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विजेता कंस्ट्रक्शन को हाईकोर्ट ने फिर से फटकार लगायी

  • कहा आपके दिये गये चेक बाउंस हो रहे हैं

  • सब कॉन्ट्रैक्टरों ने इसी लिए काम लटकाया

रांचीः विजेता कंस्ट्रक्शन पहले से ही अदालत की निगाहों में चढ़ा हुआ था। आज उसे फिर

फटकार लगी है। झारखंड हाईकोर्ट ने सदर अस्पताल से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान

सदर अस्पताल के निर्माण का कार्य करा रही कंपनी विजेता कन्स्ट्रक्शन को कार्य पूरा

होने में देर के लिए कसूरवार ठहराते हुए कहा कि विजेता कंस्ट्रक्शन ने अपने सब

कॉन्ट्रेक्टरों का पैसा रोक कर रखा है। जिसकी वजह से कार्य पूरा होने में देर हो रही है।

कम्पनी ने जिन सब कॉन्ट्रेक्टरों को चेक दिया वो भी बाउंस हो रहा है। इसलिए कम्पनी

को अपना रवैया सुधारने की जरूरत है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान SAIL ने

अदालत को बताया की उसके पास 5 हज़ार लीटर की क्षमता का ऑक्सीजन टैंकर नहीं है

जिसके बाद कोर्ट ने एचइसी और हिंडाल्को से पूछा है कि अगर उनके पास इस वक़्त कोई

वैकल्पिक व्यवस्था है तो बताएं। सदर अस्पताल में ऑक्सीजन बेड की शुरुआत में हो रही

देरी पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए 5 मई को कहा था कि अगले 10 दिनों में

अगर काम पूरा नहीं हुआ। तो अदालत कड़ी कार्रवाई करेगा। हाईकोर्ट ने सदर अस्पताल

का काम कर रही कम्पनी विजेता कंस्ट्रक्शन से पूछा था कि अस्पताल में ऑक्सीजन बेड

के स्टोरेज टैंक की व्यवस्था कितने दिनों में होगी। इसके साथ ही अदालत ने सेल बोकारो

और केंद्र सरकार को भी इस मामले में हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया था। निर्देश देते हुए

कहा कि ऑक्सीजन बेड के स्टोरेज टैंक की वैकल्पिक व्यवस्था करने पर विचार करे या

फिर भाड़े पर भी इसकी व्यवस्था की जाये।

विजेता कंस्ट्रक्शन ने तीस दिन में काम पूरा करने की बात कही

सुनवाई के दौरान कम्पनी की तरफ से अदालत को बताया गया कि काम पूरा करने में

लगभग 30 दिनों का वक़्त लगेगा। इस जवाब पर अदालत ने असंतुष्टि जाहिर की थी।

सदर अस्पताल में 300 बेड चालू नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। बता दें कि

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के सदर अस्पताल में 300 बेड चालू नहीं किए जाने पर कड़ी

नाराजगी जताई थी। अदालत ने 3 अप्रैल से पहले हुई सुनवाइयों के दौरान कहा था कि यह

बहुत ही गंभीर मामला है, लेकिन सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है। अधिकारियों की

कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के

चलते कोरोना काल में यहां के लोग 300 बेड से वंचित रहे। अधिकारियों को झारखंड के

गरीब लोगों के जीवन से खेलने की इजाजत कोर्ट नहीं दे सकता है।

मुकर जाने के सौ बहाने होते हैं- कोर्ट

अदालत ने कहा था कि मुकर जाने के सौ बहाने होते हैं। अधिकारी काम नहीं करना चाहते

हैं। प्रार्थी ज्योति शर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ

जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि कोरोना संक्रमण

की शुरुआत में ही अदालत ने राज्य सरकार से पूछा था कि क्या उनके पास पर्याप्त बेड,

पैरामेडिकल स्टॉफ, डॉक्टर सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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