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विश्व स्वास्थ्य संगठन पर कोरोना मामले में लगा बहुत बड़ा आरोप

  • कोरोना वायरस प्रयोगशाला में तैयार किया गया है

  • अप्रैल में भागकर अमेरिका आयी है यह वैज्ञानिक

  • चीन की सरकार को पहले से सब कुछ पहले से पता था

  • राज खोलने वाली वैज्ञानिक भागी भागी फिर रही

रांचीः विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना के मामले में गंभीर आरोपों के घेरे में आ रहा है।

चीन में कोरोना वायरस फैलने के बाद यह आरोप लगा है कि दरअसल विश्व स्वास्थ्य

संगठन को इस वायरस के फैलने की जानकारी होने के बाद भी वह चुप्पी साध गया था।

इसी चुप्पी की वजह से दुनिया भर में इस वायरस को फैलने का अधिक समय मिला।

आरोप में इस बात को दोहराया गया है कि दरअसल यह कोई प्राकृतिक वायरस नहीं है

बल्कि इसे वुहान के एक प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया है। इस बात का

आरोप चीन के ही एक वैज्ञानिक ने लगाया है और वह इनदिनों चीन से भागे भागे फिर रहे

हैं और गुमनामी में हैं। कोरोना वायरस के मामले में इस आरोप को पहले की तरह खारिज

नहीं किया जा रहा है क्योंकि दुनिया भर से इस बात के भी संकेत मिल रहे हैं कि यह

जानलेवा वायरस अपना स्वरुप बदलता जा रहा है। प्रारंभ में यह प्रक्रिया काफी धीमी थी

लेकिन अब खास तौर पर अमेरिकी में वायरस के आंतरिक स्वरुप में हुए बदलाव की पुष्टि

हो गयी है। सार्वजनिक तौर पर यह बताया गया है कि दरअसल यह वायरस वुहान के

समुद्री खाद्य पदार्थों के एक बाजार से फैला था। लेकिन अमेरिका भाग कर आये चीन के

वैज्ञानिक इस तर्क को खारिज करते हैं। उनके मुताबिक इसे प्रयोगशाला में तैयार किया

गया था। जिसकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन को काफी पहले से ही थी लेकिन यह

संगठन किसी खास वजह से चुप्पी साधे बैठा रहा। जिसका नतीजा हुआ कि यह वायरस

दुनिया के अन्य देशों में फैलता चला गया। अब पूरी दुनिया इसका चौतरफा खामियजा

भुगत रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जानकारी को छिपायी

वैसे चीनी के इस वैज्ञानिक के दावों के अलावा भी दुनिया के कई देश चीन के सी फुड

मार्केट के दावे को स्वीकार नहीं करते और वे अपने अपने स्तर पर वायरस की उत्पत्ति की

जांच कर रहे हैं। संदेह की गुंजाइश इसलिए भी है क्योंकि नौ माह बीत जाने के बाद भी

चीन के इस वायरस के बारे में अन्य वैज्ञानिकों को अब तक बहुत कुछ पता नहीं चल पाया

है। खास कर चीन के द्वारा जो दावा किया गया था, उसके संबंध में वैज्ञानिक साक्ष्य भी

नहीं दिये गये हैं। इसके बाद भी कई अन्य रिसर्च ऐसे दावों का खंडन करते हैं और यह कह

चुके हैं कि यह इंसानों द्वारा तैयार किया गया वायरस नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चुप्पी साध लेने का गंभीर आरोप लगाने वाले चीन की महिला

वैज्ञानिक डॉ ली मेंग यान हैं। वह पिछले अप्रैल माह में किसी तरह चीन से भाग निकले हैं।

उन्होंने एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में पहली बार यह आरोप लगाया था। लेकिन वह

फिलहाल कहां छिपे हुए हैं, इसकी जानकारी नहीं दी गयी है। उन्होंने विओन टीवी के

साक्षातकार में यह बातें कही थी। वैसे ऐसा आरोप लगाने वाले वह अकेले वैज्ञानिक नहीं

हैं। पहले भी कई अन्य वैज्ञानिकों ने इस बारे में राय जाहिर की थी कि दरअसल यह

वायरस प्राकृतिक नहीं है बल्कि उसे प्रयोगशाला में तैयार किया गया है। चीन की बैट

वूमैन के नाम से प्रसिद्ध वैज्ञानिक की देखरेख में वुहान की उस प्रयोगशाला में पिछले सात

वर्षों से चमगादड़ों के वायरस पर रिसर्च चल रहा था।

हांगकांग की वैज्ञानिक अब अमेरिका भाग आयी है

अपने टीवी इंटरव्यू में मेंग ने कहा है कि चीन की सरकार को काफी पहले ही इस खतरे की

जानकारी थी। लेकिन महामारी फैलने और बाद तक चीन की सरकार इस मामले में काफी

गोपनीयता बरतती आयी है। यहां तक कि अब भी वुहान में दरअसल क्या हुआ था, उस

पर पर्दा पड़ा हुआ है।

इस चीनी वैज्ञानिक का आरोप है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी वायरस के फैलने की

जानकारी हो चुकी थी लेकिन इस संगठन ने अपनी तरफ से दुनिया को सतर्क करने का

कोई प्रयास तक नहीं किया। याद रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी विश्व

स्वास्थ्य संगठन पर चीन के पक्ष में काम करने का गंभीर आरोप लगा चुके हैं। इस चीन से

भागे वैज्ञानिक का कहना है कि चीन में भी इस बात को दबाने की पुरजोर कोशिश हो रही

है लेकिन दुखद स्थिति यह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी इस साजिश में भागीदार बना

हुआ है।

याद रहे कि इसी तरह का आरोप लगाने वाले चीन के एक और डाक्टर 34 वर्षीय ली

वेनलियांग की भी कोरोना से मौत होने की खबर आयी है। लेकिन मरने के पहले ही वह

दुनिया को इस बारे में आगाह कर चुके थे। अब उनकी मौत भी वाकई कोरोना से हुई है

अथवा उन्हें मार डाला गया है, इस पर नई बहस प्रारंभ हो गयी है। इन तमाम बहसों के

बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पर लगातार संदेह व्यक्त किये जा रहे हैं।


 

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