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तुझे खंजर से क्या मारूं एक नजर है काफी बेचारे इमरान खान




तुझे खंजर से क्या मारूं का तेवर अपनाया तो सामने वाले की बेचैनी साफ बाहर झलकने लगी है।

अब सभ्य खेल के सभ्य खिलाड़ी का लबादा उतारकर इमरान खान पूरी दुनिया तक को चुनौती देने लगे हैं।

उनकी बात को दरअसल संयुक्त राष्ट्र में भी किसी ने गंभीरता से नहीं सुना।

बंद कमरे में हुई बैठक के अंदर से छनकर आने वाली सूचनाओं के मुताबिक अकेला चीन उसके पक्ष में खड़ा था,

शेष सभी ने दोनों तरफ की बात सुनी और भारत के फैसले में राय जाहिर कर चलते बने।

लेकिन यह जाहिर कर दिया गया कि अब बेचारे इमरान खान को समझ में ही नहीं आ रहा है कि वह अब कश्मीर का एजेंडा कैसे आगे बढ़ायें।

दूसरी तरफ पाक अधिकृत कश्मीर को छोड़ दें तो इस्लामाबाद में एकीकृत भारत के पक्ष में झंडे लहराने लगे हैं।

ऐसे में तो पाकिस्तानी राजनीति का मूल आधार ही जड़ से उखड़ जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

इमरान खान को अब हर बात पर वही दोहराया पड़ रहा है

इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी फिरोजाबाद में सीना ठोंककर कहा था कि

अगर भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर पर हमला किया तो दोनों देशों के बीच युद्ध निश्चित है।

इधर अपने नरेन्दर भइया ने इस बात को एक कान से सुना और दूसरे कान से बाहर निकाल दिया।

इतनी बड़ी बात कहने के बाद भी भारत की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने की प्रतिक्रिया तो होनी ही थी।

अरे यार झारखंड में भी विकास की बात करते हैं तो लोग चालीस परसेंट कमीशन समझ लेते हैं।

अइसे में कइसे काम चलेगा। इसी बात पर एक पुरानी फिल्म का गीत याद आ रहा है।

इस गीत की चर्चा पहले भी हो चुकी है। फिल्म फिल्म निर्दोष के इस गीत को लिखा था असद भोपाली ने।

इसे सुर में ढाला था लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने और स्वर दिया था आशा भोंसले ने।

गीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं

तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी

मेरे साजन सुन तेरी, खता की नहीं है माफी  तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी

तुझे जिन्दा कैसे, छोड़ू होगी न इंसाफी तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी

मै कौन हु ये जान ले, अच्छी तरह पहचान ले पहले हाय, पहले कभी देखा तो है

ये कहदे इतना मन ले, जुल्फे भी है लाघरारी सी आँखे भी है शरमाई सी, ये हुस्न पर बाँकपन

उसपे कमर बलखाई सी, और फिर मर मिटने को ये बाली उम्र है काफी, तुझे खंजर से क्या मारूं

एक नजर है काफी, मेरे साजन सुन तेरी खता की नहीं माफी, तुझे खंजर से क्या मारूं

एक नजर है काफी, वो रात के मेहमान आ दिल में तेरे गले लग जाऊंगी, काम अपना भी कर जाउंगी

तस्कीन भी दूँगी तुझे, दिल भी तेरा तड़पाऊंगी तेरे सितम आज भी दिल में, मेरे असर है बाकि

तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी मेरे साजन सुन तेरी, खता की नहीं है माफी

खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी तूझे जिन्दा कैसे, छोड़ू होगी न इंसाफी

तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी मै कौन हु ये जान ले, अच्छी तरह पहचान ले

पहले हाय, पहले कभी देखा तो है ये कहदे इतना मन ले, जुल्फे भी है लाघरारी सी

आँखे भी है शरमाई सी, ये हुस्न पर बाँकपन उसपे कमर बलखाई सी, और फिर मर मिटने को

ये बाली उम्र है काफी, तुझे खंजर से क्या मारूं एक नजर है काफी, मेरे साजन सुन

तेरी खता की नहीं माफी, तुझे खंजर से क्या मारूं एक नजर है काफी, वो रात के मेहमान आ दिल में

तेरे गले लग जाऊंगी, काम अपना भी कर जाउंगी तस्कीन भी दूँगी तुझे, दिल भी तेरा तड़पाऊंगी

तेरे सितम आज भी दिल में, मेरे असर है बाकि तुझे खंजर से क्या मारूं, एक नजर है काफी

मेरे साजन सुन तेरी, खता की नहीं है माफी 

वहां की हर बात पर नजर रखते हुए अपने झारखंड में लौटते हैं तो यहां भी इशारों इशारों का खेल चल रहा है।

अपने हैवीवेट मंत्री सरयू राय ने इशारों इशारों में जो बातें कही हैं, उनका असर दूर तक होना तय है।

राय जी ने जो कुछ इशारों इशारों में कहा है, वे सारे सवाल फिलहाल शायद फिक्स्ड डिपोजिट में हैं

और माहौल बदलने के बाद उनका उभरकर सामने आना तय है।

अलबत्ता अपने हेमंत भइया चुपचाप अपना काम करते चल रहे हैं।

दरअसल कांग्रेस के अंदर की गड़बड़ी की वजह से उनकी गाड़ी फूल स्पीड में आगे नहीं बढ़ पा रही है।

कांग्रेस का झमेला निपटे तो पता चलेगा कि महागठबंधन की गाड़ी किस तरफ दौड़ रही है।

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