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हमने खुद यह परेशानी अपने सर पर ली है

हमने खुद ही कोरोना की दूसरी लहर को न्योता भेजकर आमंत्रित किया है, इस वाक्य को

अतिशयोक्ति ना मानें। जब हालात सुधर रहे थे तो हम अपनी आदत के मुताबिक

अनियंत्रित होते चले गये। हरेक को यही आभाष था कि कोरोना उनका क्या बिगाड़ लेगा।

नतीजा अब हमारे सामने है। लेकिन इसके बीच यह शोध का विषय है कि क्या महाराष्ट्र में

कोरोना गाइड लाइनों का बिल्कुल भी पालन नहीं हो रहा है। वरना वहां ऐसी हालत आखिर

क्यों हैं, इसे समझने की जरूरत है। हमने खुद मास्क नहीं लगाने और एक दूसरे से दूरी

बनाकर नहीं रखने की गलती की है। सुनने में कड़वा लगेगा लेकिन अगर यही फैसला

सरकार ने किया होता कि अब कोरोना संक्रमितों को अपना खर्च खुद वहन करना पड़ेगा,

कोई बीमा कंपनी उनका यह खर्च नहीं उठायेगी तो शायद हम अनुशासन में होते और देश

को फिर से इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा होता। कोरोना संक्रमण के सारे

रिकार्ड टूट रहे हैं। आज का आंकड़ा एक लाख के पार जा पहुंचा है। याद दिला दें कि पिछले

साल सितंबर के बाद देश में एक दिन में संक्रमण के 93,000 मामले आने के बाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार यानी कल को एक उच्चस्तरीय बैठक में राज्यों से कहा

कि वे उन जगहों पर कड़े कदम उठाते हुए व्यापक प्रतिबंध लगाएं। यह बैठक कोरोना

वायरस संक्रमण के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी होने और देश में टीकाकरण अभियान

की प्रगति का जायजा लेने के लिए बुलाई गई थी क्योंकि देश में एक दिन में सबसे अधिक

मामले दर्ज किए गए हैं जो सितंबर के मध्य से अब तक एक दिन में संक्रमण के सबसे

ज्यादा मामले हैं।

हमने खुद लापरवाही बरत कर परेशानी बुलायी है

जिन राज्यों में संक्रमण के ज्यादा मामले देखे जा रहे हैं, उन राज्यों से मोदी ने कहा है कि

वे सतर्कता अभियान को जारी रखें ताकि पिछले 15 महीनों में कोविड-19 के प्रबंधन में

सामूहिक तौर पर जो तेजी लाई जा सकी है उसे गंवाया न जाए। आज बीते कल का आंकड़ा

भी हम खुद पीछे छोड़ आये हैं। देश को लॉकडाउन पर आपत्ति है लेकिन हम खुद

अनुशासित नहीं रह पा रहे हैं। भारत में पिछले साल सितंबर में कोरोनावायरस के सबसे

ज्यादा मामले देखे गए थे और 17 सितंबर को एक दिन में ही 97,000 मामले आए थे।

करीब 81 फीसदी नए मामले अकेले महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, दिल्ली, तमिलनाडु,

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत 8 राज्यों में हैं। पिछले 14 दिनों में देश में कुल

मामलों में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 57 प्रतिशत तक है और इसी अवधि में देश में हुई कुल

मौत में 47 फीसदी मौतें इसी राज्य में हुई हैं। महाराष्ट्र में, रोजाना आने वाले नए मामलों

की कुल संख्या 47,913 हो गई है जो इसके शीर्ष शिखर के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है।

कुल कोविड संक्रमण में पंजाब का योगदान 4.5 फीसदी है जबकि देश में होने वाली कुल

मौत में इसकी हिस्सेदारी 16.3 फीसदी तक है। बैठक के दौरान देश में टीकाकरण

अभियान, अन्य देशों के लिहाज से देश का प्रदर्शन और सभी राज्यों के प्रदर्शन से जुड़े

विश्लेषण पर एक संक्षिप्त प्रेजेंटेशन भी दिया गया। सरकारी स्तर पर इतनी सारी

व्यवस्थाएं होने के बाद हमारी जिम्मेदारी क्या है। हमें बार बार यह बताया गया है कि

खतरा क्या क्या है।

पहले से बार बार बताया गया है कि बचाव कैसे करना है

हम खुद मास्क लगाकर एक दूसरे से दूरी बनाकर सरकार ने कहा है कि टीका निर्माता

अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा रहे हैं और उत्पादन बढ़ाने के लिए अन्य घरेलू और विदेशी

कंपनियों के साथ भी चर्चा कर रहे हैं। सरकार 6 से 14 अप्रैल तक सार्वजनिक तथा

कार्यस्थलों तथा स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर 100 फीसदी मास्क का इस्तेमाल करने,

व्यक्तिगत साफ.-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर देने के लिए एक विशेष

अभियान शुरू करेगी। मोदी ने राज्यों से स्वास्थ्यसेवा के बुनियादी ढांचे, ऑक्सीजन की

उपलब्धता, वेंटिलेटर के साथ-साथ अन्य जरूरी सामान की तैयारी रखने को कहा है ताकि

लोगों को मरने से बचाया जा सके। प्रधानमंत्री की बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि

संक्रमण के मामलों में तेजी की प्रमुख वजह यह भी है कि संक्रमण से बचने के लिए मुख्य

रूप से मास्क के इस्तेमाल और ‘दो गज की दूरी’ को बनाए रखने के निर्देशों के पालन में

काफी ढीलापन आ गया जिसकी वजह से क्षेत्र के स्तर पर रोकथाम उपायों के प्रभावी

क्रियान्वयन में काफी कमी आ गई। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ‘115.4 दिनों

में कोविड मामलों के दोगुने होने के समय में तेजी आई है। बयान में यह भी कहा गया है

कि कुछ राज्यों में संक्रमण के मामलों की वृद्धि में कोरोनावायरस के नए म्यूटेंट स्ट्रेन का

भी योगदान है, वहीं कुछ लोग अभी इसको लेकर अटकल ही लगा रहे हैं। लेकिन महामारी

को नियंत्रित करने के उपाय एक ही थे। हम खुद इन उपायों को जानने के बाद भी इसमें

लगातार लापरवाही बरतते आये हैं। जिसका खामियजा अब सामने आ रहा है।

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