मोदी-ट्रंप की मीटिंग का असर, पाक को पैसा देने पर अमेरिका ने लगाई शर्तें

आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बनी रजामंदी और बढ़ी दोस्ती का असर दिखने लगा है।

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आतंकवाद पर नकेल कसने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बनी रजामंदी और बढ़ी दोस्ती का असर दिखने लगा है। अमेरिका में शुक्रवार को पारित नेशनल डिफेंस ऑथोराइज़ेशन एक्ट 2017 में पाकिस्तान पर अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक और सैनिक मदद के लिए जवाबदेही की अधिक सख्त बंदिशें लगा दी गई हैं।
अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रजेन्टेटिव में पारित नए विधेयक के मुताबिक, पाकिस्तान को अब ये प्रमाणित करना होगा कि वो अमेरिकी आतंकी सूची में नामित किसी भी व्यक्ति या संगठन को पाकिस्तान या अफ़ग़ानिस्तान में कोई मदद नहीं दे रहा है। साथ ही एक्ट में यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि अगर अमेरिकी रक्षा सचिव ऐसा प्रमाणित नहीं कर पाते तो पाकिस्तान को हासिल हो रही रिइमबर्समेन्ट फंडिंग रोक दी जाएगी।

नए संशोधनों का सबसे अहम पहलू है कि अब पाकिस्तान को अमेरिकी आतंकी सूची में मौज़ूद लश्कर-ए-तयैबा, जमात-उद-दावा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों और हाफ़िज़ सईद, मसूद अजहर, सैय्यद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों को मदद पर भी अमेरिका के आगे अपना दामन बेदाग साबित करना होगा। पहले इस तरह के प्रमाणन की ज़रूरत केवल हक्कानी नेटवर्क को पाकिस्तान से हासिल होने वाली किसी मदद के संदर्भ में ही थी। अमेरिका की सैन्य तैयारियों और साझेदरी पर लागू होने वाले नये अधिनियम में पाकिस्तान की जवाबदेही मुकम्मल करने वाले संशोधन सांसद टेड पो ने जुड़वाए। अपने संशोधनों के पारित हो जाने पर खुशी जताते हुए पो ने कहा, इससे सुनिश्चित होगा की इस्लामाबाद को यूएस डॉलर देने से पहले पेंटागन को आकलन करना होगा कि पाकिस्तान आतंकियों की मदद तो नहीं कर रहा है।
पाकिस्तान को दोमुंहा बताते हुए पो ने कहा कि पाक अमेरिका के हितों और अफ़ग़ानिस्तान में शांति कायम करने की अमेरिकी कोशिशों को निशाना बनाने वाले अनेक आतंकी गुटों की मदद करता है। नए संशोधनों से अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तानी दग़ाबाज़ी खत्म करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी कांग्रेस की आतंकवाद संबंधी हाउस सब कमेटी के प्रमुख टेड पो इससे पहले पाकिस्तान को आतंकी मुल्क घोषित करने की मांग भी कर चुके हैं।

ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26-27 जून को अमेरिका के दौरे पर गए थे जहां उनकी शिखरवार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से हुई थी। मुलाकात के बाद मीडिया के सामने दिए बयानों में और साझा वक्तव्य में दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ साथ मिलकर लड़ने का संकल्प जताया था। इतना ही नहीं पीएम मोदी के दौरे में अमेरिका ने हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सय्यद सलाहुद्दीन को स्पेशल डेज़िग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया था।
गौरतलब है कि अमेरिका हर साल करोड़ों डॉलर की आर्थिक और सैनिक सहायता पाकिस्तान को देता है। यह सिलसिला 2001 में अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान में ग्लोबल वॉर आॅन टेरर के ऐलान के बाद से जारी है। हालांकि, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अमेरिका के भीतर से उठ रहे सवालों के मद्देनज़र इसमें लगातार कटौती की जा रही है।
वित्त वर्ष 2016-17 में पाकिस्तान को अमेरिका से 7.42 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद दी गयी थी। मार्च 2017 में पारित अमेरिकी रक्षा बजट में पाकिस्तान को मदद के लिए यूं तो 9 करोड़ डॉलर की मदद का प्रावधान किया है। लेकिन, नये प्रावधानों के बाद अब पाकिस्तान को यह मदद लेने के लिए अपनी बेदागी का सबूत देना होगा।

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