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विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला पर कोरोना संकट के बादल मंडरा रहे

  • स्थिति नहीं सुधरी तो घर में करना होगा भोले शंकर का अभिषेक

  • इससे पहले कभी इस मेला के स्थगित किये जाने का इतिहास नहीं

  • हर दिन मेला के वक्त यहां जुटते हैं देश दुनिया के लाखों लोग

झरिया: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला को लेकर क्षेत्र में शंकाए व्यक्त की जा रही है। कारण

कोरोना का प्रकोप भारतवर्ष में थमने का नाम नहीं ले रहा है। सुल्तानगंज से बाबा नगरी

देवघर तक लगभग 105 किलोमीटर तक लंबी यह मेला विश्व की सबसे बड़ी मेला है।

श्रवणी मेला को लेकर क्षेत्र के लोगों में तरह-तरह की चचार्ओं की बाजार देखी जा रही है।

चौक चौराहों, गल्ली, मुहल्ला में जितने लोग उतने तरह की बातें सुनने को मिलती है।

आस्था के प्रतीक श्रावणी मेला लगभग दो माह तक चलने वाली मेला है। इस मेलें मे

लगभग पचास लाख लोग केशरिया भगवा वस्त्र पहनकर सुलतान गंज से जल भर कर

105 किलो मीटर पैदल दूरी तय कर भगवान शिव के नगरी देवघर पहुचते हैं और भगवान

शंकर पर जलाभिषेक कर भगवान शंकर के दर्शन करते हैं। सुलतान गंज से देवघर तक पूरे

रास्ते में केशरियां ही केशरियां नजर आता हैं। जगह-जगह दूकाने भी केशरिया रंग से सजे

रहते हैं। भर रास्ते बोल बंम की नारे से गूजंते रहती है। ऐसा लगता है। की सुलतान गंज

और देवघर एक हो गया है। जगह-जगह समाज सेवी द्वारा व प्रशासन द्वारा भक्तों की

देखरेख में चौबीस घंटे पुलिस व समाजसेवी लोग त्तपर्य रहते हैं।

विश्व प्रसिद्ध श्रावण मेला सावन के महीने में लगता है 

यह मेला प्रत्येक वर्ष श्रावण माह में लगता है और भादो के अंत में खत्म होती है। यह

लगभग 60 दिन का मेला होता है। लोगों का मानना है कि भगवान शंकर के दर्शन करने से

मनचाहा वरदान मिलता है। लोगों के मन्नत भी पूरी होती है। ऐसे में एक और जहां

कोरोना वायरस जैसे संक्रमित बीमारी से लोगों को निजात दिलाने के लिए केन्द्र सरकार व

राज्य सरकार लॉक डाउन 4,0 के आलावे अनलॉक 1,0 लगा चुकी है। जिससे लोगों को

आज भी खूलेआम अपने-अपने घरों से निकलने में डर लगता है। कि कही कोई कोरोना से

संक्रमित ना मिल जाये और उसका शिकार ना हो जाये। ऐसे में श्रवणी मेला जो श्रावण

माह मे लगती है। पन्द्रह दिन के बाद चालु होने वाला है। और यह मेला लगभग दो माह

तक चलती है। इस मेले मे भारत के विभिन्न क्षेत्रों के आलावे कई पड़ोसी देश जैसे नेपाल

,तिब्बत से भी लोग आकर बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाकर बाबा का दर्शन कर अपने मन

चहा मूरादे पूरा करते है। यह आस्था का बड़ा पर्व माना जाता है।

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