गबन के आरोपी को सलाहकार बनाने पर महिला कांग्रेस ने उठाया सवाल

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रांचीः गबन के आरोपी कुमार नीरज को पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा तकनीकी सलाहकार बनाया जाना

कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर और जांच पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद की मिलीभगत से हीं संभव हो सका,

जो एक बहुत बड़े घोटाला का संकेत है।

उक्त बातें झारखण्ड प्रदेश महिला कांग्रेस कमिटी की अध्यक्ष गुंजन सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही।

सुश्री सिंह ने कहा कि शौचालय निर्माण के नाम पर राज्य में कई बार घोटाले की बात सामने आई है.

लेकिन इस बार एक अभियंता जिसपर शौचालय निर्माण के नाम पर 10 करोड़ से ज्यादा की राशि के गबन का आरोप है

, उसे विभाग ने तकनीकी सलाहकार नियुक्त कर एक अलग ही मिसाल पेश की है।

सुश्री सिंह ने कहा कि इस योजना को पूरा करने के लिए कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर को

अप्रैल 2018 में अतिरिक्त प्रभार दिया गया.

जिसके बाद उन्होंने अप्रैल, मई और जून 2018 में 5 करोड़ 5 लाख 68 हजार का समायोजन दिखाया.

जिसे खुद कुमार नीरज, डीसी गठित जांच कमेटी को साबित नहीं कर पाएं.

उसे चंद्रशेखर ने कर दिया.

इसके बाद विभागीय जांच संचालन पदाधिकारी कामेश्वर प्रसाद ने बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र देखे ही

समायोजन को सही ठहराया और कुमार नीरज को बरी प्रमाण पत्र दे दिया, जो बड़े घोटाला का संकेत है।

सुश्री सिंह ने कहा कि झारखण्ड हाई कोर्ट ने हुए घोटाले में गड़बड़ी मानते हुए कुमार नीरज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

इसके बावजूद विभाग द्वारा कुमार नीरज के विरूद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गयी

और दूसरी ओर उन्हें पेयजल व स्वच्छता विभाग द्वारा तकनीकी सलाहकार बना दिया गया।

प्रदेश महिला कांग्रेस ने मांग की है कि यथाशीघ्र कुमार नीरज के मनोनयन को रद्द करते हुए

उनके विरूद्ध विभागीय कार्रवाई पुन: प्रारम्भ की जाये

तथा इस घटना में संलिप्त कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर एवं जांच संचालन पदाधिकारी

कामेश्वर प्रसाद को निलम्बित किया जाये।

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