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शराबबंदी पर इतनी सख्ती पर मुंगेर गोलीकांड पर नरमी क्यों




निजी व्यक्ति के हाथ में पुलिस का वायरलैस

सवाल है कि क्या कानून सिर्फ गरीबों के लिए

मारे गये युवक का परिवार न्याय की आस में

डीएसपी प्रमोद राय अनुसंधान से हटाए गए

नए डीएसपी आलोक कुमार सीआईटी में शामिल

दीपक नौरंगी

भागलपुर : शराबबंदी को लेकर नीतीश कुमार के तेवर तल्ख हैं। उन्होंने हाल की कुछ मौतों के बाद




इस पर सीधी चेतावनी दी है। इसका नतीजा है कि अब पूरी बिहार पुलिस शराबबंदी का कड़ाई से

अमल कर रही है। शराब की तस्करी करने वाला हो या सिर्फ एक या दो पैग पीकर सड़क पर

निकलने वाला सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। यह सब सिर्फ इसलिए क्योंकि 16

नवंबर को राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी की समीक्षा की और इसमें कठोर कार्रवाई

का निर्देश दिया। यह अच्छी बात है कि सरकार ने जो कानून और नियम बनाए हैं उसकी कठोरता से

पालन कराई जा रही है। इसके बीच एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या कानून और कठोर

नियम क्या बड़े लोगों के लिए नहीं है। शराब पीने वाला जेल चला जाता है और हत्या हो जाए तो

उसके लिए दोषी पदाधिकारियों को दंडित करने की जगह पुरस्कृत किया जा रहा है। मामला फिर से

मुंगेर गोलीकांड का उठ खड़ा हुआ है जहां दुर्गा पूजा विसर्जन के दौरान फायरिंग हुई और अनुराग

पोद्दार नाम के शख्स की उस फायरिंग में मौत हो गई। सुशासन बाबू की सरकार में सार्वजनिक तौर

पर हुई इस हत्या की जांच कराई जा रही है और आश्चर्य है कि मुंगेर की तत्कालीन एसपी और घटना

के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार आईपीएस लिपि सिंह के खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर उन्हें दूसरे

जिले में एसपी बना दिया गया। एक नजी व्यक्ति के हाथ में पुलिस के वायरलैस का वीडियो और

फोटो वायरल हुआ। सीआईडी के द्वारा उस पर भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।

शराबबंदी को लेकर कड़ाई के बीच यह जांच गुम होता रहा है

मुंगेर विसर्जन के दौरान हुई घटना की जांच में लगाए गए डीएसपी अब उस मामले की जांच नहीं

करेंगे। पता चला है कि स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्होंने खुद को इस जहां से अलग कर लिया।

हकीकत क्या है यह तो बड़े अधिकारी जानते होंगे लेकिन सवाल जरूर है कि क्या वास्तव में उस

डीएसपी ने बिगड़ते स्वास्थ्य की वजह से जहां छोड़ी या इसके पीछे कोई और कारण है। अब उस




जांच में एक डीएसपी आलोक कुमार को शामिल किया गया है। उधर मृतक युवक के परिजन

खासकर उनके पिता न्याय की आस लगाए बैठे हुए हैं। उन्होंने बातचीत में इतना तो साफ कह दिया

कि पुलिस और प्रशासन की जांच पर उनको बिल्कुल भरोसा नहीं है। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग

की है साथ ही यह भी कहा कि न्याय व्यवस्था पर उन्हें भरोसा है और उम्मीद जताई कि कोर्ट से

उन्हें जरूर इंसाफ मिलेगा। घटना के बाद से ही यह चर्चा में बात रही है की मुंगेर की तत्कालीन

एसपी लिपि सिंह के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई और क्यों इतनी जल्दी उन्हें सहरसा जैसे

महत्वपूर्ण जिले का पुलिस कप्तान बना दिया गया है। मृतक के पिता ने साफ कहा जदयू के बड़े

नेता और केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की बेटी है इस वजह से उनके खिलाफ सरकार ने कोई कार्रवाई

नहीं की। ऐसे में राज्य के मुखिया नीतीश कुमार की छवि पर भी सवाल उठने लगे हैं। नीतीश कुमार

अपनी छवि को लेकर हमेशा सतर्क रहे हैं लेकिन मुंगेर की घटना और लिपि सिंह पर कार्रवाई नहीं

होने से उनकी छवि को भी धक्का जरूर लगा है।

सुशासन सरकार की छवि पर धक्का है यह गोली कांड

लिपि सिंह पर कार्रवाई तो दूर की बात है उस निजी व्यक्ति के खिलाफ भी अब तक कार्रवाई नहीं की

गई जिसका नाम कृष्ण कुमार है और जिसके पास पुलिस का वायरलेस सेट भी देखा गया था।

घटना के दौरान वह शख्स भी पुलिस के रोल में दिख रहा था आखिर वह किसके बुलाने पर आया था

और उससे इतना अधिकार दिया किसने। एक गरीब परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है और घर

के चिराग को बुझाने वाले लोग चाहे वह पदाधिकारी हो या अन्य व्यक्ति अपनी अपनी जगह पर

सुरक्षित पदस्थापित हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि क्या इस राज्य में वास्तव में सुशासन है

या मुट्ठी भर लोग सरकार चला रहे हैं। 



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