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उद्धव ठाकरे को मनोनीत करना राज्यपाल की मर्जी या माननी होगी कैबिनेट की बात?

नई दिल्ली:  उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री बने रह पाने के लिए उनका विधान

परिषद में राज्यपाल की ओर से मनोनयन बेहद जरूरी है। राज्य कैबिनेट की ओर से दो

बार राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। राजभवन की ओर से

कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद उद्धव ठाकरे ने बुधवार को पीएम नरेंद्र मोदी से भी बात

की। महाराष्ट्र में संभावित राजनीतिक संकट को लेकर विशेषज्ञों की राज्य बंटी हुई है।

क्या राज्यपाल के लिए राज्य कैबिनेट के प्रस्ताव के मुताबिक उद्धव को मनोनीत करना

आवश्यक है या यह उनके विवेक पर निर्भर है?

 उद्धव इस समय विस या वि परिषद के सदस्य नहीं हैं

वह बिना चुनाव लड़े ही राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन संविधान के अनुच्छेद 164 (4)

के मुताबिक, यदि सदन से बाहर का कोई व्यक्ति मंत्री या मुख्यमंत्री बनता है तो शपथ

ग्रहण से छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद (जिन राज्यों में है) का सदस्य

बनना अनिवार्य है। कोरोना वायरस महामारी की वजह से अभी विधानसभा के लिए

उपचुनाव या विधान परिषद के लिए चुनाव संभव नहीं है। यदि उद्धव को राज्यपाल विधान

परिषद के लिए मनोनीत नहीं करते हैं तो वह इस्तीफा देकर दोबारा शपथ ले सकते हैं या

शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी गठबंधन को एक केयर टेकर मुख्यमंत्री चुनना होगा।


 

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