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क्या से क्या हो गया बेवफा तेरे प्यार में .. .. ..

क्या से क्या हो गया। कहां तो लगता था कि इस बार पुराने पहलवान को पछाड़ ही देंगे

लेकिन उसने तो फिर से न सिर्फ बाजी पलट दी बल्कि खुद ही चैंपियन बनकर सबके

सामने खड़ा हो गया। जी हां मैं बिहार चुनाव की बात कर रहा हूं। अपने सुशासन बाबू के

दांव के आगे सारे पहलवान फेल हो गये। इस बार सिर्फ अलग बात यह है कि दोस्तों की

मंडली ने ही उनके करीबी दोस्त सुशील कुमार मोदी को किनारे लगा रखा है। शायद इस

छोटे मोदी का नीतीश प्रेम बड़े मोदी के समर्थकों के पसंद नहीं आया था। इसलिए नई चाल

चल दी। लेकिन उनके बदले जिन्हें लाया गया है, वे भी जनाब माशा अल्लाह है। पता नहीं

उत्साह में क्या से क्या बोल गये। ऊपर से नकली मेवा लाये थे तो जल्दी ही छोड़ना पड़

गया। अब इतना कुछ होने के बाद भी बेचारे तेजस्वी तो निराश ही होंगे। सबसे बड़ी पार्टी

होने के बाद भी सरकार से दूर। यह भारतीय राजनीति का अइसा दांव है, जिसमें बड़े बड़े

चित हो जाते हैं। अब मध्यप्रदेश में बेचारे कमलनाथ इतने कोशिशों के बाद भी दंगल में

पिछड़ गये। अलबत्ता यह माना जा सकता है कि उन्होंने इस दौर में ज्योतिरादित्य

सिंधिया को जरूर पछाड़ दिया। अब मौका देखकर दिग्गी राजा किसी न किसी दिन फिर

से कोई झमेला करने ही वाले हैं। अभी तो वह खुद कंप्यूटर बाबा के जेल में होने से परेशान

हैं। बिहार में तमाम कोशिशों के बाद भी कांग्रेस फिर से फिसड्डी साबित हो गयी।

दरअसल सारा खेल तो राहुल गांधी के इर्दगिर्द चल रहा है। जितना लोग मिल जुलकर

लग्गी लगा रहे हैं, भाई साहब उतने ही फिसल रहे हैं। लेकिन उनकी अम्मा को लगता है

कि उनका बेटा बहुत होनहार और काबिल है।

क्या से क्या में क्या बोले मां को लगता है कि बेटा काबिल है

सिर्फ यह भाजपा वाले ही उसके खिलाफ एक अभियान चलाये हुए हैं। इन्हीं बातों से फिर

से एक पुरानी सुपरहिट फिल्म का गीत इस मौके पर याद आने लगा है। यह प्रसिद्ध और

अपने जमाने की सुपरहिट फिल्म गाइड का गीत है। इस गीत को लिखा था शैलेंद्र ने और

उसे सुरों में ढाला था सचिन देव वर्मन ने। इस गीत क मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया

था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

क्या से क्या हो गया, बेवफ़ा ऽऽऽ
तेरे प्यार में

चाहा क्या क्या मिला, बेवफ़ा ऽऽऽ
तेरे प्यार में

चलो सुहाना भरम तो टूटा
जाना के हुस्न क्या है
हो ओ ओ

चलो सुहाना भरम तो टूटा
जाना के हुस्न क्या है

कहती है जिसको प्यार दुनिया
क्या चीज़ क्या बला है
दिल ने क्या ना सहा

बेवफ़ा ऽऽऽ
तेरे प्यार में चाहा क्या

तेरे मेरे दिल के बीच अब तो
सदियों के फ़ासले हैं
हो ओ ओ

तेरे मेरे दिल के बीच अब तो
सदियों के फ़ासले हैं

यक़ीन होगा किसे कि हम तुम इक राह संग चले हैं
होना है और क्या
बेवफ़ा ऽऽऽ

तेरे प्यार में
चाहा क्या …

चलिए अमेरिका हो आते हैं। वहां भी ट्रंप भइया फुक्का फाड़कर रो नहीं रहे हैं बल्कि

लगातार अपने साथ धोखा होने की शिकायत करते हुए मामला भी दर्ज करते जा रहे हैं।

यानी एक बात तो साफ है कि जबतक कुर्सी पर हैं तो सब कुछ जायज है और जब कुर्सी

नहीं है तो सब कुछ गलत है।

अब तो दिल्ली में भी जल्द ही ट्रांसफर पोस्टिंग होना है

सब कुछ ठंडा हो गया तो अब दिल्ली में भी ट्रांसफर पोस्टिंग का काम होने वाला है। अरे

नहीं भइया हम अफसरों की बात नहीं कर रहे हैं हम तो मंत्री लोगन की बात कर रहे हैं।

पहले भी होना था लेकिन चीन ने गलवान में झंझट कर सब कुछ गड़बड़ कर दिया। लगता

है कि इस बार के अपने निशिकांत भइया को तो अबकी बार चांस नहीं मिलेगा। बाबू पीएन

सिंह गजब का चुप्पी साधकर चल रहे हैं। मौका भी है क्योंकि बिहार जीतने के बाद मोटा

भाई की नजर बंगाल पर गड़ी हुई है। बंगाल में मुकाबला भी जोरदार होने का अंदेशा है।

ममता के पुराने सिपहसलार ही खेमा बदलकर अब मोटा भाई के साथ हैं। देखना है कि गुरु

चेला की लड़ाई में कौन बाजी मार ले जाता है। कुल मिलाकर वहां के ट्वेंटी ट्वेंटी भी कम

रोचक नहीं होगा, यह तो तय है।

खैर छोड़िये अपने झारखंड में तो हेमंत भइया खिलाड़ी चीज निकले हैं। भाजपा के तमाम

दिग्गजों को पछाड़ते हुए दोनों सीटें जीत ली। वइसे लगता है कि यह रिकार्ड हो रहा है कि

एक ही परिवार के तीन तीन लोग झारखंड में विधायक हैं। बस और 38 लोगों को जुटा लेना

है फिर देखते हैं कौन माई का लाल चैलेंज करता है।

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