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जहां तहां फंसे लोगों पर भी ध्यान दें राज्य सरकार




जहां तहां लोग फंसे हुए हैं। इनमें से अधिकांश वैसे लोग हैं, जो रोजगार के लिए दूसरे

राज्यों में गये थे। इनमें से कुछ तो उन्हीं स्थानों पर अटके हैं, जहां उन्हें रोजगार मिला

हुआ था। वहां काम बंद होने की वजह से अब उनके पास कोई रोजगार का साधन नहीं है।

अचानक लॉक डाउन की वजह से जो परिस्थितियां पैदा हुई है, उसमें उन्हें पैसे भी पर्याप्त

नहीं मिल पाये हैं। इसके अलावा भी जहां तहां फंसे लोगों में वैसे भी हैं, जो अपने काम की

जगह से गांव लौटने के लिए निकले तो थे लेकिन बीच रास्ते में ही फंसकर रह गये हैं।

जाहिर है कि इनके पास भी आर्थिक साधनों का घोर अभाव है और अगर पैसा है भी

तो इस लॉक डाउन की वजह से सारे संसाधन हासिल कर पाना उनके बूते की बात नहीं है।

पूरे देश में बने क्वारेंटीन केंद्रों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। जिन इलाकों में कोरोना

का संक्रमण अधिक है, उनमें इन केंद्रों की हालत और भी दयनीय है। उचित प्रशिक्षण और

संसाधन के अभाव में संभावित संक्रमण वाले रोगियों के पास रहने वाले स्वस्थ लोग भी

मानसिक तौर पर परेशानी की स्थिति में है। कुछ में तो रखे गये लोग जान बूझकर इतनी

गंदगी फैला रहे हैं ताकि दूसरों को इससे परेशानी हो। यह एक कड़वा सत्य है, जिसपर पर्दा

डालने का काम बड़ी कमाल के साथ किया जा रहा है। ऐसे में राज्यों सरकारों की यह

जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वह जहां तहां फंसे अपने राज्य के नागरिकों की सुध ले और

उनके लिए न्यूनतम साधन संबंधित राज्य सरकार की मदद से उपलब्ध कराये।

जहां तहां फंसे लोगों के लिए सरकार ने पहल की है

यह माना जा सकता है कि झारखंड सरकार शुरु से ही अन्य सरकारों के मुकाबले आगे चल

रही है। लॉक डाउन की घोषणा भी देश से पहले यहां कर दी गयी थी। साथ ही तमाम राज्यों

के लिए नोडल अधिकारियों के नामों का एलान भी कर दिया गया था, जो संबधित राज्यों

के प्रभारी पदाधिकारियों के साथ ताल मेल बैठाकर ऐसे लोगों को जिंदा रहने का पर्याप्त

प्रबंध करेंगे। अनेक किस्म की परेशानियां इसलिए भी हैं क्योंकि यह एक अदृश्य शत्रु का

चौतरफा हमला है, जिसकी तैयारी दुनिया के किसी देश के पास नहीं थी। जल्दबाजी में

सुरक्षित अपने गांव पहुंच जाने की कोशिश में जहां तहां फंसे लोग अब लगातार झारखंड

सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं। हेमंत सोरेन की सरकार ने इस दिशा में लगातार

कदम उठाये हैं। इसी पहल की वजह से अनेक राज्यों में लोगों को राहत भी पहुंची है। लॉक

डाउन की अवधि तीन मई तक बढ़ाये जाने से भी लोगों को बहुत कठिनाइयों का सामना

करना पड़ रहा है। इसके साथ-साथ कुछ भ्रम भी फैलाये जा रहें है। सरकार ऐसे फेक न्यूज

के लिए कठोर कदम उठा रही है। राज्य सरकार ने कहा है कि झारखंड के प्रत्येक नागरिक

जो झारखंड में है अथवा झारखंड के बाहर इस कठिन परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।

राज्य सरकार द्वारा राज्य के बाहर अन्य राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में फंसे

झारखंडवासियों के लिए भी हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है ।

विभाग के आंकड़े बताते हैं कि कहां कितने श्रमिक फंसे हैं

श्रम विभाग से प्राप्त आंकड़ो के अनुसार अब तक 11,828 जगाहों पर 5,82,481 प्रवासी

मजदूरों के फंसे होने की जानकारी प्राप्त हुई है। अब तक सरकार द्वरा 9,018 जगहों पर

फंसे 4,34,804 मजदूरों के खाने एवं रहने की व्यवस्था की गयी है। सभी लोगों के संबंध में

पूरी जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन तक हर स्तर से मदद पहुंचाई जा सके। जहां

तहां फंसे पड़े लोगों के लिए झारखंड सरकार से बेहतर इंतजाम  किसी अन्य राज्य सरकार

की तरफ से नहीं किया गया है। वैसे यह समझ लेने वाली बात है कि इस किस्म की चुनौती

उन राज्यों के लिए अधिक हैं, जहां के लोग रोजगार के लिए दूसरे राज्यों मे जाते हैं।

कोरोना का संकट समाप्त होने के बाद भी ऐसे लाखों लोगों का संकट कायम रहेगा क्योंकि

ऐसे लोग गांव लौट आने के बाद फिर से उन इलाकों में नहीं लौटना चाहेंगे जहां से लौटने

की कोशिश में वे जहां तहां फंसकर रह गये थे। अब लॉक डाउन के तहत इन जहां तहां फंसे

लोगों को उसी स्थान पर राहत उपलब्ध कराने का काम भी जारी रहना चाहिए ताकि उन

इलाकों में उनकी न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार सक्रिय रहे।

यह संकट संक्रमण के पूरी तरह काबू में आने तक कम होने वाला नहीं है।

ऐसी स्थिति में झारखंड जैसे राज्य के सरकार की जिम्मेदारी दूसरों से अधिक

बढ़ जाती है। साथ ही भविष्य के लिए अधिक रोजगार सृजन की चुनौती भी

इस राज्य में महत्वपूर्ण मुद्दा बनने जा रही है।

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