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दुनिया के सबसे गहरे झील में बन रहे हैं अजीब गोले

  • दुनिया की सबसे बड़ी झील है बाइकाल

  • अधिकांश हिस्सा बर्फ से ढका ही रहता है

  • शोध दल की गाड़ी भी इस गड्डे में धंस गयी थी

  • सेंसर बता रहे हैं कि झील के अंदर का पानी गर्म है

  • उत्तरी ध्रुव के खिसकने की वजह से वैज्ञानिकों की कड़ी नजर

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः दुनिया के सबसे गहरे झील की गतिविधियों ने वैज्ञानिकों को

अचरज में डाल रखा है। यह झील साइबेरिया के इलाके में है। साइबेरिया के

इलाके में अभी हो रही हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ऐसा इसलिए

किया जा रहा है क्योंकि इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि उत्तरी ध्रुव अब

अपने स्थान से खिसकता हुआ साइबेरिया की तरफ ही आ रहा है। बाइकाल

झील दुनिया की सबसे गहरी झील है जो साइबेरिया के इलाके में है। इस झील

का अधिकांश हिस्सा हमेशा बर्फ से जमा रहता है। इसी वजह से बदलाव की

आहट मिलने के बाद इस झील पर सैटेलाइट के साथ साथ समुद्र के अंदर

लगाये गये सेंसरों से नजरदारी जारी है। इस झील में अजीब किस्म के बर्फ के

गोले बन रहे हैं। इनके आकार को देखकर कोई सामान्य व्यक्ति इसे दूसरी

दुनिया से आये प्राणी की हरकत मान सकता है। लेकिन वैज्ञानिक यह मान

रहे हैं कि वहां के पानी के अंदर हो रही उथल पुथल की वजह से बर्फ इस

आकार में जमते चले जा रहे हैं।

प्रारंभिक अनुसंधान के मुताबिक ऐसा माना गया है कि अत्यधिक ठंड के इस

इलाके में मिथेन गैस के बुलबले ही झील की तलहटी से निकलकर बाहर आ

रहे हैं। गैस के इन बुलबुलों की वजह से ही बर्फ का आकार ऐसा बनता चला जा

रहा है। अब तक की जानकारी के मुताबिक यहां कुछ ऐसे बर्फ के गोले भी देखे

गये हैं, जिनका व्यास सात किलोमीटर से भी अधिक है। इसी वजह से

अंतरिक्ष में चक्कर काटते सैटेलाइटों से भी वे साफ साफ नजर आ रहे हैं।

दुनिया के गहरे इलाके को सैटेलाइट से देखा जा सकता है

इस गतिविधि की जानकारी मिलने के बाद एक अंतर्राष्ट्रीय शोध दल ने इस

पर काम किया है। इस दल में रुस के अलावा फ्रांस और मंगोलिया के

वैज्ञानिक भी थे। इनलोगों ने वहां बर्फ के गोलों के अंदर गहरा गड्डा खोदकर

उसके नमूने लिये हैं और इन गड्डों के भीतर सेंसर स्थापित किये हैं। ये सेंसर

झील के अंदर की गतिविधियों का जायजा बता रहे हैं।

यह जान लेना भी प्रासंगिक है कि इसी काम को करते वक्त एक बार वैज्ञानिकों के दल का एक वाहन भी इसी झील के गोलाकार गड्डे में फंस गया था।

जिसे काफी मेहनत के बाद बाहर निकाला जा सका। आम तौर पर इस झील

पर जमे बर्फ की पर्त इतनी मोटी होती है कि बड़ी गाडिय़ां भी आराम से उसके

ऊपर से चली जाती है। इसी क्रम में बर्फ के रहस्यमय गोले के बीच अचानक

ही उनकी गाड़ी धंस गयी थी। इस शोध से जुड़े सहायक प्रोफसर एलेक्सी

कोउरायेव ने कहा कि यह इतनी बड़ी झील है कि अगर उसके एक छोर से दूसरे

छोर तक जाना हो तो चार सौ किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ा है। लेकिन

झील के बीच से अगर कोई गुजरता है तो उसे सिर्फ 25 मील ही तय करना

पड़ता है। इसी वजह से अक्सर ही लोग झील के ऊपर से ही आना जाना करते

हैं।

इन सफेद गोलों के अंदर का पानी गर्म है और घूम रहा है

गाड़ी धंस जाने के बाद पहली बार यह बात समझ में आयी कि अंतरिक्ष में

तैनात सैटेलाइटों से जो गोल धब्बे नजर आ रहे हैं, वे ऊपर से एक जैसे दिखने

के बाद भी अंदर से नर्म है। इसी वजह से गाड़ी वहां धंस गयी थी। इन गोलों के

बारे में अब तक यह पता चल पाया है कि झील के अलग अलग हिस्से में यह

अचानक ही बन रहे हैं। इसी वजह से इसके कारणों के बारे में लगातार

अनुसंधान हो रहा है। लेकिन अब तक सारे वैज्ञानिक इसके कारणों के बारे में

किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाये हैं। कुछ ऐसे इलाकों में भी बर्फ के ऐसे

गोले बने हैं, जो अपेक्षाकृत कम गहराई वाले इलाके हैं। इस वजह से वहां

मिथेन गैस के एकत्रित होने की कोई संभावना भी नहीं है।

अंदर सेंसर लगाये जाने के बाद सिर्फ यह पता चला है कि इन इलाकों में पानी

गोलाकार में घूम रही है, जिसका तापमान अपेक्षाकृत ज्यादा गर्म है। शायद

इसी वजह से वहां एक घूर्णन जैसी परिस्थिति पैदा हो रही है। अंदर में यह

गति होने के बाद तापमान कम होने की वजह से जम ऊपर का पानी जम जा

रहा है तो अंदर सक्रियता बनी रहने की वजह से शायद यह गोलाकार आकृति

उभर रही है

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