चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ रणनीति से निपटने का प्लान बना रहा भारत

सलामी स्लाइसिंग का मतलब है- पड़ोसी देशों के खिलाफ छोटे-छोटे सैन्य ऑपरेशन चलाकर धीरे-धीरे किसी बड़े इलाके पर कब्जा कर लेना।

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चीन ऐसे कई छोटे-छोटे ऑपरेशन चलाकर कई इलाकों पर कब्जा कर चुका है। ऐसे मामलों में अंतरराष्ट्रीय डिप्लोमैसी का ध्यान  बार-बार नहीं खींचा जा सकता।

भारत-चीन सीमा पर चीनी सैनिकों को ‘नमस्ते’ करना सिखाती नजर आईं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का दौरा एक खास रणनीति के तहत किया गया था।

सिक्किम-भूटान-तिब्बत ट्राइ-जंक्शन के दौरे को उस रणनीति

का हिस्सा बताया जा रहा है जिसके तहत अब भारत चीन की हर

चाल का जवाब देने की योजना बना रहा है। खास तौर पर भारत

अब चीन की ‘सलामी स्लाइसिंग’ की रणनीति को काउंटर करने का प्लान तैयार कर रहा है।

सीतारमण के दौरे से यह बात निकल कर सामने आई है कि

भारत अब बॉर्डर के इलाकों में विकास पर पूरा जोर देगा, क्योंकि

उन इलाकों में विकास न होने के चलते ही चीन को यहां दखल

देने का मौका मिलता है। रक्षा मंत्री का प्लान 4,057 किलोमीटर

लंबी लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल (LAC) के नजदीक बुनियादी ढांचे

का विकास करने को लेकर है। सलामी स्लाइसिंग का मतलब है- पड़ोसी देशों के खिलाफ छोटे-छोटे सैन्य ऑपरेशन चलाकर धीरे-धीरे किसी बड़े इलाके पर कब्जा कर लेना। ऐ

से ऑपरेशन इतने छोटे स्तर पर किए जाते हैं कि इनसे युद्ध की

आशंका नहीं होती, लेकिन पड़ोसी देश के लिए यह समझना मुश्किल

होता है कि इसका जवाब कैसे और कितना दिया जाए।

15 साल पहले एलएसी पर कुल 73 सड़कें (4,643 किलोमीटर)

बनाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इनमें से केवल 27

सड़कें ही तैयार हो पाई हैं। इतना ही नहीं, लंबे वक्त से प्रस्तावित

14 ‘रणनीतिक रेलवे लाइन्स’ बिछाने का काम भी अभी तक शुरू

नहीं हो पाया है।सेना प्रमुख चीफ बिपिन रावत ने हाल ही में

चीन की इस रणनीति के खिलाफ आगाह किया था।

बॉर्डर के इलाकों में बुनियादी ढांचे के विकास से न केवल चीन की भारत में बढ़ती घुसपैठ को रोका जा सकेगा बल्कि विवादित इलाकों पर उसका दावा भी कमजोर होगा।

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