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विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दो अन्य दवाओं की मंजूरी दी




जेनेवाः विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना के ईलाज के लिए दो नये दवाओं को मंजूरी दी है। इसके बीच ही वैज्ञानिकों ने एक जीन को खोज निकाला है, जिसकी वजह से कोरोना की परेशानियां अधिक बढ़ जाती है। इस जीन की सक्रियता की वजह से ही कोविड 19 से बीमार व्यक्ति को अधिक परेशानी होती है।




डब्ल्यूएचओ ने इली लिली और ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन तथा वीर बॉयोटेक्नोलॉजी की दवाओं को कोरोना का ईलाज के लिए स्वीकार किया है। दुनिया में बहुत तेजी से फिर से फैल रहे कोरोना वायरस के बीच ही इन दवाओं को मंजूरी दी गयी है। पहली दवा बारिसिटीनिब हैं, जिसे ओलूमियांट के नाम से बेचा जाने वाला है। इसमें कोर्टिकॉस्ट्रेरॉयड का मिश्रण है।

दूसरी तरफ जीएसपी वीर की एंटीबॉडी थैरापी को भी मंजूरी मिली है। इनसे मरीजों के गंभीर रुप से बीमार होकर अस्पताल में दाखिल होन की आशंका बहुत कम हो जाती है, ऐसा दावा किया गया है।




विश्व स्वास्थ्य संगठन संक्रमण की रफ्तार से चिंतित

भारत जैसे अधिक आबादी वाले देशों में कोरोना संक्रमण के तीसरी बार फैलने के बीच ही इन दवाओं को बाजार मे उतारा जा रहा है। सिर्फ भारत ही नहीं अमेरिका जैसा विकसित देश भी कोरोना की लहरों से जूझ रहा है।

वहां राष्ट्रपति जो बाइडेन के आदेश पर सेना के एक हजार प्रशिक्षित लोगों को भी लोगों के ईलाज में सहयोग के लिए मैदान में उतारा गया है। दरअसल अत्यधिक मरीजों क वजह से अमेरिका जैसे विकसित देश की स्वास्थ्य सेवा भी चरमरायी हुई है।

इस बीच पौलेड के वैज्ञानिकों ने अपने शोध के बाद यह दावा किया है कि दरअसल एक खास जीन की वजह से ही कोरोना की चपेट में आने वाली रोगियों को गंभीर किस्म की परेशानी होती है। इस जीन की सक्रियता की वजह से रोगी की परेशानियां दोगुनी हो जाती है। इसलिए इस जीन की सक्रियता को भी दवा से रोककर रोगी की गंभीरता को बहुत कम किया जा सकता है।



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