1965, 1971 युद्धों के 214 सैनिक पाक जेलों में बंद

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जालंधर: भारत और पाकिस्तान के मध्य हुई 1965 और 1971 के लड़ाईयों में भाग लेने वाले भारतीय सेना के लगभग 214 सैनिक अभी भी पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं।पाकिस्तान की जेल में मारे गए सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर ने आज कुछ कैदी सैनिकों के परिवारों के साथ संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया कि पाकिस्तान के साथ दो बार हुई लड़ाईयों में भारत के 214 कैदी अभी भी जिंदा है तथा पकिस्तान की जेलों में बंद हैं। उन्होने कहा कि दोनों देशों के नेता कई बार मिले हैं तथा वार्ता करते हैं लेकिन इन कैदियों की रिहाई के लिए सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

दलबीर कौर ने बताया कि भारत सरकार इन कैदियों को मृत घोषित कर चुकी है तथा इनके परिवारों को पेंशन भी दी जा रही है लेकिन पाकिस्तान से छूट कर आए कुछ कैदियों ने बताया कि युद्ध कैदी अभी भी जिंदा हैं तथा दयनीय हालात में हैं। उन्होने बताया कि वह इस संबंध में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मिल चुकी हैं। लेकिन विदेश मंत्री के आश्वासन के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होने कहा कि सरकार शहीदों को तो श्रद्धांजलि देती है लेकिन जिंदा कैदियों को छुडवाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।

इस अवसर पर मौजूद खुर्द ज्याला गांव की सुरजीत कौर ने बताया कि उनके गांव का गुरचरण सिंह  पाकिस्तान से छूट कर आया था और उसने बताया कि उसका पति बीर सिंह अभी भी जिंदा है। उन्होने बताया कि भारत सरकार ने बीर सिंह को मृत घोषित कर उसे पेंशन भी दे रही है। इसी प्रकार पाकिस्तान की जेल में बंद गांव जिंदा के जुगराज सिंह, हवलदार धर्मपाल सिंह , सुरजीत सिंह, दलेलसिंह वाला के वघेल सिंह, कर्मगढ़ के लाल सिंह आदि के परिजन भी प्रेसवार्ता में उपस्थित थे। सभी ने सरकार से मांग की है कि पाकिस्तान से बात कर उनके परिजनों को छुड़वाया जाए अन्यथा सभी 214 परिवार संघर्ष शुरू करेंगे।

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