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तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करुं गीत इस मौके पर जायज है

तुझको मिर्ची क्यों लगी, पहले यह तो बता दो मैडम जी। जिस तरीके से कल आपको

संसद में कैमरा अपनी तरफ रखा, उसे सभी ने ध्यान से देखा। लेकिन टीवी वाले भी

बड़े चालाक निकले। आपकी बातों के साथ साथ जो कुछ राहुल गांधी ने कहा था, उसे

एक नहीं कई बार दिखा दिया। दोनों के बीच कोई तालमेल ही नहीं था।

क्या वाकई अपनी समझदारी घास चरने गयी थी या फिर मामला कुछ वैसी ही था,

जैसे अपने राहुल भइया बताना चाहते थे कि ध्यान भटकाने के लिए फालतू का

हंगामा किया गया।

अरे मैडम तो मैडम अपने राजनाथ भइया भी इसी लाइन पर आ जाएंगे, ऐसी तो कतई

उम्मीद नहीं थी। कुछ लोग तो अब बचे हैं तो सीरियस बात-चीत किया करते हैं। सभी

ने हम पब्लिक को एक दम गधा या बहरा समझ रखा था क्या। अरे भाई हमलोगों ने

भी सुना है किसने क्या कहा। जनसभा की बात थी को सभी के कान में हर शब्द जाना

तो तय था। आम को अमरुद बनाने का काम हर बार सफल हो, अइसा रोज रोज नहीं

चल सकता।

इतने दिनों तक पप्पू और गप्पू के नाम पर जो कुछ कहानी चली, वह फिल्म अब पर्दे

से उतर चुकी है मेरे यार। अभी तो प्याज की कीमतों के मारे आंख से आंसू निकल रहे

हैं और आपलोगों को फिर से वही बेतुका राग याद आ रहा है।

तुझको हर बात का ध्यान दिलाना मेरी जिम्मेदारी तो नहीं

वैसे भी इस बार को अपने राहुल भइया ने भी अपनी आदत से उलट धोबी पछाड़ दांव

मारा है। अपनी बात पर अड़ने के साथ साथ नरेद्र मोदी का वह पुराना वीडियो भी जारी

कर दिया, जिसमें वह क्या कुछ कहते सुनाई दे रहे थे। इतना के बाद भी वह नहीं रूके।

जिन मुद्दों पर भाजपा के नेता पहले कांग्रेस को पानी पी पीकर कोसा करते थे, अब

वही अपने माथे पर पड़ा है तो परेशानी किस बात की है।

अरे भाई जो रोपा है, वहीं न काटोगे। इसलिए तुम्हें भी अब इन बातों से तकलीफ नहीं

होनी चाहिए। वैसे सीएबी के मुद्दे पर पूरे उत्तर पूर्व पर ध्यान नहीं दिया जाना एक

राष्ट्रीय भूल है, इसे समझना और स्वीकार करना होगा। अइसा करने के बदले

आपलोग खिस निकाल रहे हैं, यह अच्छी बात नहीं है।

इसी बात पर मुझे गोविंदा की फिल्म कुली नंबर वन का गाना याद आ रहा है।

इस गीत को लिखा था समीर ने और सुरों में ढाला था आनंद मिलिंद की जोड़ी ने।

इसे स्वर दिया था कुमार शानू और अलका याज्ञिक ने। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

मैं तो रास्ते से जा रहा था, मैं तो भेलपूरी खा रहा था
मैं तो लड़की घूमा रहा था
रास्ते से जा रहा था, भेलपूरी खा रहा था,
लड़की घूमा रहा था,
तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ
मैं तो रास्ते से जा रही थी मैं तो आइसक्रीम खा रही थी
हो, मैं तो नैना लड़ा रही थी
रास्ते से जा रही थी, आइस-क्रीम खा रही थी,
नैना लड़ा रही थी

तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ

जले चाहे सारा ज़माना, चाहे तुझे तेरा दीवाना
संग तेरे मैं भाग जाऊँ नज़र किसी को भी न आऊँ
लोग दिलवालों से यार जलते हैं कैसे बताऊँ क्या-क्या चाल चलते हैं
मैं तो गाड़ी से जा रहा था मैं तो सीटी बजा रहा था
मैं तो टोपी फिरा रहा था
हो, गाड़ी से जा रहा था, सीटी बजा रहा था,
टोपी फिरा रहा था

तुझ को धक्का लगा तो मैं क्या करूँ

नई कोई पिक्चर दिखा दे मुझे कहीं खाना खिला दे
ज़रा निगाहों से पिला दे प्यास मेरे दिल की बुझा दे
आज तुझे जी भर के प्यार करना है तेरी निगाहों से दीदार करना है
मैं तो ठुमका लगा रही थी मैं तो गीत कोई गा रही थी
मैं तो चक्कर चला रही थी ठुमका लगा रही थी, गीत कोई गा रही थी,
चक्कर चला रही थी तेरी नानी मरी तो मैं क्या करूँ
मैं तो रास्ते से जा रहा था मैं तो भेलपूरी खा रहा था
मैं तो लड़की घूमा रहा था
रास्ते से जा रहा था, भेलपूरी खा रहा था,
लड़की घूमा रहा था,

तुझको मिर्ची लगी तो मैं क्या करूँ

चलिए अब अपने होम स्टेट झारखंड में लौट आते हैं। तीन चरण का मतदान हो चुका है।

अब तक ऊंट किसी एक करवट पर बैठती नजर नहीं आ रही है। दो और चरणों का चुनाव

बचा है, उसमें कौन कितने पानी में है, इससे तय हो जाएगा कि तुझको मिर्ची लगती है या

दूसरों को। तेवर दोनों के खतरनाक है। अलबत्ता अपने सुदेश भइया और बाबू लाल जी को

कमजोर आंकड़े की भूल का खामियजा कौन भोगेगा, यह तो मतगणना के बाद स्पष्ट हो

ही जाएगा।

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