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ध्यान भटकाने के लिए अब कोविड सामग्रियों पर कर कम होगा

ध्यान  भटकाने के लिए अब कोविड सामग्रियों पर कर कम होगा

ध्यान भटकाने की प्रक्रिया पहले से ही जारी है। अब चूंकि लोग लगातार बजट के कोरोना

से लड़ने के 35 हजार करोड़ के बारे में पूछ रहे हैं, इसलिए यह उम्मीद रखिये कि आगामी

12 जून को होने वाली जीएसटी परिषद की बैठक में कोरोना से संबंधिक सामग्रियों पर से

कर का बोझ कम किया जा सकता है। इसकी मांग पहले भी की गयी थी लेकिन उस वक्त

केंद्र सरकार ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया था। अब सभी के लिए वैक्सीन और

गरीबों को नवंबर तक राशन देने के एलान के बाद यही बात बची है, जिसके जरिए 35

हजार करोड़ के बजट के असली सवाल से ध्यान भटकाने की नई कोशिश की जा सके। खुद

प्रधानमंत्री ने भी राष्ट्र के नाम संबोधन में अनेक बातें कहीं लेकिन जिसका बड़ी जोर शोर

से बजट प्रस्तुत करते वक्त प्रचार किया गया था, वह मुद्दा ही गोल हो गया। इसलिए यह

उम्मीद की जा सकती हैकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 12 जून

को होने वाली वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की बैठक में कोविड राहत से जुड़ी

आवश्यक सामग्रियों और ब्लैक फंगस की दवाओं पर जीएसटी दर में कटौती पर विचार

किया जा सकता है। ऐसा इसलिए भी संभव है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना वैक्सीन से

जुड़े सारे दस्तावेजों की मांग कर निश्चित तौर पर केंद्र सरकार को असहज स्थिति में डाल

दिया है।

ध्यान भटकाने की जरूरत सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद

अब दस्तावेज अदालत में पेश होने के बाद सच्चाई का पता चल पायेगा। इस बीच ही कल

यानी 12 जून को जीएसटी परिषद की बैठक होने जा रही है। इससे पूर्व मंत्रिसमूह द्वारा

परिषद को सोमवार को सौंपी गई रिपोर्ट के बाद यह बैठक होने जा रही है। परिषद द्वारा

28 मई को गठित मंत्रिसमूह को कोविड संबंधित सामग्रियों – टीका, दवाएं एवं उपकरणों

आदि पर कर छूट एवं रियायत देने पर विचार करने का जिम्मा सौंपा गया था। मंत्रिसमूह

की रिपोर्ट के अनुसार कोविड-रोधी टीके पर जीएसटी दर में किसी तरह के बदलाव की

सिफारिश नहीं की गई है। देश में बने टीके पर अभी 5 फीसदी जीएसटी लगता है, वहीं

कोविड संबंधित दवाओं और ऑक्सीजन कन्संट्रेटर पर 12 फीसदी जीएसटी लगता है।

इसके अलावा मंत्रिसमूह ने पीपीई किट (5 फीसदी), एन97 और सर्जिकल मास्क (5

फीसदी) तथा एंबुलेंस (28 फीसदी) पर मौजूदा जीएसटी की दर बरकरार रखने का प्रस्ताव

किया है। हालांकि आयात एवं घरेलू आपूर्ति वाले कोविड संबंधित दवाओं एवं सामग्रियों में

से अधिकांश पर जीएसटी अस्थायी तौर पर शून्य से लेकर 5 फीसदी करने का सुझाव

दिया है। इनमें चिकित्सा ऑक्सीजन, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर, वेंटिलेटर, पल्स

ऑक्सीमीटर, जांच किट आदि शामिल हैं। थर्मामीटर पर जीएसटी को 18 फीसदी से

घटाकर 12 फीसदी करने का सुझाव दिया गया है। टीके पर मंत्रिसमूह ने कहा, ‘टीके पर

जीएसटी दर विवादास्पद मसला है। इसके सभी पहलुओं पर ध्यान दिया गया और शून्य

से लेकर 0.1 फीसदी जीएसटी के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया। लेकिन व्यापक

विचार-विमर्श के बाद मंत्रिसमूह का मानना है कि टीके की खरीद के विभिन्न स्तर पर

अलग-अलग कर ढांचा रखना व्यवहार्य नहीं होगा।

कई प्रमुख पत्र पत्रिकाओँ ने रिपोर्ट का अध्ययन किया है

इसके साथ ही अधिकांश टीके की खरीद केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा की जा रही है और

लोगों को मुफ्त में दिया जा रहा है। ऐसे में जीएसटी घटाने से लोगों, सरकार और

विनिर्माता को कोई फायदा नहीं होगा। इसलिए टीके पर जीएसटी दर में बदलाव से

आपूर्ति, मांग या ग्राहकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसके अलावा अगर कर से छूट दी गई

या 0.1 फीसदी कर लगाया गया तो इससे घरेलू विनिर्माताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

जीएसटी परिषद के निर्णय के अनुसार मुफ्त आवंटन के लिए आयात किए गए कोविड

टीके या भुगतान के आधार पर आयातित टीकों को बुनियादी सीमा शुल्क और

आईजीएसटी से 31 अगस्त तक छूट देने का निर्णय पहले ही किया जा चुका है, जिसकी

अवधि जरूरत पडऩे पर बढ़ाई जा सकती है। मंत्रिसमूह ने कहा कि कोविड के उपचार में

उपयोग होने वाली दवाओं को खर्च मरीजों द्वारा वहन किया जाता है और वे काफी महंगी

भी हैं। ऐसे में चुनिंदा दवाओं पर जीएसटी दरों में कमी करने पर विचार किया गया।

कोविड संबंधित वस्तुओं एवं उपकरणों पर कर घटाने के प्रस्ताव पर 28 मई को जीएसटी

परिषद की बैठक में चर्चा की गई थी लेकिन इनमें कोई बदलाव नहीं किया गया क्योंकि

केंद्र सरकार का मानना था कि इससे आम लोगों को कोई लाभ नहीं होगा। दूसरी तरफ

आम आदमी कोरोना के बजट से कुछ बचत भले ही कर लें पेट्रोल के बढ़ते दाम से वह

बचत फिर से समाप्त हो जाएगी, इस बात को भी ध्यान भटकाने का एक और हथियार

माना जाना चाहिए।

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