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महामारी का आर्थिक नुकसान झलका विश्व बैंक देगा 12 अरब का पैकेज

वाशिंगटनः महामारी का आर्थिक नुकसान अब स्पष्ट होने लगा है। इसी आर्थिक बदहाली

के लिए विश्व बैंक ने भी अपनी तरफ से पहल कर दी है। विश्व बैंक ने कोरोना वायरस

‘कोविड-19’ से निपटने में सदस्य देशों की मदद के लिए 12 अरब डॉलर तक का शुरुआती

पैकेज मुहैया कराने की घोषणा की है। विश्व बैंक ने मंगलवार को एक बयान जारी कर

कहा, ‘‘ कोविड-19 दुनिया के 60 से अधिक देशों में पहुंच गया है जिसके कारण विश्व बैंक

समूह वैश्विक महामारी के स्वास्थ्य और आर्थिक प्रभावों का सामना कर रहे देशों की

सहायता के लिए तत्काल सहायता के रूप में 12 अरब डॉलर तक का प्रारंभिक पैकेज

उपलब्ध करा रहा है।’’ इससे पहले आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीना जॉर्जीवा और

विश्व बैंक के अध्यक्ष डेविस मालपस ने एक संयुक्त बयान में कहा था, ‘‘आईएमएफ और

विश्व बैंक समूह कोविड-19 वायरस से उत्पन्न मानव विपत्ति और आर्थिक चुनौतियों से

निपटने में सदस्य देशों की मदद के लिए तैयार है। हम अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और राष्ट्रीय

सरकारों के साथ सतत संपर्क में हैं। जिन गरीब देशों में स्वास्थ्य प्रणाली कमजोर है वहाँ

हम विशेष रूप से ध्यान दे रहे हैं।’’

महामारी का असर गरीब देशों पर अधिक होगा यह तय

दोनों प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने कहा कि वे आपात वित्तीय मदद, नीतिगत सलाह और

प्रौद्योगिकी मदद समेत अपने सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार

हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा तथा भविष्य में संभावित किसी भी महामारी से निपटने के

लिए स्वास्थ्य संबंधी निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणाली महत्वपूर्ण है। भारत में भी कोरोना

वायरस की वजह से औद्योगिक उत्पादनों पर इसका असर दिखने लगा है। अनेक

उद्योगों में कच्चे माल की अचानक कमी होने की वजह से कई औद्योगिक संयंत्रों को बंद

करना अथवा उनमें उत्पादन कम करने तक की नौबत आ चुकी है। भारत अन्य देशों से

कच्चा माल जुटाने की कोशिश कर रहा है लेकिन उसमें भी समय लगता है। इससे स्थिति

और बिगड़ रही है।


 

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