fbpx Press "Enter" to skip to content

दुनिया के अधिकांश लोग करते हैं दाहिने हाथ का मुख्य इस्तेमाल







  • इंसान के हाथ का इस्तेमाल भी दरअसल डीएनए की देन है
  • बायें हाथ के लोग ज्यादा बुद्धिमान समझे जाते हैं
  • विरले लोग दोनों हाथों का बराबर प्रयोग करते हैं
  • लंबे शोध के बाद इसके कारणों का खुलासा हुआ
प्रतिनिधि

नईदिल्लीः दुनिया के अधिकांश लोग अपने काम काज में दाहिने हाथ का ही इस्तेमाल किया करते हैं।

यूं कहा जा सकता है कि हाथों के इस्तेमाल में दाहिने हाथ वालों का ही बहुमत है।

एक सामान्य सर्वेक्षण के मुताबिक 85 से 90 फीसद लोग

अपने नियमित कार्यों के लिए दाहिने हाथ का ही प्रयोग किया करते हैं।

ऐसे बहुत कम लोग हैं जो बायें हाथ से अपना काम करते हैं।

इसी वजह से बायें हाथ का इस्तेमाल करने वालों को ज्यादा श्रेष्ठ माना जाता है।

इसकी खास वजह से उनकी वह कुशलता है, जो उन्हें दाहिने हाथ के लिए बनाये गये

तमाम उपकरणों के संचालन के लायक बनाती है।

विरले लोग होते हैं जो सामान्य तौर पर दोनों हाथों का बराबर इस्तेमाल कर पाते हैं।

इसकी संख्या पूरी दुनिया में नगण्य के करीब होती है।

लेकिन दोनों हाथों का इस्तेमाल करने की क्षमता रखने वाले आसानी से पूरी दुनिया पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं

क्योंकि उनकी कार्यकुशलता आम इंसानों से कहीं काफी अधिक होती है।

वैज्ञानिकों की रूचि इसके इस्तेमाल के कारणों की तलाश की हुई थी।

काफी खोज बीन के बाद अब वैज्ञानिक इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि दरअसल इंसान कौन सा हाथ ज्यादा इस्तेमाल करेगा, यह उसकी डीएनए संरचना पर निर्भर करता है।

इस शोध को प्रारंभ करने के बाद शोधकर्ता वैज्ञानिक गर्भस्थ शिशु की स्थिति तक का निरीक्षण कर चुके हैं।

यह पाया गया है कि गर्भ में अंगूठा चूसने के दौरान भी यह पता लगाया जा सकता है कि दरअसल यह शिशु किस हाथ का इस्तेमाल भविष्य में करने वाला है।

दुनिया में अधिकांश लोग ऐसा क्यों करते हैं इस पर शोध हुआ

शोध के निष्कर्ष में यह बात भी सामने आयी है कि डीएनए की इस संरचना के बाद भी दरअसल दुनिया में मनुष्य की कोई ऐसी प्रजाति ही नहीं है, जहां का बहुमत बायें हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करता हो।

शायद इसी प्राकृतिक गुण की वजह से आम जीवन के काम आने वाली वस्तुओं का आविष्कार भी दाहिने हाथ के इस्तेमाल के लिए ही किया गया है।

इन्हें बनाते वक्त यह ध्यान रखा गया है कि उनका प्रयोग दाहिने हाथ से किया जाना है।

शोध के दौरान इसके इतिहास के पन्नों में कई रोचक तथ्य भी सामने आये हैं।

प्राचीन काल में ऐसे भी दिन थे जब बायां हाथ इस्तेमाल करने वालों को शक की नजर से देखा जाता था।

कई अवसरों पर बाया हाथ इस्तेमाल करने वालों को शैतान तक की संज्ञा दी गयी थी।

लेकिन अब वह सब बीते दिनों की बात है।

अब पूरी दुनिया में बाये हाथ के प्रयोग को लेकर कोई कुसंस्कार व्याप्त नहीं है।

इस बारे में पहला अनुसंधान रिपोर्ट वर्ष 2005 में जारी किया गया था।

न्यूरोसाइकोलॉजिया की पत्रिका में इस बारे में बताया गया था कि गर्भ में पलने वाले शिशु को भी अपना अंगूठा चूसने की आदत होती है।

इसलिए उसी आदत के मुताबिक वह पैदा होने के बाद उसी हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करने लगता है।

अब इसी शोध के आगे की कड़ी में वैज्ञानिकों ने इसके लिए डीएनए संरचना की विशेषताओं की पहचान कर ली है।

इन्हीं विशेषताओं की वजह से इंसान दाहिने अथवा वायें हाथ का ज्यादा इस्तेमाल करता है।

ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने चार लाख डीएनए का अध्ययन किया

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इसके लिए करीब चार लाख लोगों के डीएनए का अध्ययन किया है।

वैसे यह सभी लोग ब्रिटेन के थे। इस शोध में चार जिनोम की पहचान हुई है।

इन चार में से तीन का संबंध इंसानी दिमाग और उसकी संरचना से जुड़ा होता है।

इस वजह से अब वैज्ञानिक यह भी मान रहे हैं कि दिमाग के दोनों दाहिने और बाये हिस्से का प्रभाव भी इंसान की दैनंदिन गतिविधियों पर पड़ता है।

इस शोध से जुड़े मैक्स प्लैंक इंस्टिट्यूट फॉर साइंस ऑफ ह्यूमन हिस्ट्री (जर्मनी) की

वरीय वैज्ञानिक नातालिया उओमिनी कहती हैं कि इस जांच को प्राचीन इंसानी अवशेषों के ढांचों की जांच से भी बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

क्योंकि यह मनुष्य के क्रमिक विकास के साथ प्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा हुआ मामला है।

मनुष्य की कई पूर्व प्रजाति दोनों हाथों का इस्तेमाल कर सकती हैं

कई अवसरों पर इंसान के दांतों की संरचना देखकर भी समझा जा सकता है कि

वह भोजन के लिए अपने किन हाथों का इस्तेमाल किया करता था,

क्योंकि उसी अनुरुप उसके जबड़े के अंदर के दांत भी विकसित होते थे।

वैज्ञानिक इस गुत्थी को और बेहतर तरीके से समझने की कोशिश कर रहे हैं।

कुछ प्रजाति अपने दोनों हाथों का स्वतंत्र तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

वे जन्मगत तरीके से ही दोनों हाथों से सामान्य काम आसानी से कर लेते हैं।

इसलिए यह अंतर क्रमिक विकास के दौर में कब और कैसे हुआ, इसे समझने की जरूरत महसूस की गयी है।

वैज्ञानिक मानते हैं कि संख्या बल में कम होने के बाद भी बायें हाथ के लोगों को बेहतर सुविधाएं होती हैं।

खास तौर पर युद्ध जैसी स्थिति में जब प्राचीन काल में इंसान किसी का मुकाबला करता था

तो वह दाहिने हाथ से वार के प्रतिरोध के लिए तैयार रहता था।

इसी तरह क्रिकेट जैसे खेल के मैदान में बायें हाथ के गेंदबाज अथवा बल्लेबाज दोनों की गतिविधि को आसानी से समझा नहीं जा पाता है।

लेकिन वनमानुष के आगे बढ़ते हुए यह प्रजाति अपने दोनों हाथों के बदले

एक हाथ पर ज्यादा आश्रित होती चली गयी यह दरअसल डीएनए के बदलावों का ही नतीजा है।



Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »

2 Comments

Leave a Reply