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निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने की सोच किसकी थी

निजी अस्पतालों को अब नई टीका नीति से कम फायदा होगा। लेकिन यह सवाल

प्रासंगिक है कि इन अस्पतालों को वैश्विक संकट के बीच ऐसा फायदा पहुंचाने का फैसला

किसका था और इसकी वजह से आम जनता में हुई मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा। यह

बात सामने आयी है कि देश की टीकाकरण नीति में संशोधन के बाद टीका कंपनियों और

निजी अस्पतालों को राजस्व नुकसान का नुकसान हो सकता है। केंद्र सरकार ने देश में 18

वर्ष और इससे अधिक उम्र के लोगों के लिए 21 जून से मुफ्त टीकाकरण अभियान शुरू

करने की घोषणा की है। एक मोटे अनुमान के अनुसार केंद्र की नई नीति के बाद सीरम

इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को हरेक महीने 26.25 करोड़ रुपये राजस्व का

नुकसान होगा, जबकि भारत बायोटेक को 45 करोड़ रुपये से हाथ धोना होगा। इस रकम

की गणना यह मानते हुए की गई है कि सीरम और भारत बायोटेक दोनों हरेक महीने

क्रमश: 7 करोड़ और 4 करोड़ टीके तैयार करती हैं। केंद्र के निर्णय पर सीरम और बायोटेक

दोनों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। लेकिन केंद्र के बजट का 35 हजार करोड़ और

इन दोनों कंपनियों को अब तक हुए फायदे की बात छोड़ भी दें तो निजी अस्पतालों को अब

तक कितने टीकों की आपूर्ति हुई है और उन टीकों से इन निजी अस्पतालों ने क्या कुछ

मुनाफा कमाया है, वह जांच और सार्वजनिक चर्चा का विषय है। राज्यों को अधिक कीमत

पर टीका खरीदने का फैसला भी किसका था और उससे किसे फायदा पहुंचाया गया, यह

सवाल भी आज नहीं तो कल सार्वजनिक चर्चा में आता रहेगा।

निजी अस्पतालों को अब तक कितना और किसने फायदा पहुंचाया

इससे पहले मध्य अप्रैल में घोषित नीति में केंद्र ने कहा था कि देश में तैयार और

आयातित टीकों की कुल खुराक में वह 50 प्रतिशत हिस्सा खरीदेगी और शेष बची खुराक

राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों में आधी-आधी बांट दी जाएंगी। यह व्यवस्था 1 मई

से प्रभावी हो गई थी और उसी दिन देश में 18 वर्ष और इससे अधिक उम्र के सभी लोगों के

लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई थी। टीका बनाने वाली कंपनियों ने राज्य

सरकारों और निजी अस्पतालों दोनों के लिए अलग-अलग कीमतों की घोषणा की थी। केंद्र

सरकार को कंपनियां प्रति खुराक 150 रुपये दर से टीके आवंटित कर रही थीं। सीरम

इंस्टीट्यूट राज्य सरकारों से प्रति खुराक 300 रुपये और निजी अस्पतालों से 600 रुपये

लेती है। भारत बायाटेक राज्य सरकारों और निजी अस्पतालों से 1,200 रुपये प्रति खुराक

लेती है। संशोधित टीकाकरण नीति के अनुसार केंद्र सरकार अब 18 वर्ष और इससे अधिक

उम्र के लोगों के लिए टीके खरीदेगी और राज्यों को इनका वितरण करेगी। इस तरह, अब

राज्यों को अलग दरों पर टीके खरीदने की जरूरत नहीं रह जाएगी। निजी अस्पतालों को

शेष बची 25 प्रतिशत खुराक खरीदने की अनुमति होगी। दोनों टीका कंपनियों को इससे

नुकसन होगा क्योंकि केंद्र उन्हें 150 रुपये प्रति खुराक की दर से भुगतान करेगा।

एसआईआई को राज्य सरकारों को दी गई प्रत्येक खुराक पर 150 रुपये नुकसान होगा।

इस समय कंपनी प्रत्येक महीने राज्यों को 1.75 करोड़ खुराक दे रही है। कंपनी जितने टीके

का उत्पादन करती है केंद्र सरकार उनका 75 प्रतिशत हिस्सा 150 रुपये प्रति खुराक की दर

से खरीदती है, इसलिए उसे (सीरम को) हरेक महीने 26.25 करोड़ रुपये राजस्व का

नुकसान होगा।

अभी नुकसान होगा तो पहले फायदा कितना हुआ है

भारत बायोटेक भी कुल टीका उत्पादन का 25 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकारों को देती है

और इस आधार पर उसे हरेक महीने 45 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। कंपनी राज्यों से

प्रति खुराक 600 रुपये ले रही थी। मोटे अनुमान के तौर पर कंपनी अब प्रत्येक महीने 4

करोड़ खुराक का उत्पादन कर रही है। हालांकि कंपनी ने उत्पादन संबंधी आंकड़ों की पुष्टि

नहीं की। दोनों कंपनियों ने कहा है कि वे उत्पादन बढ़ाने जा रही हैं। एसआईआई जुलाई-

अगस्त तक प्रत्येक महीने 10 करोड़ खुराक का उत्पादन करना चाहती है, जबकि भारत

बायोटेक का कहना है कि वह इस वर्ष के अंत तक उत्पादन बढ़ाकर सालाना 1 अरब खुराक

कर लेगी। हालांकि कंपनी ने माहवार उत्पादन का आंकड़ा नहीं दिया। अस्पतालों के लिए

केंद्र ने टीके की प्रति खुराक लगाने पर सेवा शुल्क 150 रुपये तय कर दिया है। लेकिन इस

पूरी प्रक्रिया और वैक्सीन के नियमों में बदलाव के बीच असली सवाल अनुत्तरित रह गये

कि आखिर ऐसा फैसला किसने और किसे फायदा पहुंचाने के लिए लिया था। जिसकी

वजह से पूरे देश में असंतोष की भावना ऐसी उत्पन्न हुई कि सर्वोच्च न्यायालय तक को

इससे जुड़े सारे दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश देने पड़े हैं। कुल मिलाकर देर से ही सही

लेकिन एकीकृत टीका खरीद और वितरण का फैसला जनता के हित में हैं। अलबत्ता पहले

का फैसला किसके फायदे के लिए था, यह सवाल तो तब भी और आगे भी बना ही रहेगा।

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