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लकड़ी का इस्तेमाल कर दबाव से तैयार होगी नई तरीके की बिजली

  • आंतरिक संरचना में बदलाव किये गये हैं

  • लगातार दबने से ऊर्जा पैदा करती है लकड़ी

  • कुछ खास हानिकारक पदार्थों से अलग करना जरूरी

  • परीक्षण सफल हुआ तो लोग बनाने लगेंगे अपने लकड़ी के विशाल घर

राष्ट्रीय खबर

रांचीः लकड़ी का इस्तेमाल बिजली उत्पादन में होता है, यह पुरानी बात है। लेकिन बिजली

उत्पादन केंद्रों चाहें वे छोटे हो अथवा बड़े, उनमें इस लकड़ी को जलाकर बिजली उत्पादन

करने वाली टरबाइन को चलाकर बिजली बनती है। अब यह धारणा भी बदलने जा रही है।

स्विटजरलैंड के वैज्ञानिकों ने लकड़ी पर सिर्फ दबाव बनाकर बिजली बनाने में सफलता

हासिल की है। लिहाजा यह माना जा सकता है कि अब बिजली बनाने के लिए लकड़ी

जलाने की आवश्यकता नहीं बनेगी। सिर्फ लकड़ी पर दबाव बनाकर ही यह बिजली पैदा की

जा सकेगी। परीक्षण के दौर से गुजरते इस प्रयोग के पूरी तरह सफल होने के बाद शायद

लोग अपने लकड़ी का घर बनाकर ही घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी कर लेंगे। अलबत्ता

लकड़ी पर दबाव बनाकर बिजली पैदा करने के लिए वैज्ञानिकों ने लकड़ी की आणविक

संरचना में बदलाव किये हैं। इसी वजह से किसी स्प्रिंग की तरह अंदर दबने पर लकड़ी

बिजली पैदा करने में सक्षम हुई है। इटीएच ज्यूरिख और इएमपीए ने रसायनिक तौर पर

लकड़ी की संरचना में परिवर्तन कर यह प्रयोग किया है। इसमें प्रारंभिक तौर पर बिजली

पैदा करने में सफलता भी मिली है। दरअसल लकड़ी में जो बदलाव किये गये हैं, उससे यह

लकड़ी दबने लगती है। निरंतर उस पर दबाव बनाने और छोड़ने की प्रक्रिया से ही बिजली

पैदा होते हुए देखा गया है।बता दें कि ईटीएच दरअसल ज्यूरिख का एक सार्वजनिक

विश्वविद्यालय हैं जबकि इएमपीए स्विटजरलैंड की सरकारी प्रयोगशाला है। दोनों के

वैज्ञानिकों ने मिलकर इस प्रयोग को अंजाम दिया है। इटीएच ज्यूरिख के इंग्रो बर्जेट और

उनके दल ने यह काम करते हुए जो सफलता हासिल की है, उससे अब यह कहा जा सकता

है कि लकड़ी का इस्तेमाल सिर्फ घर अथवा घर के सामान बनाने में ही नहीं किया जा

सकता।

लकड़ी का इस्तेमाल कर बिजली बनी तो घर भी वैसे ही बनेंगे

लकड़ी का घर बनाकर उसे बिजली पैदा करने वाला जेनरेट भी बनाया जा सकता है। इसके

लिए सिर्फ लकड़ी में बदलाव करने पड़े हैं ताकि वह निरंतर यह दबने की प्रक्रिया को बिना

नष्ट हुए झेल सके। इसके लिए वैज्ञानिक दल ने ऐसी लकड़ी तैयार कर ली है, जो बहुत

मजबूत होने के साथ साथ पानी से नष्ट नही होता और उसमें चुंबकीय गुण भी हैं। इसी

वजह से वह दबाव झेलकर अपनी आंतरिक गतिविधियों की वजह से बिजली पैदा करने में

सक्षम है। इस विधि को इमपीए के शोध दल ने फ्रांसिस शूवार्जे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया

है। जिस विधि से यहां बिजली पैदा की जा रही है, उसे अब पाइजोइलेक्ट्रिक एफेक्ट कहा

गया है। वैज्ञानिकों ने इस बारे में बताया है कि आणविक संरचना बदले जाने के वजह से

ऐसी लकड़ी में पाइजो इलेक्ट्रिक पैदा करने की गुण विकसित हो जाते हैं। किसी इलास्टिक

के जैसा जब यह लकड़ी दबती है तो विद्युतीय ऊर्जा पैदा होने लगती है। जब यह क्रम

निरंतर चलता रहता है तो लगातार बिजली पैदा होती चली जाती है।

इस प्रारंभिक शोध मे सफलता मिलने के बाद भी अभी उसमें कई संशोधन किये जाने हैं।

ऐसा इसलिए है क्योंकि इस लकड़ी की संरचना को बदलने में कई ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल

किया गया है जो इंसानी स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं माने जाते हैं। मसलन इसमें लीड

जिरकोनेट टाईटानेट का इस्तेमाल हुआ है जो इंसानी त्वचा के लिए हानी कारक है। यूं तो

प्राकृतिक तौर पर भी लकड़ी में दबाव सहने के गुण होते हैं लेकिन लगातार इस प्रक्रिया से

गुजरने की स्थिति में उसके आंतरिक कण धीरे धीरे टूटकर बिखरने लगते हैं। लकड़ी की

मूल संरचना में लिगनीन, हेमीसेल्यूलोज और सेल्यूलोज होते हैं। इनमें लिगनिन की

उपयोगिता पेड़ को बड़ा करने की होती है।

इसमें लकड़ी की संरचना में बदलाव करने पड़ते हैं

इसी लिगनिन को खास रासायनिक प्रक्रिया के तहत हटा देने से उस लकड़ी को बिजली

पैदा करनेवाले छोटे जेनरेटर के तौर पर बनाया जा सकता है। ऊपर से लगातार दबाव पड़ने

की प्रक्रिया जब जारी रहती है तो लकड़ी के अंदर से बिजली पैदा होने लगती है क्योंकि

आणविक कण लगातार स्थान बदलकर ऊर्जा छोड़ने लगते हैं। लिगनिन के अलग होने के

बाद भी लकड़ी का ढांचा कायम रहता है लेकिन वह अंदर से किसी स्पंज के जैसा हो जाता

है। इस पर निरंतर दबाव पड़ने की वजह से ही यह पाइजोइलेक्ट्रिक पैदा करता चला जाता

है।

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