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आतंकवादियों के खिलाफ अभियान में असम राइफल्स के महिला कमांडो तैनात

  • अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर महिला सैनिकों की भी तैनाती

  • कोरोना संकट में भी महिला सैनिकों की महती भूमिका

  • असम राइफल्स में महिला कमांडो सबसे अनुभवी

  • कठिन परिश्रम से तपकर तैयार हुईं हैं महिलाएं

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी : आतंकवादियों और तस्करों के खिलाफ अब महिला कमांडो मोर्चा संभालने जा

रही हैं। गृह मंत्रालय के फैसले में आज से भारत ने आतंकवादियों के खिलाफ अभियान

चलाने और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर महिला

सैनिकों को तैनात किया है। असम राइफल्स की महिला सैनिकों ने आतंकवादी के खिलाफ

युद्ध की तैयारी की है। असम राइफल्स और कमांडर के सहायक महानिदेशक ने आज

मुख्यालय शिलांग में कहा कि, असम राइफल्स महिला कमांडो भारत की सबसे पुरानी

अर्धसैनिक बल है। पिछले छह महीनों के दौरान, असम राइफल्स के महिला सैनिकों ने

मादक पदार्थों और तस्करी के पदार्थों की तस्करी को रोकने में एक सक्रिय भूमिका

निभाई। मणिपुर में भारत-म्यांमार सीमा पर असम राइफल्स महिला सैनिकों ने

कोविड-19 महामारी, ने जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया। गृह विभाग के एक अधिकारी ने

कहा कि असम राइफल्स के महिला सैनिकों ने गृह मंत्रालय के निर्देश पर अंतर्राष्ट्रीय

सीमा सुरक्षा को लेकर बैठक की।इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल ने सभी को विश्वास दिलाया

कि वह यहां किसी भी तरह की घुसपैठ नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय के

फैसले में असम राइफल्स की महिला सैनिकों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के खिलाफ युद्ध

की तैयारी की है। भारत ने जम्मू-कश्मीर , अरुणाचल में भारत चीन सीमा पर , भारत

म्यांमार सीमा ,भूटान और भारत के साथ सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर यानि एलओसी

नियंत्रण रेखा पर भारतीय सेना के असम राइफल्स महिला सैनिकों की तैनाती कर दी है।

इन पर बहुत खास जिम्मेदारी तो है ही, वहीं जिस इलाके में तैनात की गई हैं, वो काफी

ऊंचाई पर स्थित दुर्गम इलाका है, जहां ड्यूटी करना आसान तो कतई नहीं।

आतंकवादियों के खिलाफ महिलाओं को मिला कड़ा प्रशिक्षण

असम राइफल्स के सहेयक महानिदेशक और कमांडर ने यह भी कहा कि बारह महिला

सैनिकों की पलटन यहां सभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तैनात की गई है। ये महिला सैनिक

असम राइफल्स से ताल्लुक रखती हैं।पिछले दिनों सुखवी स्थित असम राइफल्स के

ट्रेनिंग सेंटर एंड स्कूल में पासिंग परेड के बाद 500 महिला सैनिकों को इस रेजीमेंट में

शामिल किया गया था। असम राइफल्स का इतिहास 181 साल पुराना है। भारतीय सेना

के एक अधिकारी ने बताया कि ये महिलाएं असम राइफल्स से हैं, जो भारतीय महिलाएं

हमारी मातृभूमि के लिए ऐतिहासिक रूप से बहुत मजबूत और समर्पित हैं। भारतीय सेना

के एक अधिकारी ने बताया कि ये असम राइफल्स रेजिमेंट कई ऐसी भी महिलाएं हैं, जो

मां भी हैं। लेकिन इन रेजीमेंट में शामिल होने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। इसमें कुछ

महिलाएं ऐसी भी हैं, जो शहीदों की पत्नियां हैं।आमतौर पर असम राइफल्स के निदेशक

भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के अधिकारी होते हैं। अर्धसैनिक बल होने के नाते,

असम राइफल्स गृह मंत्रालय के अंतर्गत आता है। मुझे उम्मीद है कि ये महिला सैनिक

देश को बचाने के लिए किसी भी कारण से पीछे नहीं हटेंगी। अधिकारी ने कहा कि वे अपने

कर्तव्यों को पूरा करने और संभालने में सफल होंगे। महिला सैनिकों ने देश को बचाने के

लिए उचित कदम उठाएंगे और बड़ी हिम्मत के साथ काम करेगी, असम राइफल्स और

कमांडर के महानिदेशक ने कहा।


 

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