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वर्क फ्राम होम के अब समाप्त होने की पहले प्रारंभ क्योंकि कोरोना में सुधार




वर्क फ्राम होम ने कोरोना संकट के दौरान राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।




इसकी वजह से पूरे देश में लॉकडाउन होने के बाद भी देश के आर्थिक विकास का पहिया

पूरी तरह कभी नहीं थम पाया था। जो लोग अपने अपने घरों से काम कर रहे थे, उनमें

अनेक लोग ऐसे भी थे जो कोरोना संक्रमित हुए थे। इसके बाद भी दूसरों को संक्रमण से दूर

रखते हुए उनलोगों ने बखूबी अपनी जिम्मेदारियों का पालन किया। अब जैसे जैसे देश में

कोरोना संक्रमण की गति धीमी पड़ती जा रही है, कंपनियां अपने कर्मचारियों को दफ्तर

आने का क्रमवार निर्देश जारी कर रही हैं। इस कड़ी में सबसे अधिक तेजी देश के सूचना

प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में हैं। यह उद्योग तेजी से खुलता जा रहा है। इस वजह से अपने अपने

घरों से काम करने वालो को अब कार्यालय में लौटना पड़ रहा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है

कि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों की ही कार्यस्थल पर वापसी करने में समान रूप से

दिलचस्पी है, हालांकि यह हाइब्रिड व्यवस्था के संबंध में है। अगले साल शुरू होने वाले

सप्ताह में करीब 50 प्रतिशत कार्यबल तीन दिन तक कार्यस्थल पर लौट सकता है। वैसे

कोरोना संकट के बाद यह पाया गया है कि 70 प्रतिशत कंपनियों ने हाइब्रिड व्यवस्था

सेटअप को पसंद किया। इसमें यह भी पाया गया कि आईटी सेवा क्षेत्र और वैश्विक क्षमता

केंद्र काम के दीर्घकालिक हाइब्रिड प्रारूप को सबसे पहले अपना सकते हैं।

वर्क फ्राम होम से कई कंपनियों की कार्यकुशलता बढ़ी है

इस अनुभव की वजह से हो सकता है कि आने वाले दिनों में ऐसे उद्योगों मे कार्यालय

आने वालों की संख्या में कमी हो और कर्मचारियों को वर्क फ्राम होम यानी बिना ऑफिस आये

ही काम करने की छूट प्रदान की जाए क्योंकि कोरोना लॉकडाउन के दौरान वर्क फ्रॉम होम की

कार्यकुशलता भी साबित हो चुकी है। इन्फोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी और

पूर्णकालिक निदेशक यूबी प्रवीण राव ने कंपनी के दूसरी तिमाही के परिणामों के दौरान

कहा कि कंपनी के पास अभी भी लगभग 97 प्रतिशत कर्मी घर से काम कर रहे हैं। चीन में

उसके पास कार्यालय में करने वाले 91 प्रतिशत कर्मचारी हैं। भारत, अमेरिका और ब्रिटेन

में इन्फोसिस के 98.5 प्रतिशत कर्मचारी घर से काम कर रहे हैं। यूरोप में यह संख्या करीब

90 प्रतिशत और दक्षिण पूर्व एशिया में लगभग 80 प्रतिशत है। राव ने कहा कि जुलाई से

अमेरिका और भारत दोनों में ही हमने सभी विकास केंद्रों में अपने कार्यालय खोल दिए हैं

जहां कर्मचारियों को स्वैच्छिक आधार पर कार्यालय आने की अनुमति दी गई थी। भारत




में अक्टूबर से हम सभी वरिष्ठ प्रमुखों को सप्ताह में कम से कम एक बार कार्यालय आने

के लिए कहते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन्फोसिस वरिष्ठ प्रमुखों को महीने में कम से

कम एक बार कर्मचारियों के लिए कुछ सहभागिता करने के लिए भी कह रही है ताकि

कार्यालय में बड़ी संख्या में लोग आ सकें। राव ने कहा कि प्रतिक्रिया और परिणामों के

आधार पर हम इस प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करेंगे और फिर हम यह पता लगाएंगे कि

आने वाली तिमाहियों में क्या होगा।

कुछ लोग सर्वेक्षण कर इस तरीके के जारी भी रख सकते हैं

इस सर्वेक्षण में यह भी पाया गया है कि मध्य वर्ग वाले प्रबंधन के मुकाबले 25 वर्ष से कम

और 40 से अधिक आयु वर्ग के लोग वापसी के लिए सर्वाधिक उत्सुक प्रतीत होते हैं।

बेंगलूरुस्थित विप्रो में वैश्विकस्तर पर अब उसके 85 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का

पहली खुराक के साथ टीकाकरण हो चुका है तथा 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारियों का

पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है। विप्रो के पेरिस स्थित मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध

निदेशक थियरी डेलापोर्टे ने दूसरी तिमाही की आय के समय कहा कि दुनिया के कई

हिस्सों में हम क्रमबद्ध रूप से वापसी शुरू कर रहे हैं। भारत में पूरी तरह से टीकाकरण वाले

हमारे वरिष्ठ सहयोगी अब सप्ताह में दो बार कार्यालय आ सकते हैं। यह हमारे

कर्मचारियों की सुरक्षा और ग्राहकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सतर्क और क्रमिक

प्रक्रिया होगी। नोएडा स्थित एचसीएल टेक्नोलॉजीज में तकरीबन 90 प्रतिशत कर्मचारियों

और उनके परिवारों का पूर्ण या आंशिक टीकाकरण हो चुका है तथा कंपनी चरणबद्ध

वापसी पर विचार कर रही है। अक्टूबर के मध्य में दूसरी तिमाही के नतीजों के दौरान

एचसीएल के मुख्य मानव संसाधन अधिकारी अप्पाराव वीवी ने कहा था कि हम यह भी

देख रहे हैं कि हमारे कर्मचारियों ने कार्यालय में अधिक संख्या में आना शुरू कर दिया है।

दो से तीन प्रतिशत से बढ़कर यह संख्या पांच से छह प्रतिशत हो चुकी है। दैनिक आधार

पर यह संख्या बढ़ रही है। हो सकता है कि देश की सूचना प्रोद्योगिकी उद्योग से सीख

लेकर अन्य कार्यालय और उद्योग भी इस नये मॉडल को भविष्य में आजमाएं। इसमें

लोगों का कार्यालय में चेहरा नजर आने से बेहतर उनकी कार्यकुशला के आधार पर

योग्यता का निर्धारण होगा।



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