पृथ्वी को तबाह कर देगा विस्फोट,अमेरिका के येलोपार्क के दस किलोमीटर नीचे है ज्वालामुखी

ज्वालामुखी
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  • चट्टान की दो परतों के नीचे है खतरा 

  • बोतलबंद सोडा जैसी है स्थिति 

  • 70 किलोमीटर में फैला है दायरा

प्रतिनिधि
नईदिल्ली: अमेरिका में रहने वालों के लिए खुशखबरी यह है कि वहां की सबसे बड़ी ज्वालामुखी अभी तुरंत शायद नहीं फटने वाली है।
यूं तो ज्वालामुखी के विस्फोट के बारे में पहले से अनुमान लगाना बड़ा कठिन होता है।
फिर भी येलोस्टोन नामक इस ज्वालामुखी पर लगातार शोध करने वाले वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह तुरंत ही सतह पर नहीं आने वाला है।
अमेरिका का प्रसिद्ध येलोस्टोन पार्क इसी इलाके में ज्वालामुखी के ऊपर ही बना है।
जमीन के अंदर खौलते लावा का आकार और प्रकार बहुत खतरनाक है।
समझा जाता है कि इसके बाहर आते ही उत्तर अमेरिका का पूरा भूगोल ही बदल जाएगा।
इस बारे में प्रकाशित एक शोध प्रबंध में यही जानकारी दी गयी है कि निकट भविष्य में इसके विस्फोट की कोई संभावना नहीं है।
लेकिन शोध में यह साफ कर दिया गया है कि इसे एक न एक दिन फटना ही है।
शोध दल के नेता और ओरेगन विश्वविद्यालय के डायलन कोलोन का कहना है कि फिलहाल यह बोतलबंद सोडे की स्थिति में है।
अभी यह नहीं फटेगा, ऐेसा प्रतीत होता है लेकिन यह भी स्पष्ट है कि एक न एक दिन इसे बाहर आना ही है।

पत्थर के दो सतह नीचे दबी है ज्वालामुखी

शोध दल ने निष्कर्ष निकाला है कि यह ज्वालामुखी फिलहाल दो सतहों के नीचे दबी हुई है।
बड़े बड़े चट्टानों के नीचे खौलते लावा का यह समुद्र बहुत बड़ा है।
सामान्य सर्वेक्षण का नतीजा है इसका आकार करीब सत्तर किलोमीटर फैला हुआ है।
इसलिए समझा जा सकता है कि जब यह पूरे वेग के साथ पृथ्वी के सतह पर आयेगा तो कितने बड़े इलाके में तबाही फैलायेगा।
वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस आकार का विशाल विस्फोट करीब सत्तर हजार वर्ष पहले हुआ था।
बीच की अवधि में छोटे मोटे ज्वालामुखी विस्फोट तो होते ही रहे हैं के पर आकार में सभी इसके लिहाज से छोटे रहे हैं।
पहली बार इस जमीन के अंदर दबी इस ज्वालामुखी का पता वर्ष 1960 में चला था।
लेकिन इसके विशाल आकार के बारे में सही जानकारी वर्ष 1980 के वैज्ञानिक परीक्षणों से मिली।
इस लावा के ऊपर चट्टानों की दो परत है। दोनों परतें ठोस चट्टानों की है।
फिलहाल यह लावा जमीन के दस किलोमीटर की गहराई में खौल रहा है।
आस पास के इलाकों की कठोर चट्टान की वजह से वह अब तक बाहर नहीं आ पाया है।
लेकिन उसके खौलने से गैस की मात्रा लगातार बढ़ती ही जा रही है।
जिस कारण एक न एक दिन उसे फटकर बाहर आना ही है।

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