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डैना होने के बाद भी यह उड़ता नहीं सिर्फ दौड़ता था

  • पंख वाले डायनासोर का भी अवशेष मिला

  • न्यू मैक्सिको के इलाके में पाया गया अवशेष

  • डैनों का प्रयोग शिकार करने में करता था यह प्राणी

  • लंबी पूंछ दौड़ने और शिकार करने में मददगार था इसका

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः डैना होने के बाद भी नहीं उड़ने वाले दूसरे प्राचीन प्राणी का फसिल मिला

है। हालांकि यह पूर्ण अवशेष नहीं बल्कि फॉसिल के टुकड़े हैं। लेकिन इनकी मदद से

यह समझा जा सकता है कि यह दरअसल डायनासोर की प्रजाति का ही प्राणी था। इस

प्राणी के अवशेष सॉन जुआन बेसिन में पाये गये हैं। शोधकर्ताओं को इस डैना वाले

डायनासोर के जो अंश मिले हैं, उनके विश्लेषण से ऐसा माना जा रहा है कि यह करीब

67 मिलियन वर्ष पुराना यानी क्रिटेशस काल का है। जिस इलाके में यह पाया गया है

वह वर्तमान के न्यू मैक्सिको का इलाका है। पहाड़ों के अंदर हो रही खुदाई के दौरान ही

यह फॉसिल पाये गये हैं। इस प्रजाति के फसिल पाये जाने की इस इलाके में पाये जाने

की यह पहली घटना है। वैज्ञानिक परिभाषा में डैना वाले इस प्रजाति के डायनासोर को

डिनियोबेलेटर नोटोहेसपेर्स (Dineobellator notohesperus ) कहा जाता है।

अपनी पंखों का इस्तेमाल शिकार के लिए करता था

अनुमान के मुताबिक अपने डैने से ही संतुलन बनाने और शिकार पकड़ने वाला यह

प्राणी उड़ता नहीं था। पहले भी प्राचीन काल के पक्षियों के ऐसे अवशेष मिले थे, जो

आकार में विशालाकाय थे। लेकिन डैना होने के बाद भी उड़ते नहीं थे। वर्तमान काल में

भी कई पक्षी ऐसे हैं, जो समय के बदलने के साथ साथ अब सिर्फ दौड़ते हैं अथवा बहुत

कम दूरी तक ही उड़ पाते हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि करीब साढ़े छह फीट लंबे

इस प्राणी की ऊंचाई तीन फीट होती थी। वह डायनासोर प्रजाति के अन्य प्राणियों की

तरह ही शिकार करता था। वह अन्य डायनासोरों की तरह ही शिकार करता था

इस संबंध में पेनिनसिल्वानिया विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ डॉ स्टीपन जेसिंस्की

कहते हैं कि यह प्रजाति दक्षिण अमेरिका के इलाकों में पहले ही होने का पता लग चुका

था। उत्तरी अमेरिकी इलाकों में इसके होने का प्रमाण अब मिला है। वैसे उत्तरी छोर

में अमेरिका से लेकर कनाडा और एशिया तक डायनासोर की अलग अलग प्रजातियां

रहा करती थी। क्योंकि इन तमाम इलाकों से उनके फॉसिल्स पहले ही मिले हैं। बाद में

उल्कापिंड के पृथ्वी से आ टकराने की वजह से उस काल में पूरी पृथ्वी पर राज करने

वाले यह प्रजाति एक ही झटके में समाप्त हो गयी थी।

वीडियो में देखें कैसे समाप्त हो गयी पूरी डायनासोर प्रजाति

अनुमान लगाया जाता है कि उल्कापिंड के आ टकराने से पृथ्वी पर जो आग की लपटे

फैली, उसमें यह विशाल और हिंसक प्रजाति जलकर राख हो गयी। बाद में इनके

अवशेष जहां तहां दब गये। जिन्हें पहाड़ों और पत्थरों के बीच दबे होने से कोई नुकसान

नहीं हुआ, वैसी प्रजाति के फॉसिल्स मिलने की वजह से ही जांच का गाड़ी आगे बढ़ पा

रही है। जो अवशेष शोधकर्ताओं को मिले हैं, उनमें सामने के हिस्से का वह हड्डी भी है,

जिससे पता चलता है कि डैने का हिस्सा इस प्रजाति के डायनासोर में कहां जुड़ा हुआ

होता था। साथ ही इसके बड़े बड़े नाखुन होने का भी पत चला है। फॉसिल में हड्डियों

की संरचना से इसकी पुष्टि हो जाती है। उसके शरीर के सामने का हिस्सा अपेक्षाकृत

लचीला था। इसी लचीलेपन की वजह से वह अपने शिकार पर हमला कर पाता था। वह

अपने हाथ के सभी हिस्सों को शिकार के काम लाता था और उसके बड़े बड़े पंजे और

नाखुन ही शिकार को पकड़ने और फाड़ डालने में मदद किया करते थे।

डैना होने के साथ साथ पूंछ भी हथियार जैसी थी

वैज्ञानिक इस प्राचीन प्रजाति के डायनासोर की पूंछ के बारे में जानकर भी हैरान है।

इसकी पूंछ में कई ऐसे गुण है जो उसे संतुलन बनाये रखने में मदद करते थे। साथ ही

उसकी लंबी पूंछ किसी मजबूत धातु के लाठी की तरह भी हमला करने के काम आती

थी। लचीला होने की वजह से वह अपनी पूंछ से भी किसी पर वार कर उसे घायल कर

सकता था। इस लंबी पूंछ की वजह से दौड़ते वक्त उसे संतुलन बनाये रखने में भी

मदद मिलती थी। इस फॉसिल के मिलने के बाद वैज्ञानिक यह मान रहे हैं कि इस

इलाके में प्राचीन काल में मौजूद कुछ अन्य डायनासोर प्रजाति के भी डैना होने की

पुष्टि भविष्य में हो सकती है। डॉ जासिंस्की के मुताबिक हो सकता है कि

ड्रोमाइयोसाउरिड्स प्रजाति के सभी डायनासोर उस काल में डैना युक्त ही थे। लेकिन

डैना होने के बाद भी यह उड़ते नहीं थे। इस बारे में आगे और साक्ष्य मिलने के बाद ही

किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा।


 

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