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बंदरगाह पहुंचने के बाद जहाज के लोगों को भी हादसे की जानकारी मिली




जहाज के लंगर में फंसकर मर गया था ह्वेल
लंगर ऊपर उठा तो लोगों को नजर आया
जहाज के लोगों को पता भी नहीं था इसका
हर साल करीब एक हजार ह्वेल इससे मर रहे हैं

टोक्योः बंदरगाह पहुंचने के बाद जब लोगों की नजर पड़ी तो लोग जहाग का लंगर देखकर हैरान रह गये। जहाज के लंगर में एक बड़ा सा ह्वेल फंसा हुआ था। लंगर के पानी में उठने के बाद लोगो की नजर इस पर नजर पड़ी।




इसका पता चलने के बाद समुद्री पर्यावरण के वैज्ञानिक पानी के बड़े जहाजो से आवागमन से समुद्री पर्यावरण को होने वाले नुकसान के बारे में दुनिया का ध्यान आकृष्ट कर रहे हैं।

यह घटना जापान के मिजुशिमा बंदरगाह में घटी है। वहां जब एक तेल का टैंकर पहुंचा तो लोगों को और यहां तक की जहाज के ऊपर सवार लोगों को भी ऐसी किसी घटना का एहसास नहीं था। बंदरगाह पर पहुंचने के बाद जब जहाज का लंगर उठाया गया तो लोगों को ध्यान इस तरफ गया।

वहां करीब 39 फीट लंबा एक ह्वेल फंसा हुआ था और वह मर चुका था। इसकी हालत देखकर लोगों को यह बात समझ में आयी थी समुद्र में कहीं पर भी यह ह्वेल इस लंगर में फंस गया था। भारी लोहे के इस लंगर में फंसे रहने की वजह से उसकी मौत भी हो गयी थी।

दूसरी तरफ पानी के नीचे होने के वजह से जहाज पर सवार लोगों को ऐसे किसी हादसे का पता भी नहीं चल पाया था।

मिजिशिमा बंदरगाह के कोस्ट गार्ड कार्यालय ने इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जो ह्वेल मरा हुआ पाया गया है, वह ब्राइडे प्रजाति का नर ह्वेल है।




उसकी वजन करीब पांच टन है। इस घटना की तस्वीर सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया में इस पर चर्चा की बाढ़ आ गयी है।

बंदरगाह पहुंचकर लंगर उठाया तो माजरा सामने आया

इस जहाज के कर्मचारियो के मुताबिक उन्हें पता ही नहीं चला था कि वे पानी के अंदर इस वजन जीव को भी अपने साथ खींचकर ले जा रहे हैं। शायद पानी में होने की वजह से ही उसके अतिरिक्त वजन का एहसास भी जहाज के लोगों को नहीं हो पाया था।

पानी का यह टैंकर प्रशांत महासागर होते हुए इस बंदरगाह पर पहुंचा था। पर्यावरण विशेषज्ञ मानते हैं कि ह्वेल की संरचना कुछ ऐसी होती है कि अगर उसे सीधे पानी के नीचे भेज दिया जाए तो वह मर जाएगा।

इसलिए हो सकता है कि लंगर में फंसकर वह सीधे नीचे चला गया था और उसकी मौत हो गयी।

दूसरी तरफ समुद्री विज्ञान के जानकार मानते हैं कि हर साल इस तरीके से करीब एक हजार से अधिक ह्वेल मारे जा रहे हैं।

यह सभी पानी के जहाजो की वजह से मारे जा रहे हैं। इससे ह्वेल की प्रजाति पर पानी के जहाजों के संचालन की वजह से नये किस्म का खतरा मंडराने लगा है।



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