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चेतावनी सुनकर जब तक निकल पाते तब तक तो पानी और मलवा आ गया

  • ठंडे पानी में छत की रॉड पकड़कर बचे रहे

  • सुरंग में अब भी फंसे हैं अनेक लोग कई नेपाली मूल के

  • जो बचे हुए होंगे उनके लिए नया कोई खतरा नहीं है अब

  • मोबाइल की वजह से बचाव दल को पता चला तो जान बची

विशेष प्रतिनिधि

चमोलीः चेतावनी सुनाई पड़ी थी। हम सुन पाये थे कि लोग हमसे भाग निकलने को कह

रह हैं। लेकिन जब तक हम भाग पाते, सारा पानी और मलवा तेजी से अंदर आने लगा।

घने अंधेरे में हमलोग छत की रॉड पकड़ कर किसी तरह खुद को बचाये रखने में कामयाब

रहे। वहां से सकुशल निकाले गये जिओलॉजिस्ट के श्रीनिवास रेड्डी ने यह बात कही। वह

उन 12 सौभाग्यशाली लोगों में से एक हैं, जिन्हें बचाव दल ने मोबाइल लोकेशन के आधार

पर बचा लिया है। अस्पताल में भर्ती यह सारे लोग अब तक उस आतंक की मनोदशा में

पूरी तरह नहीं उबर पाये हैं। श्री रेड्डी ने कहा कि दो दिन की बारिश और बर्फवारी के बाद

अच्छी धूप खिली हुई थी। हमें यह अंदेशा भी नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है। अचानक

हमें सुरंग के अंदर यह आवाज सुनाई पड़ी कि जल्द से बाहर निकलकर भाग जाओ। ऐसा

सुनकर सुरंग के अंदर मौजूद लोग जब तक बाहर निकल पाते तो सारा कुछ बदल चुका

था। अचानक से बर्फ से पिघला ठंडा पानी और उसके साथ मलवा सुरंग के अंदर आऩे

लगा। वैसी स्थिति में सारे सुरंग में पानी भर गया। बचने के लिए सभी ने सुरंग की छत पर

लगे लोहे के रॉडों को पकड़ रखा था। सुरंग के अंदर फंसे लोगों के जूतों के अंदर भी यह ठंडा

पानी भर गया था। ऐसे में पूरे शरीर का वजन हाथों पर उठाते हुए छत की हुकों से खुद को

पानी से ऊपर रखना काफी कठिन काम था।

चेतावनी सुनकर खुद को मानसिक तौर पर तैयार कर लिया था

पचास वर्षीय रेड्डी जिस सुरंग में फंसे थे वह तीन मीटर चौड़ी और छह मीटर ऊंची है।

सुरंग के अंदर करीब दो मीटर तक पानी भर चुका था। ऐसे में छत से टंगे रहने के अलावा

कोई और विकल्प भी नहीं था। काफी देर के बाद जब ऐसा लगा कि अब पानी नहीं बढ़ रहा

है तो हमलोग एक साथ धीरे धीरे सुरंग के प्रवेश द्वार की तरफ बढ़ने लगे। उनके साथ जो

लोग थे उनमें से अधिकांश नेपाली मूल के हैं। श्री रेड्डी ने कहा कि बाहर निकलकर

अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहला काम मैंने अपनी पत्नी को खुद के सकुशल होने की

जानकारी दी। वैसे तब तक उनकी पत्नी टीवी पर यह समाचार देखकर बदहाल हो चुकी

थी।  नेपाल से आये बसंत यहां पिछले तीन वर्षों से काम कर रहे हैं।

सुबह का मौसम देखकर लगा नहीं था कि ऐसा कुछ हो सकता है

उसके मुताबिक सुबह के आठ बजे अन्य दिनों की तरह ही लोगों ने काम करना प्रारंभ कर

दिया था। करीब साढ़े दस बजे एक तेज शोर सुनाई पड़ा। जिस सुरंग में यह काम चल रहा

है उसे 360 मीटर लंबा होना है। इसमें से तीन सौ मीटर की खुदाई हो चुकी है। इतने अंदर

होने की वजह से बाहर से लोगों की चेतावनी सुनकर सुरंग से बाहर निकलने का मौका नहीं

था। जब तक हमलोग संभल पाते सबकुछ उलट पुलट हो चुका था। पानी भर जाने के बाद

भी किसी छेद से मोबाइल नेटवर्क का संपर्क चालू रह गया था। इसी वजह से बाहर के लोगों

को इस बात की जानकारी मिल पायी कि हमलोग कहां हैं। अपने लोगों को फोन पर सूचना

देने के बाद दो तीन घंटे के भीतर ही बचाव दल पहुंच गया। वे अपने साथ यंत्र लेकर आये

थे। सुरंग के अंदर का मलवा हटाकर रस्सी के सहारे ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे के

बाद वहां के लोगों को बाहर निकाला गया

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