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जब जनता जाग जाती है तो सरकारें भी बदल जाती हैं- राकेश टिकैत

  • सोनीपत के किसान महापंचायत में केंद्रीय मंत्री तोमर रहे किसानों के निशाने पर

सोनीपतः जब जनता जागती है तो लोग नहीं सरकारें बदल जाती है। किसान नेता राकेश

टिकैत ने आज यहां आयोजित किसान महापंचायत में यह बात कही। वह दरअसल केंद्रीय

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। श्री तोमर ने कहा है कि भीड़

एकत्रित होने से कानून नहीं बदल जाते हैं। इसी पर टिकैत ने कहा जब जनता एकत्रित

होती है तो कानून क्या सरकारें भी बदल जाया करती हैं। उन्होंने साफ साफ कहा कि इस

कानून के सहारे केंद्र सरकार नहीं टिक पायेगी, इस बात को भाजपा नेताओं को समझ

लेना चाहिए। श्री टिकैत ने कहा कि जब तक तीनों कृषि कानूनों की वापसी नहीं होती,

किसानों का आंदोलन चलता रहेगा। यहां के खरखोदा में आयोजित किसान महापंचायत

में जुटे किसानों की भारी भीड़ के बीच किसान नेता ने साफ शब्दों में केंद्र सरकार को फिर

से चेतावनी दी। उन्होंने इस जनसभा में कहा कि मंत्री जी का बयान यह साबित करता है

कि कई नेता अपना दिमागी संतुलन खो चुके हैं। भीड़ एकत्रित होने से कानून तो क्या

सरकार बदल जाया करती है। ऐसे पहले भी भारतवर्ष में हो चुका है। पिछले 28 नवंबर से

दिल्ली की सीमा पर आंदोलन कर रहे किसानों के संदर्भ में केंद्र सरकार को बहुत अधिक

गंभीर हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब अपनी मांग के समर्थन में किसान अपनी

फसल की कुर्बानी दे सकता है तो सरकार की कौन कहता है।

जब जनता के सवाल पर कई  बातें साफ कही टिकैत ने

इसी मंच से किसान नेता ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के लिए भी केंद्र

सरकार से सवाल किया और कहा कि किसानों का यह आंदोलन सिर्फ किसानों का नहीं है

बल्कि यह देश के गरीबों, दिहाड़ी मजदूरों और अन्य कमजोर वर्ग के लोगों का आंदोलन

है। केंद्र सरकार जो भी फैसले ले रही है वह दरअसल देश के गरीबों को बर्बाद करने वाले

फैसले हैं। टिकैत ने कहा कि किसानों का आंदोलन और खेती का काम एक साथ चलता

रहेगा। इसी क्रम में उन्होंने मंच से किसानों को अपनी फसल नष्ट नहीं करने की हिदायत

दी। उन्होंने कहा कि खड़ी फसल नष्ट करने के उनके बयान पर तुरंत ही अमल करने की

कोई जरूरत नहीं है। बताते चलें कि श्री टिकैत द्वारा एक फसल की कुर्बानी का बयान

आने के बाद अनेक इलाकों में किसानों ने अपनी जरूरत भर का अनाज रखने के बाद शेष

अनाज को खेतों में ही नष्ट करना प्रारंभ भी कर दिया था।

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