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याद रखें अभी हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है

याद रखें और याद दिलाना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हम भारत के लोग खासकर हिंदी

पट्टी के लोग पुरानी बातों को या तो जल्द भूल जाते हैं अथवा हम उनके सबक लिये बिना

ही उन्हें याद नहीं करना चाहते हैं। मानव जाति, जिसे सोचने और समझने की सबसे

बेहतर शक्ति (यह हमारी सोच है, क्या पता चीटियां हमसे ज्यादा समझदार हों), वह

मानव भी अगर दिमाग और विवेक का इस्तेमाल बंद कर दे तो उसमें और किसी पालतू

जानवर में कोई फर्क नहीं रह जाता है। यह चेतावनी स्पष्ट तौर पर कोरोना संकट को

लेकर है। जब पिछला वर्ष प्रारंभ हुआ था तो किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि

अचानक से इतनी बड़ी विपदा मंडराने लगेगा। लेकिन इतना कुछ बीत जाने के बाद भी

हमने क्या यह सोचा कि हमारे देश में ऐसी विपदा क्यों आयी और क्यों हम इसे पहले ही

चरण में नहीं नियंत्रित कर पाये। क्या हमने यह सोचा कि इस एक चूक की वजह से देश

और हमारे परिवार के बजट का क्या हाल हुआ। दिसंबर 2019 के आखिरी दिनों में चीन के

वुहान शहर में नए कोरोना वायरस का कहर जारी था, लेकिन बहुत कम लोगों को इसकी

जानकारी थी। कोरोना वायरस फैलने के बाद लॉकडाउन और सामाजिक दूरी से हर जगह

वृद्धि पर असर पड़ा है, लेकिन भारत जितना जी-20 के किसी देश में नहीं। चालू कैलेंडर वर्ष

की दूसरी तिमाही में जीडीपी सालाना आधार पर करीब 24 फीसदी सिकुड़ गया। इसी

तिमाही में कड़ा लॉकडाउन लगा था। उसके बाद सुधार सामान्य रहा है। भारतीय रिजर्व

बैंक (आरबीआई) का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2020-21 की अंतिम दो

तिमाहियों में बढ़ेगी मगर बहुत कम। चालू वित्त वर्ष में वृद्धि के विभिन्न अनुमान 7.5

फीसदी से लेकर करीब 10 फीसदी कमी है।

याद रखें सरकारी आंकड़े भी सतर्कता का संकेत देते हैं

यह सरकारी काम काज के आंकड़े हैं और हर कोई अपने परिवार पर इसका क्या कुछ

प्रभाव पड़ा है, इसे बेहतर तरीके से जानता समझता है। इसलिए यह जान लीजिए कि यह

संकट अब भी उतना ही गहरा है, जितना वर्ष 2020 में रहा। फर्क सिर्फ इतना है कि जिस

संकट को हमलोगों ने मजाक समझा था, उसका घातक असर हम अपने आस पास देख

चुके हैं। इस स्थिति में भले ही सुधार शुरू हो गया है और और जल्द ही टीकाकरण शुरू होने

वाला है, लेकिन वर्ष 2021 के दौरान इतने बड़े पैमाने पर टीकाकरण की उम्मीद नहीं की

जा सकती है कि सामाजिक दूरी के नियम पूरी तरह खत्म हो जाएं। वैज्ञानिकों और

चिकित्सकों ने बार बार इस बात के लिए आगाह कर दिया है कि कोरोना वैक्सिन का टीका

लग जाने के बाद भी मास्क उतारने और बेवजह भीड़ में धक्का मुक्की करने की कोई

आवश्यकता नहीं है। टीका लगने का अर्थ कोरोना से सुरक्षा की गारंटी भी नहीं है। अगर

फिर से हालत नहीं बिगड़े तो यह उम्मीद है कि भारत आगामी वर्ष के दौरान एशिया में

सबसे अधिक तेज वृद्धि दर्ज करेगा। यह भारत में सुधार की ताकत को नहीं बल्कि उसके

वर्ष 2020 में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में से एक रहने को दर्शाता है। लेकिन यह

सोचने का विषय है कि हम इतने गैर जिम्मेदार कैसे रह गये। भारतीय वृद्धि महामारी के

आने से पहले ही सुस्त पड़ रही थी, जिसका पता वर्ष 2019-20 में तिमाही वृद्धि के आंकड़ों

से चलता है। लेकिन 2020 में श्रम संहिता और कृषि क्षेत्र में कुछ उल्लेखनीय सुधार हुए हैं।

वर्ष 2021 के लिए सवाल यह है कि क्या इन सुधारों को आगे बढ़ाया जाएगा या वे केवल

महामारी की वजह से केवल एकबारगी के लिए ही थे।

भारतीय अर्थव्यवस्था में अभी नया निवेश नहीं हो रहा

भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्याप्त निजी निवेश नहीं हो रहा है। इसकी वजह मांग से अधिक

क्षमता होना और सरकार का लगातार उधार लेना है। ऐसे में अगले साल के केंद्रीय बजट

के आंकड़े अधिक महत्वपूर्ण होंगे। असल में वर्ष 2021 का सबसे अहम आंकड़ा वर्ष के लिए

बाजार से कुल उधार लेने की राशि हो सकती है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में भरपूर नकदी

झोंकने का एक नतीजा यह हुआ है कि दुनिया भर में शेयर बाजार चढ़ रहे हैं। लेकिन यह

शेयर बाजार असली भारतवर्ष की स्थिति को कतई नहीं दर्शाता है। इतना कुछ झेल लेने के

बाद भी अगर ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस का नया स्वरुप देश के कई राज्यों तक पहुंच

गया तो यह समझा जा सकता है कि हम अब भी व्यक्तिगत और सामाजिक तौर पर

लापरवाह ही बने हुए हैं। वरना मरीज और उनके घरवालों की वजह से जो लोग अनजाने में

इस वायरस की चपेट में आ गये उनकी जिम्मेदारी क्या ब्रिटेन से आये व्यक्ति अथवा

उनके परिवार वाले लेंगे। सामाजिक दूरी और मास्क है जरूरी का नारा हमारे आचरण में

शामिल रहे तभी हम इस साल कुछ बेहतर कर पायेंगे, इसे याद रखें तो बेहतर होगा। 

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