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तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये भेज दे चाहे जेल में प्यार..




तेरा पीछा तो वह करते ही रहेंगे क्योंकि जहां भी जाओगे, उन्हे पाओगे ही पाओगे। जी हां मैं देश के किसानो की बात कर रहा हूं। अब देश में कहां नहीं हैं यह किसान। अब उन्होंने पंजाब में विरोध क्या कर दिया, उसकी आंच तो उत्तरप्रदेश तक आ पहुंची। वहां एक भाजपा विधायक को एक किसान नेता ने भरी सभा में थप्पड़ जड़ दिया।




नेताजी और उनके समर्थक मुंह ताकते रह गये। क्यों भाई पहले बात समझ में नहीं आयी थी क्या। जब पंगा ले रहे थे तो सोच लेना था कि यह किसान कहां कहां तुम्हें नंगा कर सकते हैं। फिरोजपुर जाने से पहले किसानों का आंदोलन चल रहा है, यह किसी ने नहीं बताया था या फिर इस किस्म के विरोध की मोदी जी को आदत नहीं थी।

गुजरात में शायद उन्हें ऐसे एक्सपीरियंस से नहीं गुजरना पड़ा होगा। इसलिए लगा होगा कि मोदी नाम ही काफी है कभी भी वजन कायम करने के लिए। अब उन्हें कौन समझाये कि तेरा पीछा यह किसान आगे भी नहीं छोड़ेंगे। ऊपर से सत्यपाल मलिक का यह बयान, जिसमें उन्होंने पांच सौ किसानों की मौत पर मोदी की टिप्पणी के साथ साथ यह कहा है कि मोदी काफी घमंड में थे, आग में घी डालने जैसा हो गया है।

आगे भी अगर किसी जनसभा में भाजपा के नेता पर थप्पड़ पड़ जाए तो कोई अचरज नहीं होगा। आज क्यों तकलीफ हो रही है। पहले समझना था कि जब सात सौ किसान मर रहे थे तो उनके परिवार वालों को भी तकलीफ हो रही होगी। इसलिए तय मानकर चलिए कि तेरा पीछा तो वह करते रहेंगे। जब बार बार किसान दिल्ली के करीब बैठकर अपनी बात सुन लेने की गुहार लगा रहे थे तब तो इस पर ध्यान देना चाहिए था।

तेरा पीछा वाली बात तो सत्यपाल मलिक ने कही थी

इसी बात पर अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म जुगनू का यह गीत याद आने लगा है। इस गीत को लिखा था आनंद बक्षी ने और संगीत में ढाला था सचिव देव वर्मन ने। इसे किशोर कुमार ने अपना स्वर दिया था। इस फिल्म को उस जमाने की सुपरहिट जोड़ी धर्मेंद्र और हेमा मालिनी पर फिल्माया गया था। इस गीत को बोल कुछ इस तरह हैं।

प्यार के इस खेल में, दो दिलों के मेल में
तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये
भेज दे चाहे जेल में प्यार के इस खेल में

डरता मैं नहीं, चाहे हो ज़मीं, चाहे आसमां
जहां भी तू जायेगी मैं वहां चला आऊंगा
जहां भी तू जायेगी मैं वहां चला आऊंगा
तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये
तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये




भेज दे चाहे जेल में प्यार के इस खेल में
ओ जान-ए-जिगर, दिन में तू अगर, मुझसे ना मिली
सपनों में आके सारी रात जगाऊंगा
सपनों में आके सारी रात जगाऊंगा तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये 

भेज दे चाहे जेल में प्यार के इस खेल में
दिल के हाथ से, लिख ले बात ये, वादा ये रहा
तेरे घर लेके बारात कभी आऊंगा तेरे घर लेके बारात कभी आऊंगा
तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये
तेरा पीछा ना मैं छोड़ूंगा सोनिये भेज दे चाहे जेल में
प्यार के इस खेल में

पंजाब का रिजल्ट को फिरोजपुर की घटना से साफ होने लगा है। अब भाजपा और उसके सहयोगियों को पंजाब से बहुत अधिक उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। वैसे भी चुनावी सर्वेक्षण पहले से ही इसके संकेत तो दे रहे थे। पहले से ही बताया जा रहा था कि वहां आम आदमी पार्टी का ग्राफ सबसे ऊपर है।

पंजाब का नतीजा तो पहले से ही दिख रहा है

अब तेरा पीछा करते हुए कुछ किसान संगठनों ने भी चुनाव में उतरने का एलान कर दिया है। अइसे में भाजपा को वहां से कोई ज्यादा उम्मीद अब नहीं पालना चाहिए। सुरक्षा में सेंध पर ही सही पर वहां के बदले उत्तरप्रदेश पर फोकस रहे तो फिल्म जुगनू की तरह यहां भी अंततः कामयाबी मिल सकती है। अलबत्ता भाजाप नेताओँ को अब सोच समझकर ही किसानों पर बयान देना चाहिए, यह पंजाब की घटना से साबित हो गया है।

जिस परम प्रतापी को भी पहली बार इस तरीके से लौटना पड़ गया, उसका प्रचार कुछ और हुआ और घटना कुछ और थी। इसलिए जो किला अपने हाथ में है, उसे बचा लिया जाए, यही समझदारी वाली बात है। यह भी साफ है कि उत्तरप्रदेश के किला मजबूत रहा तो दूसरे छोटे किले हाथ से निकल भी गये तो ज्यादा टेंशन नहीं लेना है।

लेकिन अगर उत्तरप्रदेश हाथ से निकला तो यह आने वाले 2024 के चुनाव के लिए बहुत अधिक टेंशन वाली बात होगी। भाजपा के चुनावी चाणक्य को अब बंगाल के बाद से अधिक पॉवर नहीं मिल रहा है। तो फिर सोच समझकर अपना घर बचाने की कवायद तो सभी को करनी होगी। सिर्फ तेरा पीछा करने वाले किसानों को कोसने से तो यह किला नहीं बचेगा भाई।



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