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गलत आचरण से विपक्ष खोता है जनता का भरोसा




गलत आचरण यह भी है कि आप राज्यसभा में कुछ सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर लगातार तीन दिन तक काम काज बाधित करें। यह तो निर्वाचित और मनोनित जनप्रतिनिधियों को समझना चाहिए कि उन्हें जनता ने सिर्फ हंगामा करने के लिए वहां नहीं भेजा है। वहां के दैनिक काम काज के अलावा भी सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं पर जनता का ही पैसा खर्च होता है।




लिहाजा उन्हें अपनी व्यक्तिगत मुद्दों के मुकाबले जनहित के मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इस बात पर बहस हो सकती है कि क्या विपक्ष के इन सांसदों का निलंबन सही था या गलत लेकिन उसके आधार पर सदन का काम काज ही ना चलें, यह जनता के प्रति गैर जिम्मेदाराना आचरण को ही दर्शाता है। अक्सर ही राजनीतिक दल यह गलती करते रहते हैं।

पहले भाजपा ने सत्ता में आने के पहले जिन मुद्दों पर काफी हंगामा किया था, आज के दौर में वह हंगामा ही भाजपा के लिए गले की हड्डी बन गया है। दरअसल बड़े राजनीतिक दल इस बात को शायद स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि एक नये राजनीतिक दल यानी आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जो लंबी लकीर खींची है, वह जनता को बेहतर विकल्प का सुझाव दे रही है।

एक केंद्र शासित प्रदेश में जब बिना कोई अतिरिक्त कर लगायेबजट का आकार दोगुणा हो सकता है, जहां के बजट फायदे में आ सकता है, जहां जनता को मुफ्त बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिल सकती है तो यह पूरे देश के लिए बड़ा सवाल बन चुका है।

इस उदाहरण के अपने सामने होने के बाद भी अन्य विपक्षी दल जो गलत आचरण कर रहे हैं वह दरअसल राजनीतिक शून्य पैदा कर रहा है जो किसी न किसी अन्य राजनीतिक दल के द्वारा भरा जाना तय है।

गलत आचरण की वजह से ही राजनीतिक शून्य पैदा होता है

राज्यसभा में बुधवार को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और अन्य कृषि संबंधी मुद्दों तथा सांसदों के निलंबन को लेकर विपक्ष का हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही तीन बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी।

शून्यकाल और प्रश्नकाल बाधित रहा तथा विधेयकों पर चर्चा नहीं हो सकी। उपसभापति हरिवंश सदन की कार्यवाही शुरू करते हुए बांध सुरक्षा विधेयक 2021 पेश करने के लिए जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का नाम पुकारा तो विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोलने के लिए खड़े हो गए।

इसपर श्री हरिवंश ने कहा कि विधेयक पेश होने के बाद आप अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आपको केवल विधेयक पर बोलने की अनुमति है। इसके बाद श्री हरिवंश ने श्री शेखावत को अपनी बात रखने के लिए कहा।




इस बीच श्री खड़गे ने 12 निलंबित सांसदों का मुद्दा उठाने का प्रयास किया जिसकी उन्हें अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद तेलंगाना राष्ट्र समिति और कांग्रेस के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे।

उपसभापति ने इसके बाद उन्होंने सदन की कार्यवाही तीन बजे तक स्थगित करने की घोषणा कर दी। इससे पहले सदन की कार्यवाही इन्हीं मुद्दों पर दो बार स्थगित की गई थी जिसके कारण आज शून्यकाल और प्रश्नकाल नहीं हो सका था। संसद के शीतकालीन सत्र का यह तीसरा दिन है जब राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी है और शून्यकाल तथा प्रश्नकाल बाधित है।

इसे समझना होगा कि यह जनता का पैसा खर्च हो रहा है

सदन में आज कोई विधेयक पारित नहीं हो सका है और न ही किसी मुद्दे पर कोई चर्चा की गयी है। यह तो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के समझने की बात है कि इससे जनता के बीच क्या संदेश जाता है। किसी सांसद के निलंबन का विरोध करने में जनता के मुद्दे ही दरकिनार हो जाए, यह अब देश की जनता मन से स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

दरअसल सोशल मीडिया के विस्तार की वजह से गांव गांव तक ऐसी सूचनाएं बहुत कम समय में पहुंच जाती हैं। इससे आम आदमी के मन में जो सवाल पैदा होता है, वह यह है कि आखिर उन्होंने कैसे लोगों को सदन में चुनकर भेजा है।

जिन मुद्दों पर अधिक गंभीरता के साथ चर्चा होनी चाहिए उन मुद्दों को छोड़कर सांसदों के निलंबन का यह मुद्दा कैसे अधिक राष्ट्रीय महत्व का है, यह सवाल जनता का है और विपक्ष का यह विरोध उनके गलत आचरण की छवि जनता के बीच प्रस्तुत कर रहा है।

शायद सत्ता पक्ष को इससे खुला मैदान मिल रहा है और ऐसी स्थिति में जनता दोनों के बीच जब चयन करेगी तो किसे वह अपनी प्राथमिकता में रखेगी, यह समझा जा सकता है।

बदले परिवेश और कोरोना के बाद उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से जनता को अपने पैसे की चिंता बहुत अधिक हो चुकी है। ऐसी स्थिति में अगर उसे लगे कि उसके पैसे का दुरुपयोग हो रहा है तो वह क्या फैसला लेगी, यह गलत आचरण करने वालों को समझ लेना चाहिए।



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