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आजादी के 100 वर्ष में खेती को नयी चुनौतियों के अनुरुप ढालने की जरुरत है




प्राकृतिक खेती को जन आन्दोलन बनायें : मोदी
जिला में कम से कम एक गांव को प्राकृतिक खेती से जोड़ें
यह विज्ञान आधारित है और इससे उर्वरा शक्ति बढ़ती है
21 वी सदी में प्राकृतिक खेती कृषि का कायाकल्प करेगा

नयी दिल्ली : आजादी के 100 वर्ष का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने




रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर कृषि की अत्यधिक निर्भरता को समाप्त कर

मामूली खर्च वाली प्राकृतिक खेती को देश को जन आन्दोलन बनाने का आह्वान

किया है ।

श्री मोदी ने गुजरात के आणंद में तीन दिन के प्राकृतिक कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण

राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे दिन किसानों के सम्मेलन को आनलाइन सम्बोधित करते

हुए गुरुवार को कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को जन आन्दोलन बनायें तथा

जिले में कम से कम एक गांव को प्राकृतिक खेती से जोड़ें ।

गुजरात में यह जन आन्दोलन बन गया है और हिमाचल प्रदेश में भी इसका आकर्षण

बढ रहा है 1 उन्होंने कहा कि विश्व में खाद्य सुरक्षा के लिए प्राकृतिक खेती का आज

बेहतर समन्वय करने तथा रासायनिक खाद और कीटनाशक मुक्त कृषि का संकल्प

लेने की जरुरत है ।

उन्होंने कहा कि भारत में जैविक और प्राकृतिक खेती के उत्पादों के प्रसंस्करण में

निवेश की अपार संभावना हैं तथा विश्व बाजार ऐसे उत्पादों का इंतजार कर रहा है ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षाे में हजारों किसानों ने प्राकृतिक खेती को अपनाया

है और अनेक र्स्टट अप भी इस क्षेत्र में आ गये हैं ।

किसानों को बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण और मदद दी जा रही है । उन्होंने कहा कि आज

खेती को केमिकल लैब से प्रकृति की प्रयोगशाला से जोड़ने की जरुरत है । प्राकृतिक

खेती विज्ञान आधारित है और इससे जमीन की उर्वराशक्ति बढती है । श्री मोदी ने

खेती के संबंध में प्राचीन ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के फ्रेम में डालने की जरुरत पर

बल देते हुए कहा कि इससे जुड़े ज्ञान को शोध या सिद्धांत तक सीमित रखने की




जरुरत नहीं है ।

आजादी के 100 वर्ष बाद आधुनिक विज्ञान के साथ बढ़े

ग्रीष्मकालीन फसलों की बुआई में उल्लेखनीय वृद्धिऐसी जानकारी को प्रयोग में लाने की आवश्यकता है । श्री मोदी ने प्राकृतिक खेती को

देसी गाय आधारित बताते हुए कहा कि इसके गोबर और मूत्र से मिट्टी की ताकत

बढ़ती है और फसल की सुरक्षा भी होती है । इसमें खाद और कीटनाशक पर खर्च नहीं

होता है और सिंचाई की भी कम जरुरत होती है । यह पद्धति बाढ़ और सूखे से भी

निपटने में सक्षम है ।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरक ने हरितक्रांति में अहम भूमिका निभायी है लेकिन

इसके विकल्प पर भी काम करते रहना होगा । उर्वरक और कीटनाशकों के आयात पर

बहुत अधिक खर्च करना पड़ता है जिससे कृषि लागत बढ जाती है ।

उन्होंने सवाल किया कि बहुत अधिक उर्वरकों के प्रयोग से जब मिट्टी और मौसम ही

जवाब देने लगें और तथा जल सीमित हो तब क्या करना चाहिए? उन्होंने कहा कि 21

वी सदी में प्राकृतिक खेती कृषि का कायाकल्प करेगा । आजादी के 100 वर्ष में खेती

को नयी चुनौतियों के अनुरुप ढालने की जरुरत है ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले छह सात साल के दौरान किसानों की आय बढाने और

कृषि उत्पादन में वृद्धि के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाये हैं । बीज से बाजार , और

मिट्टी जांच से फसलों की लागत के डेढ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के निर्धारण ,

सिंचाई सुविधाओं में विस्तार , किसान रेल , पशुपालन , मधुमक्खी एवं मत्स्य पालन

जैव ईंधन तथा सौर ऊर्जा से किसानों को जोड़ा गया है । उन्होंने कहा कि गांवों को

भंडारण , कोल्ड चेन और खाद्य प्रसंस्करण से जोड़ा गया है । किसानों को फसलों के

विकल्प दिए गये हैं ।



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