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बुनकरों के जितना नुकसान तो किसी वर्ग का इस बार नहीं हुआः अलीम अंसारी

  • कोरोना संकट में उनके लिए हर स्तर पर परेशानी ही परेशानी

  • नीतीश कुमार को जानता हूं वह किसी की दबाव नहीं आते

  • सुझाव दिया था कि हर जगह खादी का मास्क खरीदा जाए

दीपक नौरंगी

भागलपुरः बुनकरों के जितना नुकसान को इस कोरोना की दूसरी लहर में किसी दूसरे वर्ग

का नहीं हुआ। यह बयान है बिहार बुनकर कल्याण समिति के सदस्य अलीम अंसारी का।

वीडियो में देखिये क्या कहा उन्होंने

काफी समय से समाजसेवा में सक्रिय रहने वाले अलीम बुनकरों के लिए हमेशा ही मुखरता

के साथ सरकारों के समक्ष आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी तरह पहले झटके

से उबरने के बाद लोगों ने काम शुरु किया था। इसी बीच यह दूसरी लहर ने सब कुछ फिर

से तहस नहस कर दिया। बुनकरों के साथ परेशानी यह आयी तो किसी तरह उनलोगों ने

जो कुछ माल बनाया भी था, उसके सारे के सारे आर्डर फिर से कैंसिल कर दिये गये। इसी

बात से समझा जा सकता है कि समाज के इस वर्ग पर दोहरी मार पड़ी है। उसके साथ साथ

भी वह कोरोना की दूसरी लहर के बीच हर किस्म की परेशानी झेल रहे हैं।

बुनकरों की मदद तो खादी के मास्क से भी

श्री अंसारी ने कहा कि बुनकरों को आर्थिक मदद देने के लिए वह काफी समय से यह मांग

करते आ रहे हैं कि सरकारी स्तर पर सारे मास्क खादी के खरीदे जाए। इस मास्क की

विशेषता यह है कि इसे धोने के बाद कड़े धूप में सूखा लेने के बाद इस्तेमाल किया जा

सकता है। इससे बचाव होता है। लेकिन इसकी खरीद के पीछे उनकी दलील सीधे बुनकरों

को लाभ पहुंचाने की है। जब खादी से कोई भी सामान खरीदा जाता है, तो वह पैसा सीधे

बुनकरों तक जाता है। अब भी अनेक संस्थाएं मास्क बना रही हैं। सरकार को चाहिए कि

वह सभी को यह निर्देशित करे कि वे खादी का कपड़ा ही खरीदे। इससे भी राज्य भर के

बुनकरों की काफी आर्थिक मदद हो जाएगी।

राज्य की राजनीतिक मुद्दों पर बात करने के क्रम में उन्होंने कहा कि वह काफी अरसे से

नीतीश कुमार को जानते हैं। अभी की परिस्थिति में नीतीश कुमार से बेहतर कोई

मुख्यमंत्री नहीं हो सकता था। भाजपा के एजेंडे के बीच मुख्यमंत्री की स्थिति के बारे में पूछे

जाने पर श्री अंसारी ने साफ साफ कहा कि वह खुद नीतीश कुमार को काफी समय से और

काफी करीब से जानते हैं। इसलिए यह तय मानिये कि कोई भी नीतीश कुमार पर दबाव

डालकर कोई काम नहीं करा सकता। वह बिहार की जनता को समान नजरों से देखते हैं

और हर वर्ग के फायदे के लिए ही सोच समझकर फैसला लेते हैं।

अपने पड़ोसी की मदद तो आप कर ही सकते हैं

कोरोना संकट और ईद के मसले पर उन्होंने कहा कि जिस तरीके से पिछली बार कोरोना से

बचाव के तरीकों को अपनाया गया था, इस बार भी वही लागू रहेगा। सामाजिक क्षेत्रों में

सक्रिय रहने वाले श्री अंसारी पिछले कोरोना काल में भी गरीबो के मददगार के तौर पर

याद किये जाते हैं और इस बार भी उनकी यह भूमिका जारी है। उन्होंने कहा कि सभी को

इस पर्व के मौके पर यह देखना होगा कि उनका पड़ोसी, चाहे वह किसी भी धर्म का क्यों ना

हो, परेशान तो नहीं है। समाज के कुछ सौ लोग भी अगर अपनी अपनी क्षमता के मुताबिक

मदद करते रहेंगे तो निश्चित तौर पर गरीबों के सामने अभी जो दो वक्त की रोटी का

संकट है, उससे काफी राहत मिलेगी।

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