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किसान की मदद के लिए आगे आयी भारतीय सेना, खरीदे तरबूज

रामगढ़ः किसान की मदद के लिए कोई मौजूद नहीं था। दरअसल इस बार यहां के युवा

किसान रंजन कुमार महतो के खेत में तरबूज की बंफर फसल हुई है। लॉकडाउन के दौरान

इसे खरीदने के लिए कौड़ियो के भाव भी कोई तैयार नहीं था। बाहर जो माल भेजा जा

सकता था, वह भी पूरी तरह बंद था। ऐसे मौके पर भारतीय सेना ने उसकी मदद में हाथ

बढ़ाये। रामगढ़ के सिख रेजिमेंटल सेंटर ने उनके पांच टन तरबूज खरीदे और बाजार दर

पर उसका भुगतान किया। युवा किसान रंजन कुमार महतो ने रांची यूनिवर्सिटी से

ग्रेजुएशन किया है। महतो की ओर से ऑफर दिए जाने के बाद कमांडेंट ब्रिगेडियर एम श्री

कुमार समेत एस आर सी के अन्य अधिकारियों ने बोकारो जिला से इस तरबूज को

खरीदा है। सेना और उनके परिवारों किसान के 25 एकड़ के खेत में गिफ्ट्स, ग्रोसरीज और

फूड पैकेट्स के साथ गए और अपने वाहनों पर ही 5 टन तरबूज खरीदकर एस आर सी

सेंटर लाये। किसान के खेत से एस आर सी करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर है। युवा

किसान की खेतों में इस बार 6 एकड़ में करीब 120 टन तरबूज की पैदावार हुई है, लेकिन

ग्राहक नहीं मिल रहे। इंडियन आर्मी ने इस युवा किसान की मदद की है। इस किसान को

बाजार में तरबूज के अच्छे दाम नहीं मिले। लोकल मार्केट में कोई इसे 2 रुपये प्रति किलो

के हिसाब से भी नहीं खरीद रहा है। इसके बाद उन्हों ने इसे सेना को ही देने का फैसला

किया। सेना ने सैनिकों के लिए ही बाजार भाव पर 5 टन तरबूज खरीद लिया। पानी बचाने

के लिए यह किसान ड्रिप इरीगेशन के जरिए खेती करता है।

किसान की मदद से टूटता हौसला बंधा हुआ है

बहुत मेहनत के बाद भी गरीब किसानों को उनकी फसल बेचने में कई तरह की दिक्कतों

का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमें पता चला कि महतो ने करीब दो साल

खेती-किसानी का काम शुरू किया था लेकिन कोविड-19 महामारी और चक्रवाती तूफान

यास की वजह से भारी नुकसान उठाना पड़ा है। ब्रिगेडियर कुमार रामगढ़ कैण्टोानमेंट बोर्ड

के अध्य9क्ष भी हैं। रंजन महतो को पढ़ाई पूरी करने के बाद भी जब नौकरी नहीं मिली तो

उन्हें् खेती करने का ही फैसला लिया। इसके लिए उन्होंषने 5,000 रुपये प्रति एकड़ की

दर से 25 एकड़ ज़मीन को पट्टे पर लेकर खेती करनी शुरू की। करीब 6 एकड़ ज़मीन में

उन्होंोने 15 लाख रुपये की लागत से तरबूज की खेती की थी। इससे करीब 120 टन

तरबूज की पैदावार हुई है। कुल पैदावार का एक बड़े हिस्से की बिक्री नहीं हो पाई है।

तरबूज की इतनी पैदावार के बाद भी लॉकडाउन की वजह से ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। यही

कारण है कि फसल अब खेतो में ही सड़ना शुरू कर चुके हैं। गांव में तो 2 रुपये प्रति

किलोग्राम की दर से भी कोई व्यक्ति नहीं खरीद रहा है। आर्मी ने कुछ दूसरी जगहों पर

भी पता किया ताकि इसे बेचा सके। उन्हेंह कुछ खास जानकारी नहीं मिलने की वजह से

सेना ने खुद की खपत के लिए ही इसे खरीदने का फैसला किया गया। बाकी के बचे 19

एकड़ खेत में महतो ने शिमला मिर्च, बैंगन और दूसरी सब्जियों की खेती की है। उन्हों ने

खेती के काम के लिए 40 महिलाओं को रोजगार भी दिया है। बता दें कि झारखंड में

तरबूज, टमाटर, मटर, बीन्सं, गोभी और भिंडी आदि की पर्याप्त खेती होती है।

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