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मलेरिया की रोकथाम के लिए एक वैक्सिन को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंजूरी दी







वाशिंगटन: मलेरिया की रोकथाम के लिए एक वैक्सिन को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंजूरी दी है।

यह सिर्फ बच्चों के लिए है और डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट कर दिया है कि इसका प्रारंभिक उपयोग सिर्फ

अफ्रीकी देशों में किया जाएगा। इन देशों में सबसे पहले उनका उपयोग किये जाने का मकसद यह है

कि इन देशों के बच्चों को मलेरिया के प्रभाव से बचाना है। अफ्रीका के अनेक देश इस मलेरिया की

बीमारी से बुरी तरह जूझ रहे हैं। इन देशों में स्वास्थ्य सेवा भी उतनी विकसित नहीं है। इनमें से कुछ

देशों को दूरस्थ इलाको में खास तौर पर लोगों को मलेरिया फैलान वाले मच्छरों से बचने के लिए

मच्छरदनी लगाकर सोने के लिए अलग से मच्छरदानी भी दी गयी है। ऐसे लोगों की आर्थिक हालत

इतनी बेहतर नहीं है कि वे मच्छरदानी भी खरीद सके। अब मलेरिया की रोकथाम के लिए वहां के

बच्चों को सर्वप्रथम यह टीका लगाया जाएगा। इस वैक्सिन को ग्लैक्सो स्मिथक्लाइन कंपनी ने

विकसित किया है। क्लीनिकल ट्रायल के दौर में सफल पाये जाने के बाद उसे पहली बार सार्वजनिक

इस्तेमाल में लाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक इस वैक्सिन का सहारा मरूभूमि

से सटे इलाकों वाले देसों में इस्तेमाल किया जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके लिए जो

कार्यक्रम निर्धारित किया है, उसके मुताबिक अगले पांच महीनों में यह टीकाकरण प्रारंभ कर दिया

जाएगा। मलेरिया की रोकथाम मों काम आने वाली इस वैक्सिन से दशकों से चली आ रही परेशानी

से निजात मिलने की उम्मीद है क्योंकि दुनिया के अनेक इलाकों में मलेरिया के प्रभाव से हर साल

लाखों लोग काल कवलित होते हैं

मलेरिया के ईलाज में अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ाहिस्सा 

मलेरिया के ईलाज में भी अर्थव्यवस्था का एक बहुत बड़ा हिस्सा खर्च होता है। जिन इलाकों में

बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं, वहां इसकी वजह से हालात और बिगड़ते हैं। बता दें कि मच्छरों की

खास पांच प्रजातियों की मादा मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी अफ्रीका के कुछ इलाकों मे सबसे

अधिक है। कम उम्र के बच्चों पर इस बीमारी से आंतरिक अंग खराब होने तक का खतरा होता है।

वर्ष 2019 में पूरी दुनिया में मलेरिया के 229 मिलियन रोगी पाये गये थे। इसी साल दुनिया भर में

चार लाख लोगों की मौत भी मलेरिया की वजह से हुई थी। इस तरह ऐसा माना जा सकता है कि

कोरोना की वैश्विक महामारी को अगर अलग कर दें तो यह टीबी के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा

खतरा बना हुआ है। मलेरिया की रोकथाम के लिए बनी इस वैक्सिन का नाम उसे बनाने वाली कंपनी

ने मोसिक्वीरिक्स रखा है। क्लीनिकल ट्रायल में सफल होने के बाद ही उसके इस्तेमाल की मंजूरी

मिली है। मलेरिया की रोकथा में स्वीकृत होन वाली यह पहली वैक्सिन है।

 



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