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यस बैंक घोटाले में बड़े नामों को टटोल रही सरकारी एजेंसियां

  • अनिल अंबानी, नरेश गोयल और सुभाष चंद्र भी शामिल

  • बड़े लोगों से अपनी सुविधा के अनुसार समय मांगा गया 

  • पूरे प्रकरण में सीबीआई की जांच अलग से जारी है

  • कर्ज देने के एवज में घूसखोरी का धंधा अहम

विशेष प्रतिनिधि

नईदिल्लीः यस बैंक घोटाले में भी अनिल अंबानी का नाम काफी दिनों की चुप्पी के बाद

फिर से उछला है। इस बार उनका नाम यस बैंक के बड़े कर्जदार के तौर पर सामने आया है।

इससे पहले राफेल विमान सौदे में भारतीय कंपनी के तौर पर उनका नाम  उछला था।

वैसे इस सूची में जेट एयरवेज के पूर्व मालिक नरेश गोयल और जी टीवी के मालिक सुभाष

चंद्रा भी हैं। उल्लेखनीय है कि यह तीनों लोग अपनी डूबती हुई कंपनियों को बचा पाने में

असफल रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि ईडी ने इस यस बैंक मामले की जांच प्रारंभ कर दी है। इस क्रम में राणा

कपूर को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद उसके परिवार के उन लोगों के भी विदेश जाने

पर रोक लगायी गयी है, जो दरअसल अन्य कंपनियों में निदेशक पद पर हैं। प्रथमदृष्टया

ऐसा प्रतीत होता है कि राणा कपूर के परिवार के लोगों ने इन कंपनियों को कर्ज देने के

एवज में घूसखोरी का माध्यम बना रखा था। क्योंकि इन कंपनियों में काम काज कुछ नहीं

होता था। कई में तो सिर्फ निदेशक ही थे जबकि कर्मचारी एक भी नहीं था।

यस बैंक घोटाले के साथ साथ कर्ज की घूसखोरी अहम

अब ईडी ने बड़े कर्जदारों से बैंक के बारे में पूछताछ प्रारंभ कर दी है। दरअसल अनेक बड़े

कर्जदारों द्वारा कर्ज नहीं लौटाने की वजह से ही बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार

बिगड़ती चली गयी। जिसके बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने इसके निदेशक मंडल का पुनर्गठन

कर बुधवार की शाम के बाद से बैंक का काम काज सही तरीके से चालू करने की घोषणा

कर दी है।

ईडी के सूत्रों के मुताबिक बड़े कर्जदारों से पूछताछ की पूरी तैयारी कर ली गयी है। इसके

लिए समन भी शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा। समझा जाता है कि इन बड़े नामों से अपनी

सुविधा के मुताबिक जांच में सहयोग की तिथि बताने को कहा गया है।

यस बैंक के मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बड़े बकायेदारों की सूची

जारी किये जाने के बाद ही सरकारी एजेंसियां सक्रिय हुई हैं। श्रीमती सीतारमण ने यह

साफ कर दिया था कि यस बैंक के बड़े कर्जदारों में उपरोक्त तीन नामों के अलावा कॉक्स

एंड किंग्स के पीटर केरकर, डीएचएफएल के धीरज और कपिल वाधवा, इंडिया बूल्स के

समीर गहलोत शामिल हैं। इनमें के कॉक्स एंड किंग्स कंपनी भी दिवालिया हो चुकी है।

कर्ज देने के बाद घूस लेने के लिए बनायी कंपनी

ईडी की जांच के साथ साथ केंद्रीय जांच ब्यूरो भी इस पूरे प्रकरण में पैसे की लूट के तौर

तरीकों का अलग से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में ही स्पष्ट हो गया है कि राणा कपूर

के परिवार की कंपनियों को विभिन्न माध्यमों से करीब छह सौ करोड़ रुपये मिले हैं। इन

कंपनियों के पास कोई स्थापित और चलता हुआ कारोबार नहीं होने के बाद भी अन्य

कंपनियों द्वारा इन्हे जो पैसा दिया गया है, वह दरअसल कर्ज देने के एवज में दी गयी घूस

की रकम है, ऐसा सोचा गया है।

जांच के दायरे में राणा कपूर के अलावा उसकी पत्नी बिंदू कपूर, पुत्रियां रोशनी कपूर, राखी

कपूर टंडन और राधा कपूर खन्ना शामिल हैं। जांच एजेंसियां जनता के पैसे के यस बैंक के

माध्यम से अन्य कंपनियों को कर्ज देने के बाद बंदरबांट की अंदर छोर तक पहुंचना चाहती

हैं। इन तमाम कंपनियों के मालिकों के आपसी व्यापारिक संबंधों की भी जांच हो रही है।

ताकि यह पता चल सके कि जनता का पैसा कहां और किधर छिपाया गया है


 

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