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सोनभद्र हिंसा के सिलसिले में योगी ने पांच अधिकारियों को किया निलंबित




लखनऊ : सोनभद्र हिंसा का मामला आज प्रियंका गांधी के हस्तक्षेप से महत्वपूर्ण बन चुका है।

इस संबंध में सपा सांसद मोहम्मद आजम खां के उत्पीड़न को लेकर विपक्ष के राज्य विधानसभा में

जबरदस्त हंगामे और शोरशराबे के बीच  योगी आदित्यनाथ ने सोनभद्र जिले में हुयी

हिंसा के सिलसिले में पांच अधिकारियों के निलंबन की घोषणा की।

सोनभद्र जिले के घोरावल क्षेत्र में पिछले बुधवार को जमीनी विवाद में हुये संघर्ष मंं

दस आदिवासियों की मृत्यु हो गयी थी और 25 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गये थे।

श्री योगी ने कहा कि सोनभद्र हिंसा की जांच दो सदस्यीय दल को सौंपी गयी थी

जिसकी रिपोर्ट के आधार पर उप जिलाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक,उपनिरीक्षक और

एक सिपाही को निलंबित की अनुशंसा की गयी है। उन्होने कहा कि घोरावल क्षेत्र के उम्भा गांव में जमीनी विवाद के लिये पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार जिम्मेदार है।

कांग्रेस के शासनकाल 200 बीघा जमीन सोसाइटी को दी गयी थी

जबकि बाद में वर्ष 1989 में एक बार फिर इस जमीन का हस्तांतरण किया गया।

मुख्यमंत्री ने  विवादित जमीन मामले को लेकर अपर मुख्य सचिव (राजस्व) की

अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति की घोषणा की जो दस दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

समिति में दो अन्य सदस्यों में विंध्याचल के मंडलायुक्त और श्रम विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं।

विधानसभा में मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बावजूद समाजवादी पार्टी (सपा) और

कांग्रेस के सदस्य शोरशराबा करने लगे और सदन की वेल में आकर सरकार विरोधी नारे लगाते रहे।

उत्तर प्रदेश सभा विपक्ष दो अंतिम लखनऊ उत्तर प्रदेश सभा विपक्ष

श्री योगी ने सोनभद्र हिंसा सदन को आश्वस्त किया कि सरकार घटना में शामिल किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी।

उन्होने कहा कि इस सिलसिले में अब तक मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान और

उसके भाई समेत 29 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

उन्होने कहा कि जमीन का यह विवाद 1955 से लंबित है जो पिछले कई सालों में तनाव की वजह बना।

यह अफसोसजनक है कि किसी ने भी इस मुद्दे को हल करने की कोशिश नहीं की।

सदन की दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के नेता रामगोंिवद चौधरी ने

सपा सांसद मोहम्मद आजम खां के उत्पीडन का मामला उठाते हुये कहा कि

सरकार ने श्री खां को भूमाफिया घोषित कर दिया है।

इसके बाद वह कुछ और कहते कि श्री योगी आदित्यनाथ खड़े हो गये और उन्होने सोनभद्र की घटना का जिक्र करते हुये सरकार की इस संबंध में की गयी कार्यवाही की जानकारी देनी शुरू कर दी।

मुख्यमंत्री के बयान के बाद विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने विपक्ष द्वारा लहराये जा रहे पोस्टर को लेकर खिन्नता प्रकट की और उन्हे बाहर रख कर आने को कहा।

विपक्ष ने उनकी बात को खारिज कर दिया जिसके बाद सदन की कार्यवाही 40 मिनट के लिये स्थगित कर दी गयी। इससे पहले विपक्ष के शोरशराबे के कारण प्रश्नकाल बाधित हुआ।

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