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नदी का पानी बढ़ा तो बाजार को हटाकर अन्यत्र ले जाया गया

  • मछली बाजार में बाढ़ के पानी में जिंदा मछली

  • करला नदी का पानी रविवार से ही चढ़ने लगा

  • घुटना भर पानी में नहीं आ रहे थे ग्राहक

  • बाजार में रखे माल के सड़ जाने का खतरा

प्रतिनिधि

जलपाईगुड़ीः नदी का पानी बढ़ा तो उसके नये नये इलाकों में घुस आना आम बात है। इस

बार की बारिश का प्रारंभिक प्रकोप ही कुछ अधिक है। इसी वजह से बाढ़ के पानी के गांव के

साथ साथ शहरी इलाकों में भी घुसने की लगातार घटनाएं बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में

जलपाईगुड़ी के मछली बाजार में भी बाढ़ का पानी घुस आया तो उसके साथ बाढ़ में बहकर

आने वाली मछलियां भी चली गयी। यहां बाजार में नियमित काम काज के अचानक इस

वजह से बाधित होने के बाद आनन फानन में व्यापारियों ने इस मछली बाजार को ऊंचे

इलाके में स्थानांतरित किया। इस बीच बाजार में अनेक स्थानों पर करीब दो फीट पानी

जमा होन की वजह से वहां रखी सब्जियां एवं अनाज को सुरक्षित वहां से हटाने का काम

भी युद्धस्तर पर किया जा रहा है।

जलपाईगुड़ी के मछली बाजार की यह स्थिति करला नदी में आयी बाढ़ की वजह से बनी

है। नदी का पानी इतना अधिक बढ़ गया कि वहां के बाजार में घुटना भर पानी जमा हो

गया है। रविवार की सुबह से ही जलस्तर का शहरी इलाकों में बढऩे का सिलसिला चालू हो

गया था।

नदी का पानी बढ़ा तो मछली बाजार को ऊपर ले जाना पड़ा

दैनिक बाजार में घुटना भर पानी होने की वजह से अनेक लोग बाजार आने से भी हिचकने

लगे थे। इसी स्थिति को भांपते हुए मछली विक्रेताओं ने आनन फानन में पास के ऊंचे

इलाके में बाजार को स्थापित किया। वहां से फिलहाल मछली बाजार संचालित हो रहा है।

दूसरी तरफ असली मछली बाजार में बाढ़ का पानी जमा होने की वजह से वहां रखे माल

को सुरक्षित हटाने और सड़ने से बचाने के प्रबंध भी किये जा रहे हैं। वैसे इस दौरान बाजार

हटाने को मजबूर हुए मछली कारोबारी दाम गिरने से भी चिंतित हैं। स्थानीय मछली

विक्रेता बाप्पा दास ने कहा कि हालत इतने बिगड़े हुए हैं कि किसी तरह मछली को सस्ते

में बेचना पड़ रहा है। क्योंकि फिलहाल उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं बचा है। जो

स्थायी ठिकाना था वह दो फीट पानी के नीचे डूबा हुआ है।

पानी बढ़ने से प्रभावित परिवारों को राहत

बाढ़ से पीड़ित परिवारों के बीच आज चूड़ा, मुड़ी, गुड़ और बिस्कुट बांटा गया था। स्थानीय

सामाजिक संगठनो की तरफ से भूखे रहने को विवश करीब एक सौ परिवारों के बीच यह

राहत बांटा गया है। इस काम से जुड़े ग्रीन जलपाईगुड़ी संस्था के महासचिव अंकुर दास ने

कहा कि लगभग हर साल जलपाईगुड़ी के कुछ इलाकों के गरीब लोगों को ऐसी परेशानी

बाढ़ की वजह से होती है। इसलिए पहले से ही ऐसे परिवारों की मदद की तैयारी की गयी

थी। इससे कमसे कम अपना घर छोड़कर आने को विवश लोगों को भूखा नहीं रहना

पड़ेगा।


 

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