Press "Enter" to skip to content

देश में कोविड 19 के बुस्टर डोज का क्या होगा




देश में कोविड 19 की रोकथाम के लिए बुस्टर डोज देना है अथवा नहीं देना है, इस पर स्पष्ट एलान नहीं हुआ है। दूसरी तरफ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साफ कर दिया है कि जब तक दुनिया की पूरी आबादी को वैक्सिन के दोनों टीके नहीं लग जाते हैं तब तक ऐसा बुस्टर डोज कारगर नहीं हो सकता क्योंकि एक व्यक्ति का संक्रमण ही फिर से सारी प्रक्रिया पर पानी फेर सकता है।




देश में कोविड 19 की बात छोड़ दें तो पोलियो उन्मूलन अभियान के दौरान भी हम इस सुरक्षा चक्र को टूटते हुए कई बार देख चुके हैं। जिस कारण पोलिया टीकाकरण का अभियान देश में एक साथ कई बार चलाना पड़ा है।

अब विश्व स्वास्थ्य संगठन की बात पर ही चर्चा करें तो देश में अब भी पूरी आबादी को कोरोना वैक्सिन के दोनों टीकों की बात कौन करें, एक टीका भी नहीं लग पाया है। अनेक लोगों को अपने अपने कारणों से टीका लेने पर आपत्ति है।

कई पश्चिमी देशों ने इसी आपत्ति की वजह से यह नियम लागू कर दिया है कि अब आपको बाहर निकलना है तो वैक्सिन के दोनों टीके लगाकर ही निकलना होगा।

देश में कोविड-19 टीका तैयार करने वाली कंपनियां सरकार से बूस्टर खुराक के लिए लॉबिइंग कर रही हैं क्योंकि मांग के मुकाबले टीके की आपूर्ति अधिक है। एक दवा निर्माता कंपनी ने रॉयटर्स को बताया कि उसने रूस के स्पूतनिक टीके की 10 करोड़ और खुराक को बनाने की योजना टाल दी।

वहीं दुनिया की सबसे बड़ी टीका निर्माता कंपनी, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और स्पूतनिक की भारतीय वितरक, डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज ने कहा है कि उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से बूस्टर खुराक के लिए संपर्क किया था।

देश में कोविड 19 के वैक्सिन का उत्पादन घटाया गया

भारत ने कहा है कि इसकी प्राथमिकता देश के 94.4 करोड़ वयस्कों को टीके लगाने से जुड़ा है, हालांकि टीका विशेषज्ञ बूस्टर खुराक की जरूरत का अध्ययन कर रहे हैं। भारत में देश की आधे से अधिक वयस्क आबादी को दो खुराक दी गई है और इनमें से करीब 86 फीसदी आबादी को कम से कम एक खुराक दी गई है।

देश में दी गई कुल 1.3 अरब खुराक में से 90 फीसदी कोविशील्ड टीका रहा है जो सीरम के द्वारा तैयार किया गया एस्ट्राजेनेका टीके का एक लाइसेंसीकृत संस्करण है। सरकार कुल 1.7 अरब टीके की खुराक चाहती है ताकि पूरी वयस्क आबादी को टीके लगाए जाएं।




इसके अलावा सीरम की योजना है कि अगले हफ्ते तक मांग की हिस्सेदारी पूरी करने के लिए लंबित ऑर्डर का काम पूरा कर ले। सीरम ने कहा है कि कोविशील्ड के मासिक उत्पादन को आधी करने की योजना है जो मांग की कमी की वजह से 25 करोड़ खुराक रही है।

यह सात भारतीय कंपनियों में से एक है जिसके साथ रूस के सॉवरिन वेल्थ फंड आरडीआईएफ ने निर्यात और भारत में इस्तेमाल के लिए करीब एक अरब स्पूतनिक खुराक बनाने के लिए करार किया है। लेकिन सरकारी डेटा से पता चलता है कि स्पूतनिक वी टीके की केवल 12 लाख खुराक ही दी गई हैं।

दो सूत्रों ने कहा कि रूस से आयातित सामग्री का इस्तेमाल कर करीब 40 खुराक तैयार की गईं जिनका निर्यात किया गया है। फाइजर ने बुधवार को कहा कि उसके कोविड-19 रोधी टीके की एक बूस्टर खुराक नए ओमीक्रोन स्वरूप से रक्षा कर सकती है, भले ही शुरुआती दो खुराक का प्रभाव काफी कम नजर आए।

ओमीक्रॉन से प्रभाव को अभी समझने में वक्त लगेगा

फाइजर और उसके सहयोगी बायोनटेक ने कहा कि प्रयोगशाला परीक्षणों में दिखा कि ओमीक्रोन के खिलाफ एक बूस्टर खुराक ने तथाकथित तटस्थ ऐंटीबॉडी के स्तर को 25 गुना बढ़ा दिया है। फाइजर ने एक प्रेस विज्ञप्ति में शुरुआती प्रयोगशाला आंकड़ों की घोषणा की और बताया कि इसकी अभी तक वैज्ञानिक समीक्षा नहीं हुई है।

कंपनियां पहले से ही ओमीक्रोन को ध्यान में रखकर टीके के निर्माण के काम में जुटी हैं। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि कोविड-19 टीकों की तीसरी खुराक के साथ ऐंटीबॉडी में आने वाला उछाल प्रभावशीलता में किसी भी कमी का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त हो सकता है।

ऐंटीबॉडी का स्तर बताता है कि एक टीका कोरोनावायरस के संक्रमण को कितनी अच्छी तरह रोक सकता है लेकिन वे प्रतिरक्षा प्रणाली की सुरक्षा की सिर्फ एक परत भर हैं।

फाइजर ने कहा कि टीके की दो खुराक अब भी गंभीर बीमारी से बचाव दे सकती हैं। इसके बीच ही दक्षिण अफ्रीका से ओमीक्रॉन वेरियंट के भारत में आ पहुंचने की वजह से उसपर वैक्सिन के असर की जांच अभी बाकी है।

यह भी ध्यान में रखना होगा कि बेंगलुरु में जो डाक्टर संक्रमित हुआ था वह चौदह दिनों के बाद भी संक्रमित पाया गया है। इसलिए हर फैसला सोच समझकर लेने की जरूरत है।



More from HomeMore posts in Home »
More from ताजा समाचारMore posts in ताजा समाचार »
More from संपादकीयMore posts in संपादकीय »

2 Comments

Leave a Reply

Mission News Theme by Compete Themes.