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वीमेन डॉक्टर्स विंग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त पहल पर ऑनलाइन कार्यशाला

  • स्वास्थ्य मंत्री ने हेल्प लाइन का उद्घाटन किया

  • लोगों में भ्रांतियों को दूर करना भी जरूरी

  • अनियंत्रित स्टेराइयड से बढ़ती है परेशानी

  • काल्पोस्कोप मशीन के लिए गैस दिये जाएंगे

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वीमेन डॉक्टर्स विंग आईएमए झारखंड एवं स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार के

द्वारा एक संयुक्त ऑनलाइन जागरूकता अभियान का आयोजन नेशनल हेल्थ मिशन के

सहयोग से किया गया। कोविड वैक्सीन के प्रजनन स्वास्थ्य पर सुरक्षित प्रभाव, ब्लैक

फंगस से जुड़ी भ्रांतियों, बच्चों के मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम एमआईएस सी एवं

सर्वाइकल और ब्रेस्ट कैंसर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए और जागरूकता फ़ैलाने

के लिए 2 लाख से अधिक जमीनी स्तर से जुड़े स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को जोड़ा गया ताकि

कोरोना की तीसरी लहर बेअसर हो और बच्चों की सुरक्षा हो सके। इस अभियान से राज्य

के सभी सिविल सर्जन के साथ-साथ सभी धर्म के धर्म गुरुओं खास कर आदिवासी समाज

के धर्म गुरु पाहन समुदाय को जोड़ा गया। इस कार्यक्रम का के मुख्य अतिथि झारखंड के

स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता थे, विशिष्ट अतिथि अरुण कुमार सिंह (स्वास्थ्य सचिव,

झारखंड सरकार), डॉ. जे. ए. जयालाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आई.एम.ए.) एवं डॉ. जयेश लेले

(राष्ट्रीय सचिव, आई.एम.ए.) थे। वीमेन डॉक्टर्स विंग की पहल पर इसके पहले सत्र में

इलेनोईस यूनिवर्सिटी, अमेरिका से फेफड़ा  रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि कश्यप ने महिलाओं व

पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर, गर्भवती और दूध पिलाती माताओं पर वैक्सीन के सुरक्षित

प्रभाव पर सभी को जागरूक किया। उन्होंने बच्चों में मल्टी-ऑर्गन इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम के

लक्षण जिसे अभिवावकों को पहचाना चाहिए उसके बारे में अभिवावकों को जागरूक

किया।

ऑनलाइन कार्यशाला में अमेरिका से विशेषज्ञ ने जानकारी दी

वीमेन डॉक्टर्स विंग के इस आयोजन के दूसरे सत्र में टेक्सस यूनिवर्सिटी, अमरीका

से बच्चो की ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ. पूजा कश्यप ने कोरोना के दौरान प्रभावित बच्चों की

ज़िन्दगी बचाने के लिए झारखंड सरकार को पेडियेट्रिक आइसीयू में किस तरह की तैयारी

करनी चाहिए उसके बारे में सुझाब प्रदान किया। उन्होंने कहा की पेडियेट्रिक आइसीयू में

हार्ट एवं पेट की अल्ट्रा साउंड मशीन, हेड सिटी स्कैन, वैंटिलेटर की जरुरत है। उन्होंने

सुझाव दिया एडल्ट आइसीयू एक्सपर्ट डॉक्टर्स को प्रशिक्षित कर पेडियेट्रिक आइसीयू

एक्सपर्ट बना कर मानव संसाधन की कमी को पूरा किया जा सकता है। एडल्ट हार्ट

स्पेसिलिस्ट को प्रशिक्षित कर पेडियेट्रिक हार्ट स्पेसिलिस्ट का काम लिया जा सकता है।

हमारे देश में एमआईएस सी के 2 हजार से 3 हजार केस और अमेरिका में करीब 4 हजार

मरीज मिलें हैं। आइसीयू में भरती एमआईएस सी के 85 प्रतिशत मरीजों में हार्ट प्रभावित

होता है।

तीसरे सत्र में एम्स नई दिल्ली प्रशिक्षित डॉ. विभूति कश्यप ब्लैक फंगस से जुड़ी भ्रांतियों

को दूर किया। उन्होंने बताया की ब्लैक फंगस की बीमारी में जैसे एक सत्य यह है की वो

सुगर के मरीजों में और अनियंत्रित स्टेरॉयड लेने वाले मरीजों में पाया जा रहा है। वैसे ही

एक सत्य यह भी है की कुछ 10 प्रतिशत मरीज ऐसे भी हैं जिनको सुगर की बीमारी नहीं

हुई है इन मरीजों में इस बीमारी के होने की संभवतः वजहें अत्यधिक भाप लेना, वैक्सीन

नहीं लेना, जिंक का सेवन करना और डबल म्यूटेन्ट स्ट्रेन से कोरोना वायरस का

इन्फेक्शन होना हो सकता है।

डॉ विभूति कश्यप ने ब्लैंक फंगस के बारे में बताया

हालाकिं इसकी पुष्टि होने के लिए और रिसर्च होनी ज़रूरी है। अतः सुरक्षा की दृष्टि से यह

ज़रूरी है की कोरोना से उभरे मरीज साफ़ सफाई का ख़ास ध्यान रखें। साफ़ सुथरे मास्क

पहने, धुल मिटटी वाले जगह में न जायें, नियमित रूप से स्नान करें और पैरों को पलंग में

आने के पूर्व साफ़ करें ताकि चादर पर मिटटी या पैरों की गन्दगी न आए। जिन लोगों को

कोरोना नहीं हुआ है, उनमे पिछले 2 महीनो में ब्लैक फंगस की बिमारी नहीं देखने को

मिली है। उन्होंने कहा की जहाँ एक ओर ब्लैक फंगस के बारे में लोगों को अवगत करना

ज़रूरी है, वहीं इस बात का भी ध्यान रखना होगा की लोगों में अनावश्यक भय न फैले।

इस मौसम में आँखों की सामान्य खुजली,पानी की समस्या भी आम दिनों से ज्यादा होती

है। ऐसे में 50 प्रतिशत मरीज इस सामान्य खुजली पानी को ब्लैक फंगस समझ भयभीत

होते नज़र आ रहे हैं। ब्लैक फंगस हेल्प लाइन इसी अनावश्यक भय को घर बैठे दूर करने

में सहायक होगा। मरीजों को गैर-जरुरी भय से दूर रखना भी डॉक्टर और सरकार की एक

नैतिक जिमेदारी है। जिससे कोरोना के मरीजों का मानसिक स्वास्थ्य स्थिर रहे और एक

अनावश्यक भय लोगों के दिमाग में घर न करे।

वीमेन डॉक्टर्स विंग की अध्यक्ष ने अन्य मुद्दों पर प्रकाश डाला

वीमेन डॉक्टर्स विंग आई.एम.ए. झारखंड की अध्यक्षा डॉ. भारती कश्यप ने स्वास्थ्य मंत्री

को जानकारी दी कि झारखंड के 23 सदर अस्पतालों में से 11 सदर अस्पतालों में

सर्वाइकल प्री-कैंसर के इलाज की मशीन की व्यवस्था स्थानीय विधायकों के साथ मिलकर

हम लोगों ने की थी। जहाँ रांची, खूंटी, गिरिडीह, कोडरमा, हजारीबाग, साहेबगंज में

डिजिटल विडियो कोल्पोस्कोप के साथ क्रायो मशीन लगाई गई है वहीं संथाल परगना के

बाकि सदर अस्पतालों में क्रायो मशीन और गैस सिलिंडर की व्यवस्था की गई थी। लेकिन

गैस सिलिंडर एक बार खाली होने की वजह से सभी जगह काम रुक गया। इस समस्या की

ओर स्वास्थ्य मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराया। अगर जिस रफ़्तार से सर्वाइकल कैंसर

उन्मोलन अभियान चल रहा था उस रफ़्तार से 1 से 2 वर्षों में में झारखंड से सर्वाइकल

कैंसर का खत्मा हो जाता। इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस प्रोग्राम

को सफल बनाने के लिए वीमेन डॉक्टर्स विंग ने बहुत सहयोग दिया है और पहली बार पूरे

झारखंड के धर्म गुरुओं को खासकर आदिवासी समाज के धर्म गुरुओं को जो जोड़ने के बाद

हमें एसा लग रहा है की हमारी जो क्मषता है वैक्सीन लगाने की हम उस क्षमता के

अनुरूप वैक्सीनेशन की गति को तेज कर पायेंगें। उन्होंने डॉ. भारती कश्यप को आश्वासन

दिया की उन्होंने जिन 11 सदर अस्पतालों में सर्वाइकल कैंसर के उपचार की जो मशीने

लगवाई हैं, जिनकी समय के साथ गैस ख़तम होने के वाद इलाज रुक गया है। उन सभी

जहों पर दुबारा मशीनों को चालू करवा कर इसका इलाज चालू कराया जायेगा। जिससे

झारखंड की महिलाओं का जीवन बच सकेगा।

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