पूरी सृष्टि कहीं फैलता हुआ बुलबुला तो नहीं

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  • इस आकार के बीच में है डार्क मैटर
  • ब्लैक होल पहले से साबित सत्य है
  • डार्क मैटर की ऊर्जा अभी प्रमाणित नहीं
  • संरचना में निरंतर हो रहा है बदलाव

प्रतिनिधि
नईदिल्लीः पूरी सृष्टि के बारे में एक नई वैज्ञानिक सोच तेजी से पनप रही है।

पूरे सौर जगत के आकार प्रकार के बारे में शोध में जुटे वैज्ञानिक

इस सिद्धांत पर भी विचार कर रहे हैं कि कहीं यह एक फैलता हुआ बुलबुला तो नहीं है।

इस फैलते हुए बुलबुले के बीच में ब्लैक होल हैं, जो एक दूसरे से मिलकर

बुलबुला के आकार को लगातार बढ़ाते जा रहे हैं।

इसी बुलबुले के बीच ही अलग अलग सौर मंडल और उनके ग्रह भी चक्कर काट रहे हैं।

लेकिन वैज्ञानिक इस सिद्धांत के तहत यह भी मानते हैं कि

अगर यह बुलबुला है तो इसका एक न एक दिन फटना भी तय है।

इस सोच के आधार पदार्थ विज्ञान का वह डार्क मैटर है, जिसके आयाम के बारे में अब तक पता नहीं चल पाया है।

हम जिस ब्लैक होल के बारे में जानते हैं वह भी दरअसल इसी डार्क मैटर यानी काला पदार्थ का ही एक अंग है। इस सिद्धांत के मुताबिक डार्क मैटर ही वह ऊर्जा है, जिसके सहारे यह पूरी सृष्टि संचालित हो रही है।

इस नये वैज्ञानिक सिद्धांत के बारे में अनुमान लगाया जा रहा है कि

दरअसल इस डार्क मैटर की वजह से पूरे सौर मंडल में एक बड़े बुलबुले के अंदर

छोटे छोटे बुलबुलों का समूह भी हैं।

यह सारे छोटे छोटे बुलबुले भी अपने केंद्र में ब्लैक होल को लेकर संचालित हो रहे हैं।

निरंतर ऊर्जा के गतिमान होने की वजह से इसका आकार बढ़ रहा है

जबकि छोटे बुलबुले के अंदर में लगातार ग्रह और तारों की स्थिति में बदलाव भी हो रहा है।

उपासला विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इसी सिद्धांत के आधार पर

एक मॉडल भी तैयार किया है।

अभी इस सैद्धांतिक मॉडल के सभी आयामों का वैज्ञानिक परीक्षण होना शेष है।

हालांकि वैज्ञानिकों का एक समूह इसे सिर्फ लफ्फाजी मानता है

और उनकी सोच है कि इस मॉडल के आधार पर किसी अंतरिक्ष जगत की परिकल्पना ही नहीं की जा सकती है।

लेकिन इस मॉडल और बुलबुला के सिद्धांत को खारिज करने वाले भी सौर मंडल में डार्क मैटर के अस्तित्व को खारिज नहीं करते

क्योंकि ब्लैक होल का प्रमाण सभी के सामने हैं और यह प्रमाणित वैज्ञानिक सत्य है।

वैसे इस पूरी सृष्टि की संरचना के लगातार बदलने की सोच को भी लोग अस्वीकार नहीं कर पा रहे हैं।

उनकी असहमति सिर्फ बुलबला होने की स्थिति को लेकर है।

लेकिन इसके खंडन में वह इस पूरे सौर जगत के आकार पर स्पष्ट तौर पर किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाये हैं।

लेकिन आकार प्रकार में बदलाव की वजह से यह आकार जैसा भी हो

उसमें बदलाव की संभावना से कोई भी इंकार नहीं कर सकता।

साथ ही यह माना जा रहा है कि इस पूरी सृष्टि में हर रोज नये नये आयाम जुड़ रहे हैं

और इसी आधार पर इसे एक फैलते और विस्तारित होने वाले बुलबला के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए।

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