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नारी सशक्तीकरण का बेहतर लोकतांत्रिक नमूना पेश कर रहा भवनाथपुर

  • पहली बार चार महिलाएं चुनावी मैदान में उतरी
  • घर की देहरी लांघकर मैदान में आयी पहली बार
  • एक महिला अपने पति के भी खिलाफ मैदान में
  • पलामू प्रमंडल में अन्य क्षेत्रों में भी महिला प्रत्याशी
नीलू चौबे

श्री बंशीधर नगर : नारी सशक्तीकरण का एक बेहतर और लोकतांत्रिक

उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह पलामू जैसे राजनीतिक तौर पर अति

संवेदनशील समझे जाने वाले इलाके के लिए एक शुभ संकेत भी है।

वैसे यहां कई अवसरों पर महिलाओं ने राजनीतिक जिम्मेदार संभाली

है। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि राजनीति में महिलाओं की

धमक अलग से सुनाई पड़ने लगी है। वरना आम तौर पर पलामू इलाके

की राजनीति में नारी यानी महिलाओं नारी सशक्तीकरण के ऐसे

ज्वलंत उदाहरण अधिक नहीं हैं।

आसन्न विधानसभा चुनाव के दौरान पलामू प्रमंडल में भवनाथपुर

विधानसभा क्षेत्र ही राजनीति में महिलाओं सक्रियता का बोध करा

रहा है। यहां महिलाएं देहरी से बाहर चुनावी अखाड़े में अपने

प्रतिद्वंद्वियों के साथ दो दो हाथ कर रहीं हैं। यहां चार महिला

प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। निर्दलीय प्रत्याशी प्रियंका देवी तो अन्य

प्रतिद्वंद्वियों के साथ साथ अपने पति मनीष कुमार के खिलाफ ताल

ठोंक कर मैदान में हैं। भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र पलामू प्रमंडल का

एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां इतिहास में पहली बार है कि

महिला उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है। पलामू एवं गढ़वा

जिले के कुल 7 विधानसभा क्षेत्र में से डाल्टेनगंज, हुसैनाबाद एवं

गढ़वा विधानसभा से तो एक भी महिला प्रत्याशी नहीं हैं। वही पांकी से

एक, विश्रामपुर से एक, छतरपुर से तीन एवं भवनाथपुर से चार महिला

प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रही हैं। भवनाथपुर

विधानसभा क्षेत्र से इस चुनाव में तीन महिलाएं राजनीतिक दल से

एवं एक निर्दल उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं। यहां जदयू

ने महिला नेत्री शकुंतला जायसवाल पर भरोसा जताते हुये भवनाथपुर

विधानसभा से अपना उम्मीदवार बनाया हैं।

नारी सशक्तीकरण को दांव कई दलों ने खेला है

बहुजन समाज पार्टी जिसकी मुखिया स्वयं एक महिला हैं उन्होंने

पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे बसपा प्रत्याशी ताहिर अंसारी

की पत्नी सोगरा बीबी को अपना उम्मीदवार बनाया है। लोजपा ने भी

गढ़वा जिला परिषद उपाध्यक्ष रेखा चौबे को अपना उम्मीदवार बनाया

है। हुसैनाबाद की रहने वाली प्रियंका देवी भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर

पर भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र से अपना भाग्य आजमा रही है।

कुल मिलाकर चुनाव परिणाम चाहे जो भी हो लेकिन इस बार का

चुनाव महिलाओं के लिये एक मिसाल पेश करेगा। साथ ही महिलाओं

के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित

होगा। उल्लेखनीय है कि महिलाओं को सभी क्षेत्र में 50 प्रतिशत

आरक्षण की वकालत तो सभी राजनीतिक दल करते हैं। लेकिन

विधानसभा चुनाव में टिकट बंटवारे के समय राजनीतिक दलों द्वारा

महिला उम्मीदवार की अनदेखी की जाती है। हालांकि पंचायत एवं

नगर पंचायत चुनाव में सरकार द्वारा महिलाओं को 50 फीसदी

आरक्षण लागू कर दिया गया है। सरकार के इस प्रयास का असर अब

विधानसभा चुनावों में भी देखने को मिलने लगा है। अब महिलायें भी

चूल्हा चौकी से इतर राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

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