाना पकाने के लिए बर्तन

और एक स्टोव भी है ताकि यात्रा की लागत कम हो सके। पंजाब के युवा किसान ने यह

जानकर आश्चर्य व्यक्त किया कि पूर्वोत्तर राज्यों के किसान, कुछ अन्य राज्यों के साथ,

700 से 1,200 रुपये प्रति क्विंटल चावल बेच रहे हैं, जबकि पंजाब और हरियाणा में उनके

समकक्ष 1,900 रुपये में चावल बेच रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पूरे देश में एमएसपी को

वैध किया जाए और देश भर के सभी राज्यों में एपीएमसी बनाए जाएं ताकि किसानों के

जीवन स्तर को उठाया जा सके। अपने आंदोलन के कारणों पर बोलते हुए उन्होंने यह भी

चिंता व्यक्त की कि निजी कंपनियां नए कृषि कानूनों के तहत किसानों का शोषण करेंगी

क्योंकि वे किसी भी कर का भुगतान करने के हकदार नहीं थे । उन्होंने आरोप लगाया कि

नए कानूनों के तहत किसान अपनी उपज कम दाम पर बेचने को मजबूर होंगे।उन्होंने

कहा कि हम मई 2024 तक विरोध में बैठने के लिए तैयार हैं । हमारी मांग है कि तीनों

कानूनों को वापस लिया जाए और सरकार एमएसपी पर कानूनी गारंटी प्रदान करे। देश में

अगला लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई 2024 के आसपास होने वाला होगा।

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