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यस बैंक के बड़े कर्जदारों का राज तो खुले

यस बैंक को पटरी पर लाने में सरकारी बैंक बोझ उठा रहे हैं। दूसरी तरफ शेयर बाजार में

इसकी कीमतों में उतार चढ़ाव और बदलावों की वजह से आम जनता को हजारों करोड़ का

नुकसान हो चुका है। ऐसे में यस बैंक के बड़े कर्जदारों ने क्या कुछ गुल खिलाया है, उसकी

विस्तृत जानकारी जनता को मिलनी चाहिए। लोकसभा में भी राहुल गांधी के सीधे प्रश्न के

उत्तर में सरकार ने गोल मटोल जबाव दिया है। सवाल बहुत आसान सा था कि बड़े बैकों

के 50 बड़े वैसे कर्जदार कौन हैं, जो जानबूझकर कर्ज नहीं लौटा रहे हैं। यह सवाल काफी

अरसे से पूछा जा रहा है। लेकिन हर बार सरकार इसका सीधा उत्तर देने से कतराती रही

है। अब पहली बार केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़े कर्जदारों के नामों का

खुलासा कर दिया तो जांच एजेंसियों की सक्रियता बढ़ गयी है। जब तक केंद्रीय वित्त मंत्री

ने कुछ नहीं कहा था तो तमाम केंद्रीय एजेंसियां हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई थी। अलबत्ता

इस बीच सिर्फ ईडी ने राणा कपूर से पूछताछ करने के अलावा उनकी एक बेटी को विदेश

जाने से रोक लिया था। लेकिन अब बड़े कर्जदारों से होने वाली पूछताछ से कोई नया जिन्न

बाहर निकला तो यह मुद्दा काफी लंबा खींच सकता है। यूं तो अनिल अंबानी राफेल विमान

सौदे के बाद से पर्दे के पीछे ही चल रहे थे। बीच में बैंक की परेशानी जब आ खड़ी हुई थी तो

उनके भाई मुकेश अंबानी ने उन्हें संकट से बाहर निकला था। अब नये सिरे से उनका नाम

यस बैंक घोटाले में इसलिए उछला है क्योंकि वह भी इस बैंक के बड़े कर्जदारों में से एक हैं।

यस बैंक के बड़े कर्जदारों में डूबे हुए लोग ही क्यों

वैसे इस सूची में जेट एयरवेज के पूर्व मालिक नरेश गोयल और जी टीवी के मालिक सुभाष

चंद्रा भी हैं। पहले से ही इस बात की चर्चा हो रही है कि अंततः जी टीवी का मालिकाना

कंपनी की वित्तीय स्थिति की वजह से अंततः सुभाष चंद्रा के हाथ से निकलने वाला है।

उल्लेखनीय है कि यह तीनों लोग अपनी डूबती हुई कंपनियों को बचा पाने में असफल रहे

हैं। लेकिन यस बैंक के बड़े कर्जदारों में उपरोक्त तीन नामों के अलावा कॉक्स एंड किंग्स के

पीटर केरकर, डीएचएफएल के धीरज और कपिल वाधवा, इंडिया बूल्स के समीर गहलोत

शामिल हैं। इनमें के कॉक्स एंड किंग्स कंपनी भी दिवालिया हो चुकी है। शेष दोनों

कंपनियों की वित्तीय स्थिति के बारे में जनता पहले से ही वाकिफ हैं। जाहिर है कि यस

बैंक से भी इन तमाम लोगों ने जो कर्ज लिये हैं, वे कहीं और खर्च कर दिये गये हैं। लेकिन

असली सवाल तो यह है कि बैकिंग नियमों पर कड़ी नजर रखने का दावा करने वाले

भारतीय रिजर्व बैंक को पहले यह गड़बड़ियां क्यों नहीं दिखी थी। देश में लगातार बड़े

कर्जदारों का नाम सार्वजनिक करने की मांग तेज हो रही है। अनेक नेताओं ने इन बड़े

कर्जदारों के पास देश का जो पैसा फंसा हुआ है, उसके बारे में आंकड़े दिये हैं। फिर भी

इच्छाकृत तरीके कर्ज नहीं लौटाने वालों के प्रति इस कृपा का असली अर्थ समझ से परे हैं।

अब ईडी ने बड़े कर्जदारों से बैंक के बारे में पूछताछ प्रारंभ कर दी है। समझा जाता है कि

इन बड़े नामों से अपनी सुविधा के मुताबिक जांच में सहयोग की तिथि बताने को कहा

गया है। ईडी की जांच के साथ साथ केंद्रीय जांच ब्यूरो भी इस पूरे प्रकरण में पैसे की लूट के

तौर तरीकों का अलग से जांच कर रही है।

कर्ज देने के बहाने घूस का धंधा तो जगजाहिर है

प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया है कि राणा कपूर के परिवार की कंपनियों को विभिन्न

माध्यमों से करीब छह सौ करोड़ रुपये मिले हैं। जांच के दायरे में राणा कपूर के अलावा

उसकी पत्नी बिंदू कपूर, पुत्रियां रोशनी कपूर, राखी कपूर टंडन और राधा कपूर खन्ना

शामिल हैं। जांच एजेंसियां जनता के पैसे के यस बैंक के माध्यम से अन्य कंपनियों को

कर्ज देने के बाद बंदरबांट की अंदर छोर तक पहुंचना चाहती हैं। इन तमाम कंपनियों के

मालिकों के आपसी व्यापारिक संबंधों की भी जांच हो रही है। ताकि यह पता चल सके कि

जनता का पैसा कहां और किधर छिपाया गया है। अगर एक बार यह राज खुला तो देश के

अन्य बैकों से पैसा लेकर नहीं लौटाने वाले भी त्वरित कार्रवाई के लिए बाध्य हो जाएंगे।

उन्हें भी यह स्पष्ट हो जाएगा कि गोपनीयता की आड़ में वह लगातार जनता की आंखों में

धूल नहीं झोंक सकते और वर्तमान में यह देश की अन्यतम प्रमुख जरूरत भी है ताकि चंद

लोगों के पास फंसा देश की जनता का पैसा वापस देश को मिल सके।

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