यवतमाल में आदमखोर बाघिन के बच्चों का पता चला

यवतमाल में आदमखोर बाघिन के बच्चों का पता चला

प्रतिनिधि



नागपुरः यवतमाल के इलाकों में गांव वालों को फिर से सतर्क कर दिया गया है।

वहां पहले से ही एक आदमखोर बाघिन को लेकर परेशानी बढ़ी हुई है।

इस बार वन विभाग के कैमरे में उसके एक शावक की तस्वीर कैद हुई है।

इससे स्पष्ट हो गया है कि कैमरे के करीब ही बाघिन भी है।

वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए अब वहां पिंजड़ा लगाया है।

इसमें बाघिन को ललचाने के लिए देसी सुअर बांधे गये हैं।

जिन्हें खाने की लालच में बाघिन पिंजड़े में फंस सके।

जहां वन विभाग का स्वचालित कैमरा लगा था, वहां जंगल है

और वन विभाग के लोग मानते हैं कि अगर शावक यहां नजर आ रहा है

तो यह समझा जाना चाहिए कि बाघिन भी एक किलोमीटर के अंदर ही कहीं मौजूद है।

इस शावक की तस्वीर कैद होने के बाद आस-पास के इलाके में उनके पैरों के निशान भी पाये गये हैं।

वन विभाग ने बाघिन को अपने बच्चों की तरफ से थोड़ा सुरक्षित महसूस करने का मौका देने के लिए

उसके पीछे पैदल चलने का अभियान रोक रखा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अपने बच्चों को खतरा में देखकर भी बाघिन हमलावर हो जाती है।

इसलिए उसे एकांत दिया जाना चाहिए।

इससे वह आराम से रहेगी और जहां पिंजड़ा लगाये गये हैं, वहां भोजन की तलाश में जरूर आयेगी।

इस बीच इलाके में बाघ के हमले की दो घटनाएं दर्ज की गयी हैं।

उमरेड पावनी कारहांडला अभयारण्य के पास श्यामराव नाथुजी गुरनुली बाघ के हमले में घायल हुआ है।

दूसरी तरफ नागपुर के रामटेक तहसील में बोथिया पालोरा गांव के किशन संतोष धुर्वे को भी

बाघ ने हमला कर घायल कर दिया है।

दोनों का ईलाज चल रहा है।



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