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येलोस्टोन के इलाके में ज्वालामुखी विस्फोट के संकेत मिल रहे हैं

  • लगातार आ रहे भूकंपों से बढ़ती ही जा रही है आशंका

  • पहले से ही प्रमाणित है कि जीवंत ज्वालामुखी है

  • पिछले महीने 43 भूकंप दर्ज किये गये हैं यहां

  • पानी के भाप का फब्बारा भी कई जगह निकला

राष्ट्रीय खबर

रांचीः येलोस्टोन के इलाके में लगातार भूकंप आ रहे हैं। पिछले दो महीनों में वहां धरती

डोलने की घटनाएं उम्मीद से काफी अधिक हुई है। इसी वजह से वैज्ञानिक यह मान रहे हैं

कि इस इलाके के नीचे जीवित ज्वालामुखी अब शायद किसी समय विस्फोट के बाद बाहर

आ सकती है। येलोस्टोन के नीचे जीवित ज्वालामुखी है, इसका पता तो काफी पहले से ही

लोगों को था। लेकिन अब भूकंप की संख्या बढ़ने की वजह से यह माना जा रहा है कि

शायद जमीन के अंदर कुछ परिस्थितियां बदल रही हैं और उसी वजह से अधिक भूकंप आ

रहे हैं। पिछले अप्रैल महीने में वहां छोटे बड़े मिलाकर 40 भूकंप के आंकड़े दर्ज किये गये हैं।

इसी वजह से वैज्ञानिकों को यह आशंका है कि किसी भी दिन बिना किसी पूर्व सूचना के

यह महाविस्फोट जैसी परिस्थिति भीषण संकट भी पैदा कर सकती है। येलोस्टोन

वॉल्कानो ऑबजरवेटरी के वैज्ञानिक दिन रात इस पर नजर रख रहे हैं। इनलोगों ने

पश्चिमी अमेरिका के भूकंप के मासिक आंकड़ों से येलोस्टोन का भूकंपों का मिलान भी

किया है। इन भूकंपों के आने के दौरान येलोस्टोन के इलाके में तीन अलग अलग स्थानों

पर गैस का गुबार भी तेजी से निकलता हुआ दिखाई पड़ा है। इन गुबारों के साथ ढेर सारा

भाप भी निकलता हुआ देखा गया है। यानी अंदर का पानी गर्म होन के बाद भाप बनकर

बाहर आने लगा है। अनेक लोगों को आशंका है कि बिना किसी पूर्व सूचना के ही अचानक

से यह पूरा इलाका भीषण ज्वालामुखी विस्फोट की चपेट में आ सकता है। इस क्षेत्र में

पहले भी ज्वालामुखी विस्फोट होने के प्रमाण मौजूद हैं। लेकिन यह सारे विस्फोट काफी

अरसा पहले और कई लाख वर्ष पूर्व हुए थे।

येलोस्टोन पर वैज्ञानिक सफाई के बाद भी अफवाहों का दौर

वैज्ञानिक अचानक ऐसे किसी हादसे से इंकार कर रहे हैं, इसके बाद भी सोशल मीडिया में

अब येलोस्टोन के संभावित ज्वालामुखी विस्फोट को लेकर अनेक किस्म की चर्चाएं चल

पड़ी है। दरअसल जीवित ज्वालामुखी के ऊपर होने की वजह से यह आशंका तो पहले से ही

बना हुई है कि यह कभी भी विस्फोट कर सकता है। पृथ्वी के कई स्थानों पर हाल के दिनों

में वर्षों से सोए पड़े कई अन्य ज्वालामुखी विस्फोट भी हुए हैं। इनमें आइसलैंड का विस्फोट

सभी को हैरान कर गया है। येलोस्टोन के नीचे जीवंत ज्वालामुखी होने के बाद भी

वैज्ञानिक यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि फिलहाल वहां की जमीन की गहराई में क्या

कुछ उथल पुथल चल रहा है। वैज्ञानिक सिर्फ लगातार आने वाले भूकंपों के आंकड़े दर्ज कर

रहे हैं तथा जहां जहां से भाप निकल रहा है, वहां की स्थिति का अध्ययन कर रहे हैं। पिछले

अप्रैल महीने में वहां आये भूकंपों मे सबसे अधिक तेज भूकंप मात्र 2.5 रिचेटर स्केल का

था, जो 27 अप्रैल को दर्ज किया गया था। जमीन के अंदर पंद्रह किलोमीटर की गहराई में

इस भूकंप का केंद्र दर्ज किया गया है। लेकिन ज्वालामुखी के ऊपर उठने जैसे कोई संकेत

अब तक नहीं मिले हैं। इस जीवंत ज्वालामुखी के ऊपर के येलोस्टोन के इलाके में भूकंप

का आना कोई बड़ी बात नहीं है। वहां अक्सर ही ऐसे  कंपन महसूस किये जाते रहे हैं। इनमें

से अधिकांश रिचेटर स्केल पर इतने कम होते हैं कि आम आदमी उन्हें ठीक से महसूस भी

नहीं कर पाता है। इस बारे में लगातार नजर रखने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि वहां

किसी बड़े ज्वालामुखी विस्फोट के पहले अत्याधुनिक यंत्रों और उपकरणों से जमीन के

अंदर की हलचल के बारे में निश्चित तौर पर पता चल जाएगा।

वैज्ञानिक यंत्रों से पहले इसकी जानकारी मिलने की बात कहते हैं

वैसे इसके अलावा भाप निकलने के बारे मे वैज्ञानिकों का आकलन है कि ऐसा होने के

दौरान पानी के सारे इलाके अचानक ही सूख जाएंगे और भीषण भाप निकलने के दौरान

यह एक किलोमीटर तक के इलाके में फैल भी सकता है। येलोस्टोन की जमीन के नीचे

जीवित ज्वालामुखी और लावा का विशाल प्रवाह होने की पुष्टि काफी पहले ही हो चुकी थी।

माना जाता है कि इसका केंद्र दरअसर येलोस्टोन के अभयारण्य के बीच है। फिर भी

वैज्ञानिक इनदिनों पृथ्वी के अन्य हिस्सों में अचानक से हुए ज्वालामुखी विस्फोट की

वजह से यहां के घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाये हुए हैं।

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