हाफिज सईद को साक्ष्य के अभाव में कर दिया जाएगा आजाद, लाहौर हाईकोर्ट ने सरकार से कहा

सरकार ने 25 सितंबर को सईद की नजरबंदी 30 दिनों के लिए बढ़ाई थी।

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हाफिज सईद ने सरकार के कदम के खिलाफ हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई।

आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान की कथनी और करनी का फर्क एक बार फिर सामने आ गया। पाकिस्तान सरकार ने मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के खिलाफ लाहौर हाई कोर्ट में फिर सबूत नहीं सौंपे।

इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को साफ

कर दिया कि सईद के खिलाफ सबूत नहीं देने पर उसे नजरबंदी से आजाद कर दिया जाएगा।

प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा (जेयूडी) का प्रमुख

हाफिज सईद 31 जनवरी से नजरबंद है। इनामी आतंकी

सईद ने सरकार के कदम के खिलाफ हाई कोर्ट में अर्जी

दाखिल की थी, जिस पर सोमवार को सुनवाई हुई। गृह

सचिव को सुबूत और अन्य दस्तावेजों के साथ कोर्ट में

पेश होना था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई।

गृह सचिव के बजाय मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी

डिप्टी अटॉर्नी जनरल के साथ कोर्ट में पेश हुए थे। उन्होंने

बताया कि सचिव जरूरी सरकारी काम के चलते इस्लामाबाद गए हुए हैं।

जस्टिस सैय्यद मजहर अली अकबर नकवी ने कहा, ‘सिर्फ

मीडिया क्लिपिंग के आधार पर किसी भी नागरिक को लंबे

समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। सरकार का रवैया

दिखाता है कि उसके पास याचियों के खिलाफ ठोस सुबूत

नहीं हैं। अगर मजबूत साक्ष्य पेश नहीं किए गए तो सभी

को हिरासत से मुक्त कर दिया जाएगा।

सरकार ने 25 सितंबर को सईद की नजरबंदी 30 दिनों के

लिए बढ़ाई थी। साथ ही जवाब दाखिल करने के लिए

अतिरिक्त समय मांगा गया। बार-बार अनुरोध करने पर

हाई कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 13 अक्टूबर तय कर दी।

पंजाब सरकार हालांकि कोर्ट को बता चुकी है कि सईद और उसके साथियों को रिहा करने से कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

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