उत्तर कोरिया के 90 फीसद निर्यात प्रतिबंधित, वहां के नागरिकों को दूसरे देश में नहीं मिलेगी नौकरी

उत्तर कोरिया के लिए कपड़े के निर्यात पर प्रतिबंध के साथ तेल आयात की सीमा तय कर दी गई।

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उत्तर कोरिया के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया गया है और नौकरी को भी प्रतिबंधित किया जा रहा है।

उत्तर कोरिया के नागरिकों को किसी और देश में नौकरी नहीं मिल सकेगी।

दुनिया भर की चेतावनियों से बेपरवाह रहे उत्तर

कोरिया की लगाम संयुक्त राष्ट्र ने कस दी है।

उत्तर कोरियाई सेना की संपत्ति (उत्तर कोरिया के बाहर) भी

जब्त की जाएगी। उत्तर कोरिया से आने और जाने

वाले जहाजों की बिना बल प्रयोग के जांच की जा सकेगी।

यह उत्तर कोरिया पर 2006 के बाद से लगाया गया

नौवां प्रतिबंध है।  माना जा रहा है कि यूएन के कड़े

प्रतिबंधों से उत्तर कोरिया को मिल रहे चीन व रूसी

समर्थन को भी झटका लगेगा। हालांकि अमेरिका ने

अब भी बातचीत के दरवाजे खुले रखे हैं।

कपड़ों के निर्यात पर प्रतिबंध से उत्तर कोरिया की

अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। उत्तर कोरिया कोयला

व अन्य खनिज पदार्थो के बाद से सबसे ज्यादा निर्यात

कपड़े का ही करता था। इस निर्यात का भी 80 फीसद हिस्सा चीन को जाता था।

संयुक्त राष्ट्र ने इसके पूर्व पांच अगस्त को कोयला,

लोहा, लौह अयस्क से लेकर समुद्री खाद्य पदार्थो

के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस तरह उत्तर

कोरिया से निर्यात होने वाली 90 प्रतिशत वस्तुएं

प्रतिबंध के दायरे में आ गई हैं। वहीं तेल की आपूर्ति

में 30 फीसद तक की कटौती हो जाएगी। उत्तर

कोरिया के परमाणु हथियार बनाने में तेल की

अहम भूमिका है। यूएन के प्रतिबंध प्राकृतिक गैस

और तेल के अन्य सह उत्पादों पर पूरी तरह रोक

लगाते हैं जिनका इस्तेमाल पेट्रोलियम ईधन के घटने

की स्थिति में विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।

अमेरिका ने उत्तर कोरिया के लिए ऐसा प्रस्ताव तैयार किया था कि अगर इसपर पूरी तरह अमल हो जाता तो उत्तर कोरियाई जनजीवन ठहर जाता। अमेरिका उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के विदेश दौरों पर रोक के साथ उनकी संपत्ति जब्ती के भी पक्ष में था।

 

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